राजमिस्‍त्री नहीं अब रानी मिस्‍त्री कहलायेंगी गगनचुम्‍बी इमारत निर्माण करने वाली महिलायें

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#Ranchi: हमारे घर से लेकर बड़ी-बड़ी गगनचुम्बी इमारतें बनाने वाले लोगों को हम सब हमेशा से राज मिस्त्री के तौर पर जानते रहे हैं. चाहे वो पुरुष हों या फिर महिलाएं, हम उन्हें राज मिस्त्री कहकर ही संबोधित करते हैं, लेकिन आजकल राज मिस्त्री का काम करने वाली महिलाओं को एक बेहद खूबसूरत नाम रानी मिस्त्री का दिया गया गया है. देखते ही देखते यह नाम हर किसी के जुबान पर चढ़ने लगा और यह महिला राज मिस्त्री नया नाम रानी मिस्त्री पाकर रानी की तरह उत्साहित भी होने लगी हैं. उसका नतीजा यह हुआ है कि आज इन महिलाओं के हौसले बुलंद तो हो ही रहे हैं, यह सामाजिक बंधनों और परंपरा से निकलकर खूबसूरत इमारतों की नीब रखने में भी खूब जुट रही हैं.

इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से बात कर रहे थे तो उन्होंने झारखंड के खूंटी के लाभार्थियों से संवाद करते हुए खास तौर पर रानी मिस्त्री का जिक्र किया. लेकिन, सिमडेगा के उपायुक्त जटाशंकर चौधरी ने जब इस नाम की परिकल्पना की थी, तब उन्हें भी कहाँ पता था कि यह नाम इतना मशहूर हो जाएगा.

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दरअसल, रानी मिस्त्री नाम उन्होंने उन महिलाओं को दिया है, जो राजमिस्त्री का काम करती हैं. पहले ये महिलाएं स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण के कार्य में जुटी और आज वो प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई नव निर्माण के कार्यों में अपने हुनर का लोहा मनबा रही हैं.

रानी मिस्त्री की कार्यकुशलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी माँग न सिर्फ आजकल सिमडेगा जिले में है बल्कि, राजधानी रांची समेत दूसरे बड़े शहरों में भी खूब हो रही है. अभी हाल ही में शौचालय निर्माण के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों के लिए सिमडेगा की कुशल रानी मिस्त्रियों की गुमला, लोहरदगा, खूंटी और रांची जिले से भी मांग पहुंची है. इस बढ़ती मांग से उत्साहित सिमडेगा के उपायुक्त ने अब इन रानी मिस्त्रियों के लिए एक कदम और आगे बढ़ाया है. सिमडेगा जिले में अब बड़े पैमाने पर महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रानी मिस्त्री बनाया जा रहा है.

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उपायुक्त ने न सिर्फ उन्हें एक सुन्दर और सम्मानजनक नाम दिया बल्कि, कौशल विकास के तहत उनके समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है. यही नहीं, प्रशिक्षण पाने के बाद उन्हें सर्टिफिकेट और पहचान-पत्र भी दिया जा रहा है. राज्य में विकास योजनाओं के गति पकड़ने के कारण आजकल रानी मिस्त्री की डिमांड भी खूब है. रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण पा रही महिलाओं में भी अब खासा उत्साह दिख रहा है और काम सीखने को लेकर वे काफी दिलचस्पी भी दिखा रही हैं.

उन्हें यह पता है कि जो एकबार उनकी ट्रेनिंग पूरी हो गई, तो उनके पास काम की कमी नहीं रहेगी और पैसे कमाकर वे अपने परिवार को बेहतर जिंदगी दे सकेंगी. इस काम में कई वैसी महिलाएं भी जुड़ी हैं जो कल तक रेजा और कुली का काम करती थीं और उन्हें मेहनताना भी कम मिलता था, लेकिन रानी मिस्त्री के ठप्पे ने अब इन्हें कुशल कारीगर भी बना दिया है जिससे अब इन्हें राज्य ही नहीं यहां से बाहर भी आसानी से काम मिलेगा और ये आर्थिक सशक्त भी होंगी.

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बहरहाल, सिमडेगा उपायुक्त द्वारा कल्पित यह नाम पूरी तरह स्थापित हो चुका है और रानी मिस्त्रियों की एक बड़ी फौज ऐसे समय में तैयार हो रही है, जब प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर इनकी जरुरत है. जाहिर है, जटाशंकर चौधरी की यह मुहिम रंग तो ला चुकी है, इतिहास भी रचेगी और जिस तरह महिलाएं इसको लेकर आगे बढ़ रही हैं, उससे नवनिर्माण की एक नई उर्जा का संचार भी होगा.

सिमडेगा जैसे जिले जहां मानव तस्करी हमेशा से अभिशाप रहा वहां अगर इस तरह महिलाओं के हौसले को उड़ान मिल रहा है तो निश्चित तौर राज्य के दूसरे जिले के लिए भी यह एक बेहतर उदाहरण हो सकता है.

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