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नीतीश के लिए बीजेपी का ऑफर ठुकराया था, 2019 चुनाव के लिए जलेश्‍वर ने मिलाया कांग्रेस से हाथ

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Ranchi: 2019 चुनाव के लिए तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहे हैं. झारखंड से बिहार के सीएम नीतीश कुमार को बड़ा झटका लगा है. झारखंड प्रदेश जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष जलेश्वर महतो ने शनिवार कांग्रेस में शामिल हो गए. वे 25 सालों से नीतीश कुमार के साथ थे. साथ ही झारखंड में जदयू का झंडा थामे थे.

रविवार को कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह के साथ वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से दिल्ली में मिले. आरपीएन सिंह ने ट्वीट करते हुए गर्मजोशी से जलेश्वर महतो के कांग्रेस में शामिल होने का स्वागत किया है.

जलेश्वर महतो कोयलांचल के बाघमारा विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव जीते थे. झारखंड सरकार में वे दो बार पेयजल स्वच्छता मंत्री भी रहे. हालांकि 2009 और 2014 में वे चुनाव हार गए. 2014 में बीजेपी ने जलेश्वर महतो को पार्टी में शामिल होने की पेशकश भी की थी, लेकिन वे नीतीश कुमार के साथ खड़े रहे.

नब्बे के दशक में समता पार्टी के गठन के साथ ही झारखंड से जलेश्वर महतो, दिवंगत रमेश सिंह मुंडा, लालचंद महतो सरीखे नेता नीतीश कुमार के साथ हुए थे. अलग राज्य गठन के बाद बीजेपो की सरकार को समता पार्टी ने समर्थन दिया था. तब इन तीनों को मंत्री बनाया गया था. बाद में समता पार्टी का जदयू में विलय हो गया.

रमेश सिंह मुंडा और जलेश्वर महतो नीतीश कुमार के वफदार नेता के तौर पर जाने जाते रहे. लेकिन समय के साथ झारखंड में जदयू की जमीन खिसकती चली गई. इनके अलावा गठबंधन रहने के बाद भी झारखंड में बीजेपी ने जदयू को तवज्जो नहीं दिया. वैसे 2009 में बीजेपी ने जदयू के लिए 18 सीटें छोड़ी थी. तब जदयू की झारखंड में इंदर सिंह नामधारी कमान संभाल रहे थे.

इधर बिहार में राजद के साथ जदयू के चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के बाद झारखंड में बाबूलाल मरांडी के साथ जदयू ने खुद को लामबंद करने की कोशिशें तेज की थी. नीतीश कुमार और बाबूलाल एक दूसरे के कार्यक्रमों में मंच भी साझा करते रहे. फिर नीतीश कुमार के आरजेडी छोड़ कर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद बाबूलाल मरांडी ने भी नीतीश कुमार से मुंह मोड़ लिया.

साल 2014 के बाद झारखंड में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलने के साथ जलेश्वर महतो यह महसूस करने लगे थे कि अब जदयू के साथ लंबा नहीं खींचा जा सकता है. इसलिए कि बाघमारा में ढुल्लू महतो बीजेपी में शामिल हो गए हैं और चुनावी लड़ाई में ढुल्लू दूसरों पर भारी पड़ते रहे हैं.

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