पारा शिक्षक मुद्दा: विधानसभा में शोर, वार्ता के लिए सरकार का जोर

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Ranchi: झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने के साथ ही पारा शिक्षकों के सवाल पर विपक्ष ने मोर्चा संभाल लिया है. इधर राज्य की शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने कहा है कि हड़ताली पारा शिक्षकों से बात करने के लिए सरकार तैयार है. शिक्षकों के प्रतिनिधि 26 दिसंबर को वार्ता के लिए आएं. शिक्षा विभाग के अधिकारी और वे खुद उनसे बात करेंगी.

शिक्षा मंत्री का कहना है कि सरकार पारा शिक्षकों के सवाल पर संवेदनशील है. पहले भी उनकी कई मांग मानी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस मामले में राजनीति नहीं करे.

26 दिसंबर तक अल्‍टीमेटम

मंत्री का कहना है कि वार्ता से ही समस्या का समाधान निकलेगा. सरकार 26 दिसंबर तक उनके आने का इंतजार करेगी. इधर शीत सत्र के पहले दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष ने सदन के बाहर पारा शिक्षकों की मांग को जायज बताते हुए प्रदर्शन किया और नारे लगाए. सत्र का पहला दिन होने के कारण शोकप्रकाश था. हालांकि सरकार ने इससे पहले 1117 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया.

विधानसभा सत्र में मुद्दा गर्म

इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते ही झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने पारा शिक्षकों का मुद्दा उठाया. स्पीकर ने उन्हें समझाने का प्रयासकिया, तो प्रदीप यादव ने कहा कि सत्र में पहला दिन अनुपूरक बजट लाना परंपरा के खिलाफ है. इससे पहले उन्होंने पारा शिक्षकों की हड़ताल को लेकर कार्यस्थगन का प्रस्ताव दिया था.

सदन में शोकप्रकाश के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने आंदोलन के दौरान कई पारा शिक्षकों की मौत पर भी शोक प्रकट किया. बाद में विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पारा शिक्षकों की मांग पर सदन में दो टूक जवाब दे.

बुरी तरह प्रभावित प्राइमरी शिक्षा

गौरतलब है कि सेवा स्थायीकरण समेत अन्य मांग को लेकर राज्य में पारा शिक्षक 16 नवंबर से आंदोलन की राह पर हैं. इससे राज्य की प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. हजारों स्कूलों में ताले लटक रहे हैं. आंदोलन के दौरान पारा शिक्षकों ने सरकार के सभी मंत्रियों के आवास पर भी धरना दिया है. इन दिनों वे गांव- गांव में सरकार के खिलाफ काला झंडा लेकर जुलूस निकाल रहे हैं.

राज्य में 67 हजार पारा शिक्षक हैं. और वे आठ से बारह हजार के मानदेय पर प्राइमरी तथा मिडील स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते रहे हैं. इससे पहले भी वे कई दफा हड़ताल पर जा चुके हैं. इधर 16 नवंबर से जारी आंदोलन के दौरान अलग- अलग जगहों पर कई कारणों से कम -से -कम पांच शिक्षकों की मौत हुई है. इससे शिक्षकों में भारी गुस्सा है.

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