पेट्रोल-डीजल के दाम होंगे सस्‍ते, मई में 16 फीसदी तक टूटा कच्‍चा तेल

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New Delhi: बढ़ते वैश्विक व्यापारिक तनाव की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में पिछले महीने भारी गिरावट आई है. बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव शुक्रवार को साढ़े पांच फीसदी से ज्यादा टूटा. पिछले महीने मई में ब्रेंट क्रूड के भाव में 16 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, जिससे अब भारत में पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की उम्मीद जगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनी नई सरकार के लिए यह राहत की बात होगी कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने से देश के आयात बिल का बोझ घटेगा. दरअसल, भारत अपनी तेल की जरूरतों का तकरीबन 84 फीसदी आयात करता है.

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी राहत दिलाने वाली है क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल समेत अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घटेगी. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बीते दिनों घटने के कारण ही घरेलू तेल विपणन कंपनियों ने शनिवार को लगातार तीसरे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती जारी रखी.

उर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने कहा कि निस्संदेह यह देश की नई सरकार के लिए अच्छी खबर है कि अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में भारी गिरावट आई. तनेजा के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में उतार-चढ़ाव का असर करीब दो सप्ताह बाद भारत में दिखता है.

हालांकि वह यह भी कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि या कटौती इस बात पर भी निर्भर करता है कि तेजी के दौर में तेल कंपनियों ने कितने आयात के सौदे में कटौती की या फिर दाम में नरमी आने पर सौदे कितने बढ़े.

उन्होंने कहा कि भारत अपनी तेल की खपत का 84 फीसदी आयात करता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव घटने से सरकार ही नहीं, उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी.

अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज(आईसीई) पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का अगस्त डिलीवरी अनुबंध पिछले सत्र के मुकाबले 3.64 डॉलर यानी 5.57 फीसदी की भारी गिरावट के बाद 61.69 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. यह पिछले छह महीने में सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट है. इससे पहले 24 दिसंबर 2018 को ब्रेंट क्रूड का भाव 6.22 फीसदी की गिरावट के बाद 50.47 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था.

ब्रेंट क्रूड का भाव 25 अप्रैल को अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में 75.60 डॉलर प्रति बैरल हो गया था जोकि इस साल का सबसे ऊंचा स्तर है. उसके बाद तेल के दाम में गिरावट आई है.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (करेंसी व ऊर्जा रिसर्च) अनुज गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पिछले महीने कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट रही है जोकि नवंबर 2018 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है, लिहाजा नवगठित सरकार के लिए यह अच्छा संकेत है जो सरकार को देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार दिलाने में सहायक होगी क्योंकि पिछले साल की आखिरी तिमाही में देश की जीडीपी संवृद्धि दर पिछली तिमाही के 6.6 फीसदी से घटकर 5.8 फीसदी रह गई.

गुप्ता ने कहा कि चीन के बाद मेक्सिको व अन्य देशों के आयात पर अमेरिका द्वारा शुल्क लगाने की चेतावनी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका बनी हुई है, लिहाजा तेल के दाम में गिरावट आई है.

हालांकि तनेजा ने इस बात की आशंका जताई है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फिर तेल के दाम में तेजी आ सकती है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण तेल के दाम में दोबारा वृद्धि हो सकती है.

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