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Jet Airways पर 8000 करोड़ कर्ज, Naresh Goyal और Anita Goyal ने बोर्ड से दिया इस्तीफा

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Mumbai: जेट एयरवेज (jet airways) आर्थिक संकट से जूझ रही है. इस पर 8000 करोड़ से ज्‍यादा कर्ज है. अब जेट एयरवेज के बोर्ड से नरेश गोयल (Naresh Goyal) और उनकी पत्नी (Anita Goyal) अनीता गोयल ने इस्तीफा दे भी दिया है. उनसे चेयरमैन का पद भी छिन जाएगा.

naresh goyal and anita goyal
Naresh goyal and Anita goyal

कर्जदाताओं के साथ रेजोल्यूशन प्लान के लिए सोमवार को बैठक हुई. इस बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया. जेट एयरलाइन की ओर से जानकारी दी गयी है कि एसबीआई के नेतृत्व में एयरलाइन के कर्जदाताओं का कंसोर्शियम रेजोल्यूशन प्लान तैयार कर रहा है. इसमें जेट के कर्ज को शेयरों में बदलना और 1,500 करोड़ रुपए की फंडिंग तुरंत मुहैया करवाना शामिल है.


जेट एयरवेज पर 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है. एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए उसे नकदी की जरूरत है. बैंकों ने पिछले हफ्ते संकेत दिए थे कि जेट के मैनेजमेंट में बदलाव होने पर वो एयरलाइन में और नकदी लगा सकते हैं.

3 महीने से सैलरी नहीं मिली

जेट एयरवेज के पायलट्स और इंजीनियर्स को 3 महीने से सैलरी नहीं मिली है. पायलट्स ने 31 मार्च तक वेतन नहीं मिलने पर 1 अप्रैल से उड़ान नहीं भरने की चेतावनी दी है. न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते यह खबर आई कि सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे जेट एयरवेज को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करें. बैंकों ने संकेत दिए थे कि जेट के मैनेजमेंट में बदलाव होने पर वे ऐसा कर सकते हैं.

13 अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ानें बंद

लीज रेंट नहीं चुका पाने की वजह से जेट के 54 विमान खड़े हो चुके हैं. एयरलाइन ने पिछले हफ्ते 13 अंतरराष्ट्रीय रूट पर अप्रैल अंत तक के लिए उड़ानें रद्द करने का ऐलान किया था. सात अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ानों की संख्या पहले ही कम की जा चुकी है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर जेट एयरवेज दिवालिया होती है तो 16,500 लोगों की नौकरी जा सकती है. सरकार लोकसभा चुनाव को देखते हुए ऐसा नहीं चाहती है. इससे सरकार की साख को नुकसान हो सकता है.
नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल ने फुल सर्विस एयरलाइन जेट एयरवेज की स्थापना 25 साल पहले 1993 में की थी. एतिहाद एयरवेज की जेट में 24% की हिस्सेदारी है.

आर्थिक संकट में कैसे फंसी जेट एयरवेज ? (why jet airways in trouble)

बीते कुछ सालों में दूसरी एयरलाइन से प्रतिस्पर्धा में जेट ने किराए कम किये. लुभावने ऑफर पेश किये जबकि उतना मुनाफा नहीं हो रहा था. ब्रेंट क्रूड की कीमत में पिछले साल भारी उछाल आया. इसलिए, जेट का हवाई खर्च बढ़ा. डॉलर के मुकाबले रुपया भी पिछले साल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. इसलिए, एयरलाइन का विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ गया. इन वजहों से जेट को 2018 की तीन तिमाही (जनवरी-मार्च, अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर) में कुल 3,620 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.

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