Take a fresh look at your lifestyle.

8 लाख तक सलाना आय वाले सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का फैसला

सवर्ण जाति के लोगों को मिलेगी सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण

0

New Delhi: केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार के फैसले के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों (ऊंचे तबकों ) सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा.

खबरों के मुताबिक सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है.

बताया जाता है कि इस बाबत सरकार मंगलवार को संसद में संविधान संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है. इस संशोधन को अगर संसद की मंज़ूरी मिलती है तो सालाना आठ लाख रुपए से कम आमदनी वाले ऊंचे तबके से जुड़े परिवारों के बच्चों को शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरिया में अन्य आरक्षित वर्गों की तरह आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. जबकि यह आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से अलग होगा.

इस संशोधन को अगर संसद की मंज़ूरी मिलती है तो सालाना आठ लाख रुपए से कम आमदनी वाले ऊंचे तबके से जुड़े परिवारों के बच्चों को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.

गौरतलब है कि सरकार को इस बाबत संविधान संशोधन विधेयक इसलिए लाना पड़ सकता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित आरक्षण की अधिकतम सीमा पचास फीसदी तय कर रखी है.

इधर केंद्र सरकार के इस फैसले को लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जाने लगा है. बताया जा रहा है कि सवर्णों और मध्यम वर्ग का एक तबका इस सवाल पर सरकार से नाराज चल रहा था.

लेकिन केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला इससे इत्तेफाक नहीं रखते. एनडीटीवी की खबरों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, ‘दस फीसदी आरक्षण मामले पर मोदी जी ने ये बहुत बड़ा फैसला लिया है. यह पहले से बीजेपी के एजेंडे पर था. इसका चुनाव से कोई लेना देना नहीं है. वैसे भी हमने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस से अधिक वोट पाया’

गौरतलब है कि  गुजरात में पहले से ही गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण है. गुजरात में पाटीदारों के आरक्षण की मांग को लेकर हुए बड़े आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने पटेलों की नाराज़गी को कम करने के लिए साल 2010 में सवर्ण गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी.

सवर्णों को आरक्षण क्‍यों

1- सवर्णों में भी हैं गरीब: यह आम धारणा है कि सवर्ण का मतलब होता है समर्थ लेकिन यह सही नहीं है. सवर्णों में भी आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं. यह आंकड़ों से भी साबित हो चुका है. इसके मद्देनजर आरक्षण उनकी जायज मांग है.

2- खेती की खराब हालत: पिछले कुछ सालों से कृषि क्षेत्र और किसानों की हालत खराब हुई है. फसल उगाने के लिए पहले से ज्यादा निवेश करना पड़ रहा है जबकि उससे बहुत अच्छा रिटर्न नहीं मिल रहा है. इससे न सिर्फ सवर्ण बल्कि अन्य जातियां भी प्रभावित हुई हैं लेकिन आरक्षण के कारण अन्य जातियों को इससे बचने में मदद मिली है जबकि आर्थिक रूप से सवर्ण के पास कोई चारा नहीं है.

3- शहरों में रोजगार में कमी: शहरी इलाकों में रोजगार के घटते अवसरों के कारण भी लोगों में असंतोष है. खासकर निजी क्षेत्र में पहले कम नौकरियां हैं. जहां तक सार्वजनिक क्षेत्र की बात है तो वहां आरक्षण के कारण सवर्णों के लिए बहुत कम मौके हैं.

4- आरक्षण का फायदा: आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के महसूस हो रहा है कि बिना आरक्षण के उनका कल्याण संभव नहीं है क्योंकि अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं कि कैसे एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लोग आरक्षण का फायदा उठाकर आगे बढ़ रहे हैं. न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी वे मजबूत हुए हैं.

5- राजनीतिक समर्थन: सवर्णों को आरक्षण की मांग बहुत पुरानी है. इसे राजनीतिक समर्थन भी प्राप्त है. दरअसल, कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसी नहीं है जो इसका विरोध करने का साहस कर सके. यहां तक कि बसपा जैसी पार्टी भी सवर्णों के लिए आरक्षण की वकालत कर चुकी है.

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More