जातीय जनगणना के लिए तेजस्‍वी समेत 10 दलों के नोताओं के साथ पीएम मोदी से मिलेंगे नीतीश कुमार

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New Delhi: देश में जातिगत जनगणना को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है. केंद्र पर लगातार दवाब बनाया जा रहा है. जोर देकर कहा जा रहा है कि अब देश में जातिगत जनगणना होनी चाहिए. विपक्ष के अलावा बीजेपी की सहयोगी पार्टियां भी ये मांग उठाने लगी हैं. अब इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात होने जा रही है. वे आज सुबह 11 बजे पीएम से मिलने जा रहे हैं. उनके साथ 10 दलों के नेता भी शामिल होंगे.

जातिगत जनगणना पर नीतीश की पीएम संग बैठक

नीतीश कुमार राजधानी दिल्ली आ गए हैं और उन्होंने खुद जानकारी दी है कि वे प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि हम पीएम नरेंद्र मोदी से मिलेंगे. हमारी मांग है कि अब देश में जातिगत जनगणना करवाई जाए.

अब ये मुलाकात ज्यादा मायने इसलिए रखती है क्योंकि इस बैठक में तेजस्वी यादव से लेकर VIP के मुखिया और मंत्री मुकेश सहनी तक, सभी शामिल होने वाले हैं. बिहार से बीजेपी नेता और नीतीश सरकार में मंत्री जनक राम भी इस मांग को उठाने वाले हैं. ऐसे में इस बार नीतीश कुमार पूरी तैयारी के साथ पीएम से मिलने वाले हैं.

10 दलों का प्रतिनिधिमंडल शामिल

नीतीश कुमार पिछले कई सालों से जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से भी जातिगत जनगणना की जरूरत बताई है. ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर उनकी केंद्र संग सहमति नहीं बन रही है.

हाल ही में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा था कि केंद्र जाति के अनुसार जनसंख्या की गणना नहीं करेगा. केंद्र के उस जवाब के बाद से ही नीतीश कुमार ने फिर अपनी मांग उठाई और इस मुद्दे पर केंद्र को घेरने की तैयारी की. अब उस घेराबंदी का ही नतीजा है कि 10 दलों का प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से मुलाकात करने जा रहा है.

इस प्रतिनिधिमंडल की बात करें तो इसमें बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा, CPIML से महबूब आलम, AIMIM से अख्तरुल इमान, पूर्व सीएम और हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी, VIP के मुखिया और मंत्री मुकेश सहनी भी शामिल होंगे. इनके अलावा सीपीआई से सूर्यकांत पासवान, और सीपीएम के अजय कुमार समेत 11 नेता शामिल होंगे.

मांग काफी पुरानी, बीजेपी नहीं राजी

जानकारी के लिए बता दें कि जातिगत जनगणना के आंकड़े आखिरी बार आजादी से पहले साल 1931 में जारी किए गए थे. इसके बाद 2011 में फिर जातिगत जनगणना हुई थी, लेकिन सरकार द्वारा उन आंकड़ों को जारी नहीं किया गया. ऐसे में ये काफी पुरानी मांग है जिसने कई मौकों पर देश की राजनीति में उबाल लाया है.

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