रांची हिंसा को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर, आरोपियों में ओवैसी समेत कईयों के नाम

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Ranchi: रांची हिंसा की घटना झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच गयी है. डालटनगंज के रहनेवाले पंकज कुमार यादव ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है. इसमें अदालत से घटना की जांच नेशनल इनवेस्टीगेटिंग एजेंसी से जांच कराने का आग्रह किया गया है.

उन्होंने याचिका में नौ लोगों को रेस्पांडेंट बनाया है. इसमें हैदराबाद के सांसद असदूद्दीन ओवैसी, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव यास्मीन फारूकी को आरोपी बनाया गया है. मामले में रांची के उपायुक्त, एसएसपी, मुख्य सचिव, एनआइए, ईडी और आयकर आयुक्त को पार्टी बनाया गया है.

दायर याचिका में कहा गया है कि एनआइए इस प्रायोजित दंगे की जांच करे और यह पता करे कि किस संगठन ने फंडिंग कर शुक्रवार की घटना को अमली जामा पहुंचाया. नूपुर शर्मा के बयान पर जिस तरह से माहौल बना कर रांची के वरीय आरक्षी अधीक्षक और हजारों लोगों पर पत्थरबाजी की गयी, जिसमें कई थानेदार भी शामिल हैं.

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दंगाईयों ने प्रतिबंधित अस्त्र-शस्त्र का उपयोग किया और रांची के मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर और काली मंदिर पर ईंट-पत्थरों से हमला किया. कोर्ट से वैसे धार्मिक गुरुओं को भी पकड़ने की मांग की है, जिन लोगों ने एक समुदाय के लोगों को उकसाया.

झारखंड संपत्ति विनाश एवं क्षति निवारण विधेयक 2016 के तहत जिला प्रशासन के अधिकारियों को संदिग्ध आरोपियों के घरों को डिमोलिश करने का आदेश भी दिये जाने की मांग की गयी है. याचिका में एक खास समुदाय को लक्ष्य कर आक्रमण करने वालों की पहचान करने की मांग की गयी है.

सर्वोच्च न्यायालय के 24 नवंबर 2016 को याचिका 6718 ऑफ 2016 के जजमेंट के आधार पर झारखंड हाईकोर्ट भी मामले पर संज्ञान ले.

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इस याचिका में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या समुदाय के लोगों पर भी आरोप लगाया गया है, जो रांची में रह रहे हैं. यह कहा गया है कि इनकी भूमिका पर भी जांच होनी चाहिए. याचिकाकर्ता ने पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ रांची के अलगाववादियों का लिंक तलाशने की मांग भी की है.

यह कहा गया है की पीएफआई एक्टिविस्टों ने 10 जून 2022 को देश के 14 राज्यों में ऐसी हिंसा की है. तीन जून 2022 को कानपुर में भी हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया गया है. यह कहा गया है कि पीएफआई ने स्थानीय लोगों की मदद से यह टार्गेटेड वायलेंस किया है. इसके लिए पीएफआई ने फंडिंग भी की है.

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