निलेश ने बढ़ाया भारत की शान और झारखंड का मान

Ranchi : बैंगालुरू (Bengaluru) के श्रीहरिकोटा (sriharikota) स्थित इसरो से चंद्रयान-2 (moon mission-2) की सफल लॉचिंग (launching) के बाद सिर्फ भारत (India) ने ही नहीं बल्की पूरी दुनिया(world) ने भारत(India) के वैज्ञानिकों को सराहा है. इस चंद्रयान-2 (moon mission-2) को बनाने से लेकर सफलता पुर्वक लॉन्च (Launch) कराने में कई वैज्ञानिकों (scientists)का हाथ रहा. इन कौशल वैज्ञानिकों(scientists) में से एक वैज्ञानिक (scientist) है निलेश जो रांची के रहने वाले है. निलेश इसरो(Isro) में सॉलिड प्रोपलेट साइंटिस्ट (Solid propellant scientist) है.

झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित बसंत विहार के रहनेवाले नीलेश की रुचि बचपन से ही मैथ्स (mathematics) और साइंस (science) में थी. रांची से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद नीलेश ने साल 2010 में एनआइटी (NIT), जमशेदपुर में मेकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering)में बीटेक (B.tec) किया. इसके बाद हिंडाल्को में नीलेश की नौकरी लग गयी. बढ़िया था और सैलरी पैकेज (salary package) भी अच्छा था, लेकिन उनका सपना था डिजाइनिंग इंजीनियरिंग (desigining Engineering) करना. लिहाजा, नीलेश ने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर इसके लिए तैयारी की. बड़े भाई लोकेश कुमार का काफी सहयोग मिला, जो इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम्स (Engineering Entrance Exam) की तैयारी कर रहे युवाओं को कोचिंग देते हैं. इसरो की प्रवेश परीक्षा में भैया लोकेश के मैथ्स और फिजिक्स की गाइडेंस और टिप्स काम आये और नीलेश की मेहनत रंग लायीऔर निलेश को  ऑल इंडिया में 12वां रैंक हालिस हुआ.

अपने हुनर और मेहनत के दम पर उन्होंने इसरो की महत्वाकांक्षी परियोजना चंद्रयान 2 (Moon-Mission-2) की टीम में सॉलिड प्रोपेलेट साइंटिस्ट(Solid propellant scientist) के तौर पर जगह बना ली. नीलेश के जिम्मे बूस्टर प्रोडक्शन (Production) की रिसर्च (research) और डिजाइन का काम है, जो सैटेलाइट को चंद्रमा (moon) की ऑर्बिट (Orbit)में प्रक्षेपित करने में मदद करता है.

चंद्रयान 2 (Moon Mission-2) के बाद नीलेश गगनयान के लिए जुट गए हैं. इसरो(ISRO) का यह मिशन दिसंबर 2021 के लिए शेड्यूल्ड है. भारत को सबसे बड़े स्पेस पावर के रूप में स्थापित करने की कोशिश में लगी टीम इसरो (ISRO) के होनहार साइंटिस्ट नीलेश का कहना हैं कि चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग से पहले और उसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदे उनका हौसला बढ़ाते हैं.

कैसे करेगा चंद्रयान-2 काम, जानिये

बता दें कि चंद्रयान-2 इसरो का दुसरा मुन मिशन है.22 जुलाई की दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK3 से सफलतापूर्वक लॉन्च (Launch) किया गया. 16.23 मिनट के अंदर ही चंद्रयान-2 पृथ्वी (Earth) से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट (GSLV-MK 3 rocket) से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू कर चुका है. फिर उसे चांद (moon) के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिए 48 दिन की यात्रा करनी पड़ेगी. चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी (Earth) के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद(moon) की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा. 19 अगस्त को ही यह चांद (moon)की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर (Vikram Lander Orbiter) से अलग हो जाएगा और चांद (Moon) के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा. 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर (Vikram Lander Orbiter) चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा.

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