Navratri 2020: सप्‍तमी में मां कालरात्री की पूजा होती है खास

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Navratri 2020: शारदीय नवरात्रि का आज सातवां दिन है. इस दिन को विशेष माना जाता है क्योंकि आज मां कालरात्रि की पूजा (Maa Kalratri puja) की जाती है. मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को वरदान देने के साथ ही कष्ट देने वाले ग्रहों की बाधाएं भी दूर करती हैं. मां कालरात्रि की आराधना से आकस्मिक संकटों से मुक्ति भी मिलती है.

जानिए कैसा है मां कालरात्रि का रूप

मां कालरात्रि का शरीर काला है. मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं. साथ ही गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती है. मां कालरात्रि के चार हाथ हैं. एक हाथ में माता ने खड्ग (तलवार). दूसरे में लौह शस्त्र, तीसरे हाथ वरमुद्रा और चौथे हाथ अभय मुद्रा में है. मां की कृपा प्राप्त करने के लिए मां को गंगाजल, गंध, पुष्प, अक्षत, पंचामृत से पूजा की जाती है. मां कालरात्रि को लाल रंग की चीजें चढ़ाना शुभ माना जाता है.

मंदिरों में की जा रही विशेष पूजा-अर्चना

मेवाड़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक शीतलामाता मंदिर में शनिवार को हवन के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होगा. शीतलामाता की शोभायात्रा कोरोना की वजह से आज मंदिर परिसर में निकाली जाएगी. रात करीब 8 बजे भजन संध्या होगी. शनिवार सुबह आचार्य रमेशचंद्र आमेटा और सतीश पुजारी के सानिध्य में हवन शुरु होगा जो शाम 4 बजे तक चलेगा. वहीं, श्रद्धालु मंदिर में सोशल डिस्टेसिंग के साथ दर्शन कर रहे हैं.

दिल्ली के प्राचीन झंडेवाला मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा है. भले ही यह कोरोना काल चल रहा हो लेकिन देवी मां की भक्ति और श्रद्धा में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई है. मां के भक्त मंदिरों के नए नियमों का भी बखूबी पालन कर रहे हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल में चारों तरफ भव्य पंडाल, पूजा की पवित्रता, रंगों की छटा, तेजस्वी चेहरों वाली देवियां, सिंदूर खेला, धुनुची नाच जैसे नज़ारे देखने को मिल रहे हैं. कोलकाता के साथ पूरे पश्चिम बंगाल को भव्य पंडाल और रंगों की छटा से खास बनाया गया है.

ऐसे करें पूजा (Maa Kalratri Puja)

मां की कृपा प्राप्त करने के लिए मां को गंगाजल, गंध, पुष्प, अक्षत, पंचामृत से पूजा की जाती है. मां कालरात्रि को लाल रंग की चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है. मां कालरात्रि की पूजा नकारात्मक ऊर्जा को भी नष्ट करती है. मां कालरात्रि को बेहद शक्तिशाली देवी का दर्जा प्राप्त है.

मां कालरात्रि का सिद्ध मंत्र (Maa Kalratri Mantra)

‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:.’

मंत्र-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता.
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी..
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा.
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी..

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