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बेरोजगारी पर एनएसएसओ की रिपोर्ट अंतिम – पीसी मोहनन

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New Delhi: बेरोजगारी को लेकर नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की रिपोर्ट को नीति आयोग द्वारा एक मसौदा (ड्राफ्ट) बताए जाने के बाद एनएसएसओ के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष पीसी मोहनन ने इसे अंतिम रिपोर्ट करार दिया है.

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट जारी नहीं किए जाने से नराज पीसी मोहनन और एक अन्य सदस्य ने इस्तीफा दिया था.

इस बीच गुरुवार को नीति आयोग ने सफाई दी थी कि एनएसएसओ की रिपोर्ट अभी अंतिम नहीं हैं. आंकड़े जमा किए जा रहे हैं. गुरुवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मीडिया को यह जानकारी दी थी.

इधर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पीसी मोहनन ने नीति आयोग की सफाई का खंडन किया और कहा कि जिसे ड्राफ्ट  बताया जा रहा है, वही अंतिम रिपोर्ट है, जिसे किसी और की मंजूरी की जरूरत नहीं है.

अंतिम रिपोर्ट थी

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पीसी मोहनन ने कहा, ‘यह अंतिम रिपोर्ट थी. एनएसएसओ प्रक्रिया के तहत ही रिपोर्ट को मंजूरी देता है. हमने इसे मंजूरी दी. किसी और अधिकारी को अब इसे मंजूरी नहीं देनी है. विश्लेषण का काम रिपोर्ट के जारी होने के बाद होता है’.

छपी खबर के बाद

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी इस खबर के बाद नीति आयोग ने देश में रोज़गार की स्थिति से जुड़ी उस रिपोर्ट को ख़ारिज करने की कोशिश की और प्रेस से बातचीत में आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि जिस रिपोर्ट के बारे में बात की जा रही है वो ‘सत्यापित नहीं है’ और इस रिपोर्ट के लिए इस्तेमाल किए गए ‘डेटा को भी सत्यापित नहीं किया जा सका है’.

आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि रोजगार को लेकर अभी आंकड़े तैयार हो रहे हैं जिनके फाइनल होने पर ही संबंधित रिपोर्ट जारी होगी. उन्होंने कहा है कि मार्च तक यह रिपोर्ट जारी हो सकेगी.

जबकि अखबार ने इस खबर के जरिए बताया था कि नेशनल सैंपल सर्वे ऑफ़िस के एक सर्वे में सामने आया है कि साल 2017-18 में बेरोज़गारी की दर पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा रही. रिपोर्ट में इसकी चर्चा की गई है कि भारत में साल 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 6.1 फ़ीसदी रही जो कि साल 1972-73 के बाद से सबसे ज़्यादा है.

रोजगार की हालत पिछले 45 साल में सबसे खराब बताने वाली इस रिपोर्ट को लेकर नरेंद्र मोदी की सरकार पर विपक्ष ने हमला बोला है. विपक्ष से कई शीर्ष नेताओं ने इस रिपोर्ट पर ट्वीट करके सवाल खड़े किए हैं.

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