पेगासस स्पाइवेयर क्या है? जानें NSO Group की पूरी कुंडली | Pegasus meaning in Hindi

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पेगासस स्‍पाइवेयर एक जासूसी सॉफ्टवेयर है. इसका इस्‍तेमाल कंपनियां, सरकार, पत्रकारों और राजनेताओं सहित बड़े सेलिब्रिटीज की जासूसी के लिए करती है. भारत में तब इसका चर्चा गर्म हुआ है जब कांग्रेस के राहुल गांधी की जासूसी इसी स्‍पाइवेयर सॉफ्टवेयर पेगासस से हुई. इस सॉफ्टवेयर के शिकार भाजपा के मंत्री अश्विनी वैष्‍णव और प्रहल्‍लाद पटेल भी हुए. पेगासस से पूर्व निर्वाचन आयुक्‍त अशोक लवासा और चुनाव लड़ने के मास्‍टरमाइंड प्रशांत किशोर की भी जासूसी हुई.

भारत में कौन कौन हुए पेगासस स्‍पाइवेयर से जासूसी के शिकार

अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया संघ ने जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल के सीएम ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी और भारत के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर अप्रैल 2019 में यौन उत्‍पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की कर्मचारी और उसके रिलेटिव से जुड़े 11 मोबाइल नंबरों को जासूसी के लिए टारगेट किया गया. एडीआर के फाउंडर जगदीप छोकर और टॉप के वायरोलॉजिस्‍ट गगनदीप कांग की भी जासूसी हुई.

जारी रिपोर्ट के मुताबिक राजस्‍थान की तत्‍तकालीन सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के निजी सचिव और संजय कचारू की जासूसी भी पेगासस स्‍पाइवेयर से हुई.

द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 40 भारतीय पत्रकारों और दुनिया के 140 रिपोटर्स के फोन हैक किये गये. इनमें हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स और मिंट के तीन पत्रकारों के नाम शामिल हैं. साथ ही फाइनेंशियल टाइम्‍स की संपादल रौला खलाफ और इंडिया टुडे, नेटवर्क-18, द हिंदू, द इंडियन एक्‍सप्रेस, द वॉल स्‍ट्रीट जर्नल, सीएनएन, द न्‍यूयार्क टाइम्‍स और ले मॉन्‍टे के सीनियर जर्नलिस्‍ट के फोन को भी हैक किया गया.

दिल्‍ली यूनिवसिर्टी के एक पूर्व प्रोफेसर और जून 2018 से अक्‍टूबर 2020 के बीच एल्‍गार परिषद मामले में गिरफ्तार आठ कार्यकर्ताओं के फोन हैक किये जाने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है.

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पेगासस स्‍पाइवेयर क्‍या है

पेगासस स्‍पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो मोबाइल फोन पर इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल कर हर डिटेल की जानकारी देने में सक्षम है. यह फोन में मौजूद मीडिया फाइल और डॉक्‍यूमेंट्स को भी ट्रैक करता है. साथ ही मोबाइल फोन पर आने-जाने वाले एसएमएस, ई-मेल और सोशल मीडिया मैसेज की जानकारी भी कलेक्‍ट करता है.

जासूसी के लिए पेगासस स्‍पाइवेयर को अचूक माना जाता है. तकनीकी विशेषज्ञों का दावा हे कि इससे व्‍हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे ऐप भी सुरक्षित नहीं हैं. यह फोन के ऐप में मौजूद एंट टू एंड एंक्रिप्‍टेड चैट को भी पढ़ सकता है.

पेगासस स्‍पाइवेयर एक जासूसी सॉफ्टवेयर है. इसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्‍नॉलॉजी ने तैयार किया है. इसका एक और नाम क्‍यू-सुईट भी है.

पेगासस स्‍पाइवेयर क्‍यों है खतरनाक

पेगासस स्‍पाइवेयर बहुत ही खतरनाक सॉफ्टवेयर है. इसे किसी भी फोन में डालने के लिए यूजर की इजाजत की जरूरत नहीं होती है. जब यह किसी फोन पर इंस्‍टॉल हो जाता है तो यूजर को पता भी नहीं चलता है. एक बार जब यह फोन में आ जाता है तो उसे पता करना और हटाना आसान नहीं होता है. किसी भी मोबाइल में पेगासस स्‍पाइवेयर को एक मिस्‍ड कॉल से इंस्‍टॉल किया जा सकता है.

कैसे काम करता है पेगासस स्‍पाइवेयर

पेगासस स्‍पाइवेयर एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है. हैकर जब इस स्‍पाइवेयर को किसी फोन में इंस्‍टॉल करा देता है तो उस स्‍मार्टफोन का माइक, कैमरा, ऑडियो, टेक्‍स्‍ट मैसेज, ई-मेल और लोकेशन तक की जानकारी कहीं से भी हासिल कर सकता है.

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पेगासस स्‍पाइवेयर को जीरो-क्लिक अटैक के तौर पर देखा जा रहा है. कहने का मतलब हैकर को बिना किसी संपर्क के टारगेट यूजर के डिवाइस पर कंट्रोल हासिल कर लेता है.

