नादिया मुराद की जीवनी | Nadia Murad Biography in Hindi

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कोरोना महामारी को लेकर नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली नादिया मुराद ने कहा कि कोरोनो वायरस महामारी के दौरान महिलाओं की तस्करी और लिंग आधारित हिंसा में वृद्धि हुई है. नादिया 28 साल की मानवाधिकार इराकी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. नादिया मुराद उन हजारों महिलाओं और लड़कियों में शामिल थी, जिन्हें 2014 में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों द्वारा यौन गुलाम बनाने के लिए पकड़ लिया गया था. इराक में आईएस के आतंकियों ने नादिया की मां और छह भाइयों को मार डाला था. इराक से भागने के बाद नादिया ने जर्मनी में शरण ली और 2018 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला.

साल 2018 के नोबेल शांति पुरस्‍कार के लिए 25 वर्ष की नादिया मुराद के नाम का ऐलान किया गया. नादिया का जन्‍म उत्‍तरी इराक के कोचो ईलाके एक छोटे से गांव में हुआ था. पिताजी पेशे से एक किसान थे, जो भेड़ पालने का काम करते थे. वह यजीदी समुदाय से संबंध रखती है और अपने भाईयों के साथ खुश थी. नादिया का सपना था कि वह इतिहास विषय की टीचर बने या फिर खुद का ब्‍यूटी सलून खोले.

15 अगस्‍त 2014 को जब नादिया 21 साल की थी एक तरह से उसके सारे सपने टूटकर बिखर गये. नादिया ने यूएन के सामने बताया था कि कि अगस्‍त 2014 को आईएसआईएस के आतंकियों ने उनके और 150 याजिदी परिवारों के साथ याजिदी लड़कियों को अगवा कर लिया था. यहां से इन सभी को इराक के शहर मोसुल ले जाया गया था.

नादिया साल 2015 में एक ऐसा नाम बन गई थीं जिन्‍होंने दुनिया के सामने खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस का वह चेहरा सामने लाकर रखा था जिसके बारे में सिर्फ सुना गया था. याजिदी समुदाय की नादिया ने बताया कि कैसे आईएसआईएस के आतंकी लड़कियों को सेक्‍स गुलाम बनाकर अपने मंसूबे पूरे करते हैं. नादिया इराक की पहली नागरिक भी हैं जिन्‍हें यह पुरस्‍कार हासिल हुआ है.

नादिया मुराद की पुस्‍तक : Nadia Murad Biography in Hindi

आईएसआईएस के द्वारा खुद पर हुए जुर्म को नादिया मुराद ने न सिर्फ खुले मंच पर बताया, बल्कि इस पर किताबें भी लिखी. मुराद ने अपनी पुस्तक द लास्ट गर्ल : माई स्टोरी ऑफ कैप्टिविटी एंड माई फाइट अगेंस्ट द इस्लामिक स्टेट’ (The Last Girl: My Story of Captivity, and My Fight Against the Islamic State) में अपने साथ हुई बर्बरता का दिल दहला देने वाला वर्णन किया है. आईएसआईएस के अत्याचारों को झेलने वाली यजीदी महिला नादिया मुराद ने अपनी किताब के जरिए आईएसआईएस के मानवीयता को शर्मसार कर देने वाले कारनामों का खुलासा कर दिया है.

सिंजर की रहने वाली नादिया

नादिया इराक के सिंजर की रहने वाली थीं. सिंजर, उत्‍तरी इराक में आता है और सीरिया से सटा हुआ है. अपने परिवार के साथ वह एक खुशहाल जिंदगी जी रही थीं लेकिन साल 2014 में जब इराक पर आईएसआईएस के जुल्‍म की शुरुआत हुई तो सब बदल गया. दिसंबर 2015 को नादिया यूनाइटेड नेशंस की सिक्‍योरिटी काउंसिल के सामने थीं. यहां पर नादिया ने बताया कि आईएसआईएस के आतंकी बेहोश होने तक उनके साथ बलात्‍कार करते थे. आतंकियों ने उन्‍हें आईएसआईएस के ही एक और आतंकी के घर पर रखा हुआ था.

इस्‍लाम कुबूल करने का दबाव

नादिया ने बताया कि आईएसआईएस ने करीब तीन माह तक उन सभी को अपना सेक्‍स स्‍लेव बनाकर रखा.इराक के सिंजर में आईएसआईएस के आने से पहले याजिदी समुदाय के लोग रहते थे. सिंजर के गांव कोचों में नादिया का घर था. एक दिन अचानक उनके गांव में आईएसआईएस आतंकियों का फरमान आया. आतंकियों ने सभी पर इस्‍लाम कुबूल करने का दबाव डाला.

