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बच्चों के अभिनय करियर को लेकर अभिभावकों के बदलती सोच

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बच्चों के पैशन को लेकर सकारात्मक होते पेरेंट्स

गौरतलब है कि अभिनय में करियर को लेकर हर किसी में असुरक्षा की भावना होती है, चाहे अभिभावक हो या स्टूडेंट्स. जबकि फ़िल्म हो या टेलीविज़न सभी को आकर्षित करता है.

फ़िल्म और टेलीविज़न को सबसे बड़ी इंडस्ट्री मानी जाती है, इसके बावजूद पेरेंट्स अपने बच्चों को परफार्मिंग आर्ट्स के क्षेत्र में आना भविष्य देखने के बजाय इंजिनीरिंग या मेडिकल किबतर्फ जाने पर जोर डालते हैं, यहां तक कि कुछ स्टूडेंट्स इच्छा होते हुए भी अपने पेरेंट्स को अपने मन की बात समझ नहीं पाते.

लेकिन बीते सालों से हालात कुछ बदलते नज़र आ रहे हैं, पेरेंट्स खुले मन से अपने बच्चों के पैशन को न केवल समझने लगे हैं बल्कि सपोर्ट भी करने लगे हैं,

दरअसल कडरू स्थित झारखंड फ़िल्म एन्ड थिएटर एकेडेमी (जेएफटीए) पिछले तीन सालों से सफलता पूर्वक छात्रों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित कर रही है. शुरुआती दिनों में ज़्यादातर स्टूडेंट्स घर में बिना बताए ही क्लास करने आते थे, जब समय के साथ अलग अलग मंचों पर अपने बच्चों को अभिनय करते जब देखा तो उनके अभिभावक खुले मन से सपोर्ट करने लग गए. कभी जहां स्टूडेंट्स को रोज़ डांट पड़ती थी, आज वही अभिभावक अपने पड़ोस और रिश्तेदारों में अपने बच्चों की कामयाबी पर इतराने लगे हैं.

निशा गुप्ता

Nisha Gupta

इस प्रभाव का सबसे बड़ा उदाहरण है निशा गुप्ता, मारवाड़ी कॉलेज से बीसीए ग्रेजुएट होने के पहले से ही निशा ने जेएफटीए जॉइन कर लिया था, बीते डेढ़ सालों में निशा ने कई स्ट्रीट थिएटर, स्टेज थिएटर, शार्ट फिल्मों के अलावा पंजाबी फीचर फिल्म ‘काली सरहद’, हिंदी फिल्म ‘गिलुआ’ में काम किया, निशा के अभिभावकों का विश्वास टैब और पुख्ता हो गया जब निशा ने बिग एफ एम द्वारा आयोजित बिग यंग स्टार का खिताब जीता.

रोशन प्रकाश

रोशन प्रकाश

पिस्का नगड़ी के निवासी रोशन प्रकाश एन्वॉयरमेंट साइंस में स्नातक करने के बाद एक एनजीओ में पिछले पांच सालों से कार्यरत थे, जब कि उनके माता पिता दोनो ही नगड़ी के ही एक स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं. जेएफटीए के तहत के कई स्ट्रीट थिएटर, स्टेज थिएटर और शार्ट फिल्मों के अलावा नागपुरी फीचर फिल्म ‘मोर गांव मीर देश’, हिंदी फीचर फिल्म ‘राम राज्य’, ‘शहीद चंद्रशेखर आज़ाद’ टीवी शो ‘सावधान इंडिया’ और कुछ विज्ञापन फिल्मों में काम करने के बाद रोशन के अभिभावकों ने उन्हें मायानगरी मुम्बई में अपना भविष्य देखने की खुले मन से अनुमति दे दी. रोशन अपनी नौकरी त्याग कर मुम्बई पहुच चके हैं और अभिनय की दिशा में अपना करियर तलाश रहे हैं.

प्रियांशु शेखर मिश्रा

प्रियांशु शेखर मिश्रा

प्रियांशु के पिताजी रांची के एक जाने माने ज्योतिषाचार्य हैं, जबकि ज़ेवियर कॉलेज से बीबीए करने के बाद प्रियांशु ने नौकरी या उच्च शिक्षा की तरफ ध्यान देने के बजाय खुद को अभिनय के क्षेत्र में होम किया. जेएफटीए में अपने 3 साल के प्रशिक्षण के दौरान कई स्ट्रीट थिएटर, स्टेज थिएटर, शार्ट फिल्मों के अलावा विज्ञापन फ़िल्मों, हिंदी फीचर फिल्म ‘एमएस धोनी, व ‘गिलुआ’, ‘लव स्ट्रीट’ , ‘शहीद चंद्रशेखर आज़ाद’ में काम करने के बाद प्रियांशु के पिता ने उन्हें मुंबई की तर्ज कूच करने की अनुमति दे दी. प्रियांशु फिलहाल बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने में पूरी शिद्दत से जुटे हैं.

अनिमेष कुमार

अनिमेष कुमार

बुंडू के निवासी अनिमेष कुमार के अभिभावक हार्डवेयर और राशन की दुकान चलाते हैं. अनिमेष खुद सर्व शिक्षा अभियान में बतौर अकाउंटेंट कार्यरत थे. इस दौरान पिछले 2 सालों से जेएफटीए में अभिनय प्रशिक्षण के साथ साथ कई स्ट्रीट थिएटर, स्टेज थिएटर और शार्ट फिल्मों के अलावा
नागपुरी फीचर फिल्म ‘मोर गांव मीर देश’, हिंदी फीचर फिल्म ‘आधार’, ‘शहीद चंद्रशेखर आज़ाद’ ‘गिलुआ’ टीवी शो ‘सावधान इंडिया’ के अलावा कई विज्ञापन फिल्मों में काम किया. इतना अनुभव बटोरने के बाद अनिमेष के अभिभावकों ने उन्हें मुम्बई जा कर मायानगरी में अपना भविष्य देखने की अनुमति दे दी. फिलहाल मुम्बई में अनिमेष का संघर्ष जारी है.

बिकेश ओरांव

बिकेश ओरांव

दोराबद कॉलेज से बीबीए के छात्र बिकेश की मां और पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं. बिकेश ने हाल ही में एनएसडी का एक.महीने का आवासीय वर्कशॉप पूरा किया, इसके अलावा बीते तीन सालों से जेएफटीए में अभिनय की प्रशिक्षण लेने के दौरान बिकेश ने कई स्ट्रीट थिएटर, स्टेज थिएटर, शार्ट फिल्मों के अलावा हिंदी फीचर फिल्म ‘कल्पतरु’ ‘गिलुआ’ ‘शहीद चंद्रशेखर आज़ाद’ नागपुरी फीचर फिल्म ‘मोर गांव मोर देस’ में काम किया. अंततः बिकेश के अभिभावकों ने उनके हुनर को देखते हुए मुंबई का टिकट कटवा दिया. फिलहाल बिकेश मुम्बई में प्रोडक्शन हाउस में ऑडिशन देने में व्यस्त हैं

अभिभावकों के अपने बच्चों के पैशन की तरफ सकारात्मकता व बढ़ते झुकाव को देखते हुए ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि अगर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन सही हो तो एंटरटेनमेंट सेक्टर में भी स्टूडेंट अपना भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं. इससे न केवल अभिभावकों का नाम रोशन होता है बल्कि शहर और राज्य का भी नाम भी ऊंचा उठ पाता है. झारखंड फ़िल्म एन्ड थिएटर एकेडेमी (जेएफटीए) इसी प्रयास में बदस्तूर जारी है.

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