उपचुनाव में सत्‍ता पक्ष के मुकाबले विपक्षी एकता कितनी मजबूत

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#रांची : झारखंड में सिल्ली और गोमिया विधानसभा उपचुनाव में विपक्षी दलों की गोलबंदी दिखने लगी है। वहीं सत्ताधारी गठबंधन में बिखराव खुल कर सामने आ गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कब्जे वाली इन दोनों सीटों के उपचुनाव में कोई विरोधी दल अपना उम्मीदवार नहीं दिया है। सभी विपक्षी दलों ने झामुमो प्रत्याशियों को समर्थन देने की घोषणा की है।

पिछले विधान सभा चुनाव में सिल्ली से झामुमो अमित महतो और गोमिया से झामुमो के ही योगेन्द्र प्रसाद चुने गये थे। लेकिन दो अलग-अलग मामलों में क्रमश: दो और तीन साल की सजा सुनाये जाने के बाद उनकी विधायिकी चली गयी। झामुमो ने पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी सीमा देवी को सिल्ली से और पूर्व विधायक योगेन्द्र प्रसाद की पत्नी बबीता देवी को गोमिया से प्रत्याशी बनाया है। बबीता देवी ने नामांकन के अंतिम दिन गुरुवार को नामजदगी के परचे भरे। बबीता के नामांकन के समय विपक्ष ने अपनी एकजुटता दिखायी। मौके पर झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा, भाकपा के भुवनेश्वर मेहता और मामस विधायक अरूप चटर्जी सहित कई विपक्षी नेता मौजूद थे। उनका कहना है कि भाजपा और आजसू के खिलाफ विपक्ष गोलबंद हो चुका है।

भाजपा-आजसू गठबंधन में दरार

उधर, भाजपा-आजसू गठबंधन में दरार साफ दिख रहा है। विधानसभा के 2014 के चुनाव के पहले भाजपा और आजसू के बीच गठबंधन हुआ था। इसके तहत सिल्ली सीट पर आजसू और गोमिया से भाजपा के उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में सिल्ली में आजसू और गोमिया में भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे।

इसी आधार पर भाजपा चाहती थी कि उपचुनाव में भी पुराना फारमूला लागू हो। आजसू सिल्ली से लड़े और भाजपा गोमिया से, लेकिन आजसू को यह मंजूर नहीं था और उसने दोनों सीटों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी। जाहिर है भाजपा को यह नागवार गुजरा होगा। फिर भी भाजपा ने गठबंधन धर्म निभाते हुये सिल्ली में उम्मीदवार नहीं देने और आजसू को समर्थन देने की घोषणा की है ।

हालांकि सिल्ली से आजसू प्रमुख सुदेश महतो के नामांकन के समय भाजपा के कोई नेता नजर नहीं आ रहे थे। गोमिया में भाजपा और आजसू के उम्मीदवार आपस में ताल ठोक रहे हैं।

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