कोरोना महामारी के बीच पाक ने 2020 में 4 हजार से ज्यादा बार किया सीजफायर का उल्लंघन

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Sri Nagar: पूरी दुनिया कोरोना को लेकर परेशान है. इस महामारी (Corona Pandemic) की वैक्सीन को तैयार में दुनियाभर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) ही एक एसा देश है जो कि कोरोना से लड़ाई लड़ने के बजाए भारत में प्रॉक्सी वॉर (Proxy war) को बढ़ाने में लगा रहा.

हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तान की फ़ौज (Pakistan Army) ने तो आतंकियो की घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर वॉयलेशन (Pakistan Ceasefire Violation) के पिछले 17 साल का रिकॉर्ड को तोड़ दिया. 28 दिसंबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकिस्तान ने पूरी एलओसी पर 4700 बार सीजफायर का उलंघन किया और इस उलंघन के लिए पाकिस्तान ने छोटे हथियार के साथ-साथ बड़ी तोपों का भी इस्तेमाल किया और टार्गेट करके एलओसी के पास रहने वाले गांववालों को निशाना बनाया.

2020 में पाकिस्तान ने 4700 बार किया सीजफायर का उल्लंघन

साल 2003 में पाकिस्तान और भारत के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल पर सीजफायर अग्रीमेंट हुआ था. 2004, 2005 में तो सीज फायर का कोई उल्लंघन नहीं हुआ लेकिन उसके बाद से लगातार जारी है. पिछले पांच सालों के आंकड़ों की बात करें तो साल 2015 में 405, साल 2016 में 449 , साल 2017 में 971 2018 में 1629, साल 2019 में 3168 और इस साल यानी 2020 में 4700 बार सीजफायर का उल्लंघन किया.

इससे साफ हो जाता है कि किस तरह से पाकिस्तान भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए घुसपैठ की कोशिश को बढ़ाना चाहता है. पिछले कुछ सालों से घाटी में सेना के ऑपरेशन ऑल आउट की वजह से ही सीजफायर वॉयलेशन के मामलों में बढ़ोतरी हुई.

इस साल सबसे ज्यादा सीजफायर का उल्लंघन

दरअसल जिस तेज़ी से घाटी में सेना आतंकियो को ढेर कर रही है और लगभग सभी तंजीमो के बड़े कमांडरों को ढेर कर चुकी है और घाटी में आतंकियों उस कमी को पूरा करने के लिए लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर आतंकियों की घुसपैठ कराना चाहती है. इस साल अब तक 224 आतंकियों को अलग-अलग एनकाउंटर में ढेर किया गया है. इसमें घाटी में मौजूद आतंकियों के साथ वह आतंकी भी शामिल हैं जो लाइन ऑफ कंट्रोल से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे.

पिछले साल के आंकड़ों पर गौर करे तो साल 2019 में 153 , साल 2018 में 215, और 2017 में 213 आतंकियो को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था. कोरोना की महामारी के बावजूद भी सेना ने ऑपरेशन में कोई कमी नही आई. इस साल 166 युवाओं ने अलग-अलग तंजीमो में शामिल हुए. हालांकि इनमें से 40 से 50 फ़ीसदी आतंकियों को अब तक सुरक्षाबल ढेर कर चुके हैं.

पूरे साल खराब रहा घाटी का माहौल

सेना की तरफ से कुछ समय पहले एक स्टडी की थी जिसमें ये साफ हुआ था कि आतंकी तंजीमो में शामिल होने वाले युवाओ में 60 फ़ीसदी 21 से 25 साल के बीच, 30 फ़ीसदी युवा 16 से 20 साल के हैं. बहरहाल साल 2020 तो बीत गया लेकिन ये कह सकते है कोरोना में भी एलओसी और घाटी का माहौल पूरे साल ख़राब ही रहा.

Categories Opinion

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