नादिया के भाईयों को भी मारा

नादिया ने यूएन में आए तमाम देशों के प्रतिनिधियों के सामने उन पर हुए जुल्‍मों के बारे में बताया. नादिया ने बताया कि उनके माता-पिता और सभी लोग घर से बाहर आए. आतंकियों महिलाओं को एक बस में भरकर कहीं ले गए और गांव के 300 से ज्‍यादा पुरुषों को गोली मार दी. नादिया के भाई भी मार दिए गए थे और गांव की बूढ़ी औरतों को भी मार दिया गया.नादिया ने बताया कि आतंकी सभी लड़कियों को आपस में किसी सामान की तरह बदलते थे. आतंकियों से डरकर कई लड़कियों ने छत से कूदकर जान तक दे दी थी.

प्रार्थना के बहाने करते थे रेप

नादिया ने भी भागने की कई कोशिशें की थीं लेकिन वह पकड़ ली जातीं और फिर उनकी पिटाई की जाती. नादिया यूएन सिक्‍योरिटी काउंसिल के बाद इजिप्‍ट की राजधानी काइरो की यूनिवर्सिटी भी गर्इं. यहां पर नादिया ने बताया कि आतंकी उन पर प्रार्थना करने का दबाव डालते और फिर वह उनके साथ बलात्‍कार करते थे. नादिया के हालातों ने उन्‍हें काफी मजबूत बना दिया था. एक दिन मौका पाकर वह कैदखाने से भाग निकलीं और मोसुल के शरणार्थी कैंप में पहुंचीं. हालांकि नादिया कैसे भागी इस बारे में कुछ नहीं बताती क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि ऐसा करने से बाकी लड़कियों पर खतरा बढ़ सकता है.नादिया ने अपनी कहानी यूएन के ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर आयोजित एक सम्‍मेलन के दौरान सुनाई थी. नादिया ने यहां पर दुनिया के सभी देशों से अपील की थी कि वे आईएसआईएस का खात्‍मा करे. आपको बता दें कि करीब 5,000 याजिदी महिलाओं को आतंकियों ने बंधक बनाया हुआ था.

द लास्‍ट गर्ल पुस्‍तक में नादिया मुराद की जीवनी

नादिया मुराद पर लिखी की पुस्‍तक द लास्‍ट गर्ल की इंटरनेशनल मीडिया और न्‍यूजपेपर्स में खूब चर्चा हुई और सुर्खियां बटोरी. दरसअसल इसकी टॉपिक सनसनीखेज है. कोई काल्‍पनिक कहानी नहीं बल्कि नादिया मुराद की साहसिक कारनामों की हकीकत लिखी गई है ‘द लास्‍ट गर्ल’ पुस्‍तक में.

नादिया मुराद एक ऐसी सा‍हसि‍क लड़की है, जिसने इस्‍लामिक स्‍टेट की यातनाओं के खि‍लाफ अपनी आवाज उठाई. नादिया मुराद एक यजीदी युवती है. जिसने आईएसआईएस की कैद में रहते हुए तमाम तरह की यातनाओं को भोगा. चाहे वो मारपीट हो या सिगरेट से उसकी त्‍वचा को जलाना या फि‍र सामुहिक यौन उत्‍पीड़न.

इराक में नादिया ने असहनीय और कल्‍पना से परे यातनाओं को सहा. इस्‍लामिक स्‍टेट के रहनुमाओं ने उसकी जिंदगी को तहस-नहस कर दिया. यहां तक कि उसके छह भाईयों और मां को उसके सामने मौत के घाट उतार दिया और उनके शवों को कब्रस्‍तान में दफना दिए.

जिंदगी में इतनी तबाही के बावजूद नादिया इस्‍ल‍ामिक स्‍टेट के खि‍लाफ अपनी आवाज बुलंद करती हैं और न सिर्फ यजीदी युवतियों बल्‍कि दुनिया की तमाम औरतों के लिए एक मिसाल और मशाल की तरह नजर आती है.

अपने इसी संघर्ष के लिए नादिया मुराद को नोबल शांति पुरस्‍कार भी मिला है. द लास्‍ट गर्ल इस युवती और हजारों लाखों यजीदियों पर किए गए अत्‍याचार और उस अत्‍याचार के खि‍लाफ लड़ाई की सशक्‍त आवाज है. हिंदी और अंग्रेजी के अलावा यह किताब कई भाषाओं में अनुवाद की गई है. भारत में इसे मंजुल प्रकाशन ने प्रकाशि‍त किया है. इसका हिंदी अनुवाद आशुतोष गर्ग ने किया है.

मंजुलसे प्रकाशि‍त इस हिंदी संस्‍करण की कीमत 299 रुपए है. इस्‍लामिक स्‍टेट के अत्‍याचारों और यातनाओं के खि‍लाफ इस महत्‍वपूर्ण दस्‍तावेज से गुजरना एक बेहद साहसिक कदम होने के साथ ही इस्‍लामिक स्‍टेट की निर्मम मानसिकता को भी बहुत अच्‍छे तरीके से बयान करेगी. इस आर्टिकल में आपने नादिया मुराद की जीवनी के बारे में जानें. हमने आपको Nadia Murad Biography in Hindi बातई. ये आपको कैसा लगा. कमेंट जरूर करें.

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