आईफोन पर स्‍पाइवेयर मेल ऐप में एक क्रैक का फायदा उठा रहा था, जिसे कथित तौर पर अप्रैल 2020 में पैच कर दिया गया था. उसके बाद, इस प्रोग्राम ने एप्‍पल वायरलेस डिवाइस लिंक (AWDL) को टारगेट किया.

Android डिवाइस पर स्‍पाइवेयर वर्जन 4.4.4 और उसके बाद के वर्जन चलाने वाले फोन्‍स की ग्राफिक्‍स लाइब्रेरी को टारगेट कर रहा था. कई अटैकर्स ने Whatsapp में कमजोरियों का फायदा भी उठाया है.

पेगासस स्‍पाइवेयर कौन खरीद सकता है?

कंपनी का दावा है कि वह इसे केवल देशों की अधिकृत सरकारों को ही बेचती है. सार्वजनिक तौर पर अभी केवल यही जानकारी आई है कि पेगासस का इस्तेमाल मेक्सिको और पनामा की सरकारें करती हैं जबकि इसे खरीदने वाले 40 देशों में 60 ग्राहक हैं. 

कंपनी का कहना है कि उसके उपयोगकर्ताओं में से 51 प्रतिशत जांच एजेंसियां हैं. इसके अलावा 38 प्रतिशत विधि प्रवर्तन एजेंसियां और 11 प्रतिशत सेना है. कंपनी अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि इस तकनीक के जरिए तमाम एजेंसियों को आतंकवाद और अपराध को रोकने में मदद मिलती है.

पेगासस का कहना है कि वह खुद पेगासस को ऑपरेट नहीं करती है. उनके पास कोई डाटा भी नहीं है. कंपनी के मुताबिक जिन्हें पेगासस सॉफ्टवेयर का लाइसेंस बेचा जाता है, वे इसका इस्तेमाल खुद करती हैं और सभी डाटा उन्हीं के पास होता है.

पेगासस स्पाईवेयर की कीमत क्या है?

पेगासस स्पाईवेयर को लाइसेंस के रूप में बेचा जाता है और इसकी असल कीमत करार पर निर्भर करती है. एक लाइसेंस की कीमत 70 लाख रुपये तक हो सकती है. एक लाइसेंस से कई स्मार्टफोन को ट्रैक किया जा सकता है.

साल 2016 के एक अनुमान के अनुसार पेगासस के जरिए 10 लोगों की जासूसी के लिए एनएसओ ग्रुप ने कम से कम 9 करोड़ रुपये मांगता है. इसमें इंस्टलेशन की फीस करीब 3.75 करोड़ रुपये भी शामिल है.

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पेगासस से कितना सुरक्षित है आपका फोन?

पेगासस स्पाईवेयर के जरिए आप पर नजर रखने वाला आपके फोन से एसएमएस रिकॉर्ड, कॉन्टैक्ट डिटेल, कॉल हिस्ट्री, कैलेंडर रिकॉर्ड, ईमेल, व्हाट्सएप जैसे इंस्टैंट मैसेजिंग एप और ब्राउजिंग हिस्ट्री तक को खंगाल सकता है और उसे चुरा सकता है.

यही नहीं पेगासस आपके फोन के कैमरे से गुप्त तरीके से फोटो खींच सकता है. साथ ही कॉल रिकॉर्ड और फोन के आसपास की आवाजें भी रिकॉर्ड कर सकता है. साथ ही स्क्रिनशॉट भी ले सकता है. इस दौरान जिसके पास फोन, उसे इसकी भनक भी नहीं लगती है. 

जैसे ही जासूसी का काम पूरा हुआ, दूर से ही आपके फोन से पेगासस को कोई डिलीट भी कर सकता है. पेगासस हर तरह की डिवाइस जैसे एंड्रॉयड, आइओएस, विंडोज फोन, ब्लैकबेरी, सिंबियन और यहां तक कि टाइजन पर भी काम करता है.

पेगासस स्‍पाइवेयर के हैकिंग अटैक से कैसे बचें

पेगासस स्‍पाइवेयर और इसके जैसे दूसरे जीरो-क्लिक हैकिंग अटैक का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है. खासकर वहां और भी परेशानी होती है जहां एन्क्रिप्टेड एनवायरमेंट में डेटा पैकेट पर कोई विजिबिलिटी नहीं है.

हालांकि, यूजर अभी भी अपनी सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं.

  • पहला कदम यह होगा कि आप अपने स्मार्टफोन को अपडेट रखें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन कमजोरियों को देखा गया है, उनके लिए पैच उपलब्ध हैं.
  • दूसरा ऑपरेटिंग सिस्टम पर किसी भी ऐप को साइडलोड नहीं करना चाहिए.
  • यूजर ऐप्स का उपयोग करना बंद कर सकते हैं और वेब ब्राउज़र पर ईमेल, सोशल मीडिया आदि की जांच करने के लिए स्विच कर सकते हैं.

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