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मुंबई: इमारत ढहने से मरने वालों की तादाद बढ़कर 14 हुई

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Mumbai: मुंबई में चार मंजिला इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या रात में मिले तीन शवों के बाद 14 तक पहुंच गई. बीएमसी (BMC) आपदा नियंत्रण के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

वहीं, इमारत में फंसे अन्य 23 लोगों को बचा लिया गया है. इनमें से कई गंभीर रूप से घायल हैं. मलबे में और लोगों के जिंदा फंसे होने की संभावना को देखते हुए बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है.

मुआवजे की घोषणा

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और सभी घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. इसके साथ ही राज्य सरकार सभी घायलों के इलाज के खर्चे भी उठाएगी.

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने इमारत के गिरने और इसकी पीछे जिम्मेदार लोगों के बारे में चर्चा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की.

वहीं मंगलवार को फणनवीस और महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) ने इस घटना की जांच करने की अलग-अलग घोषणा की थी.

मंगलवार दिन में करीब 11.30 बजे, 80 साल पुरानी केसरबाई इमारत का एक अवैध पिछला हिस्सा अचानक गिर गया, जिससे इस चार मंजिला इमारत में रहने वाले कम से कम 15 परिवार दब गए.

मारे गए लोगों में इमारत के प्रभारी अब्दुल सत्तार शेख और उनकी बहू सबिया निसार शेख के अलावा तीन नाबालिग शामिल हैं.

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख प्रकट करते हुए ट्वीट किया, “मुंबई के डोंगरी में इमारत का गिरना दुखद है. अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के साथ मेरी संवेदना है. मुझे उम्मीद है कि हादसे में घायल लोग जल्द ही ठीक हो जाएंगे. महाराष्ट्र सरकार, एनडीआरएफ और स्थानीय अधिकारी बचाव अभियान में लगे हैं और जरूरतमंदों की सहायता कर रहे हैं.”

चुनौतीपूर्ण हुआ बचावकार्य

केसरबाई इमारत दक्षिण मुंबई के सबसे पुराने और सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित है. ऐसे में संकरी गलियों, देखने वालों की भीड़, वीवीआईपी लोगों के प्रदर्शन और हादसे को कवर करने के लिए बड़ी संख्या में जुटी मीडिया की वजह से बचाव अभियान काफी प्रभावित हुआ है.

क्षेत्र के संकीर्ण होने की वजह से जेसीबी और अन्य भारी उपकरण दुर्घटना स्थल तक नहीं पहुंच सके. ऐसे में घटनास्थल से 50 मीटर से अधिक दूरी पर चौड़ी सड़कों पर एंबुलेंस और बचाव कार्य में लगे वाहनों को खड़ा करना पड़ा, जिससे एनडीआरएफ और अन्य टीमों के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक बन गया है.

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