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50 हजार से ज्यादा लोग एक साथ झूमे और नाचे ‘‘करम अखरा’’ में

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Ranchi: सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सोनाहातू प्रखंड के सालसूद-जाड़ेया गांव की धरती यादगार और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनी जब ‘‘करम अखरा’’ में एक साथ 50 हजार से अधिक लोगों ने करम गीतों पर नृत्य किया. पारंपरिक वाद्य यंत्र-मांदर, ढोल, ढांक, नगाड़ा, झांझ और ठेचका की गूंज. सजी-धजी गांव की बच्चियां और महिलाएं. माथे पर पगड़ी बांधे और धोती-गंजी में बड़े-बुजुर्ग. जैसे ही एक साथ सबके पांव थिरके, लगा, प्रकृति प्रेम, स्नेह और खुशियों में बंधे सात रंग के रिबन फरफरा कर खुल गए. अद्भुत और अतुलनीय नजारा देख आसमान भी मुस्कराया और धरती भी झूम उठी.

करम अखरा में पद्मश्री मुकुंद नायक की टोली ने जब नृत्य का समां बांधा और झुमइर- आपन बोली आखरा बचाय चला चला रे करम झूमइर गहजाय, चला चला रे झारखंड के सुखद बनाय का राग छेड़ा तो हजारों की भीड़ अपलक निहारती रहे. इसके अलावा संतोष महतो (खरसावां), विमल महतो (पुरुलिया), सृष्टिधर महतो (बांकुड़ा), विकास महतो (चंदनक्यारी) ने भी अपने सांस्कृतिक प्रदर्शन से उपस्थित जनसमूह का मनमोह लिया.

मैदान में छा गईं महिलाएं और नृत्य मंडलियां

सुदेश महतो भी पत्नी नेहा महतो संग झारखंड के पारंपरिक वेश भूषा में शामिल थे तथा करम नृत्य में भरपूर सहभागिता निभायी.

फिर देखते ही देखते लाल पाड़ वाली सफेद पीली और हरी साड़ियों में करम नृत्य करती महिलाएं पूरे मैदान में छा गईं. संगीत की लहरियों के साथ अगल-बगल के खेतों और पहाड़ियों में सफेद काश के पौधे भी लहलहा उठे. इससे पहले पांरपरिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई. पाहनों ने पूजा कराया.

पूरे मैदान में गूंज परिवार और आयोजन मंडली के सदस्य व्यवस्था संभालने में जुटे थे. बाजे-गाजे की भी आकर्षक व्यवस्था की गई थी. साथ ही अखरा को कई किस्म के फूलों से सजाया गया था. करम अखरा में सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के लगभग 600 से अधिक गांवों एवं टोलो के लोग उत्साह के साथ शामिल हुए. रविवार की सुबह से ही हर कदम सालसूद-जाड़ेया की ओर बढ़ता नजर आया. करम गीत से पूरा इलाका गुंजायमान रहा.

सुदेश ने सबका स्वागत किया

हफ्ते भर से करम अखरा महोत्सव की तैयारियों में जुटे आयोजन समिति के संरक्षक और आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो सुबह में ही सालसूद-जाड़ेया गांव पहुंचे थे. पहले उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के साथ कार्यक्रम में शामिल होने वाली महिलाएं और बच्चियों की सुविधा का जायजा लिया. साथ ही गांवों से आए लोगों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहार झारखंडी जीवन-दर्शन और संस्कृति का मूल मर्म है. लेकिन करम पर्व प्रकृति को बचाने, संस्कृति और पंरपरा को समृद्ध करने और जिंदगी को प्रवाह देने का संदेश देता है. करम पर्व सभी झारखंडियों को एक सूर, ताल में बांधता है, भले ही वे बंगाल में रहते हों, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ या दूसरे राज्यों में. इससे वास्तविक रूप से झारखंड की पहचान भी दिखाई देती है.

श्री महतो ने कहा कि करम प्रकृति के साथ मनुष्य के प्रेम, सामंजस्य के साथ साथ सामाजिक रूप से सबों को जोडता है. करम पूरे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान है जो यहाँ के हर व्यक्ति को नृत्य और गीत के ताल में जोड़ता है. यहाँ लगा करम महोत्सव इस दिशा में एक अच्छी पहल है.

उन्होंने कहा कि गूंज महोत्सव के लिए सिल्ली का नाम झारखंड में स्थापित था अब सोनाहातू का सालसूद-जाड़ेया भी अपने नाम एक रिकॉर्ड दर्ज कर रहा है. एक मंच पर एक साथ हजारों लोग. यह एकता और आपसी प्रेम का प्रतीक भी है.

शिक्षाविदों ने भी दिए संदेश

करम अखरा महोत्सव की खासियत यह रही कि इसमें रांची विश्वविद्यालय के कई विद्वत शिक्षकों ने संदेश भेजा. जबकि रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय क्षेत्रीय भाषा से रिटायर प्रोफेसर एचएन सिंह ने करम पर्व की महत्ता और विधि-विधान पर विस्तार से चर्चा की.

उन्होंने कहा कि करम पर्व का आयोजन विभिन्न चरणों में श्रद्धा और उल्लास के साथ पूरा होता है. उपवास और विर्सजन के दौरान करमगीत और नृत्य से अखरा गुलजार रहता है. और इस पर्व का मूल मंत्र है कि बहन भाई का प्रेम बना रहे तथा मानव जिंदगी का प्रकृति से सीधा जुड़ा रहे. करम अच्छी फसल होने की संभावना, भाग्य सुधारने, संतान सुख की आग्रह करने और हरे-भरे जीवन बनाए रखने का त्योहार है.

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ अंजू कुमारी साहु ने अपने संदेश में कहा पुरखों ने हमें यह ज्ञान दिया है कि प्रकृति ही हमारे भगवान हैं. यह संकल्प लेने का अवसर भी है कि बढ़ते रहेंगे इसी डगर पर निश्चय करेंगे हम अपने करम.

बिरसा कॉलेज खूंटी में नागपुरी भाषा विभाग की प्रख्याता डॉ अंजूलता कुमारी ने कहा कि करम हमें संदेश देता है कि भाई एसा कर्म करें कि बहनें हर जगह सुरक्षित रहें. रांची विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार तिवारी ने भी करम पर्व के संदेश और आयोजन की चर्चा की. उन्होंनें सोनाहातू के लोगों और आयोजन समिति के लोगों को इतने बड़े पैमाने पर और आकर्षक आयोजन पर बधाई दी.

सिद्धो कानू विवि में गणित विभाग के अध्यक्ष डॉ संत कुमार महतो भी संदेश भेज कर कहा कि आपोन करम भाई एक धरम के मूल मंत्र पर आधारित यह पर्व झारखंड के बाहर दूसरे राज्यों में भी उत्साह और उल्लास से मनाया जाता है. इसके संकेत हैं कि प्रकृति से प्रेम और बहनों का भाईयों के प्रति प्यार तथा भरोसा में कितना प्रगाढ़ता होता है.

जिन्हें सम्मानित किया गया

भाषा, संस्कृति और परंपरा पर लेखन के लिए डॉ एचएन सिंह, डॉ शशिभूषण महतो के अलावा गायकों में केदारनाथ सेठ, भजुराम मुखियार, प्रभात कुमार महतो, मुचिराम महतो, मोहित महतो को सम्मानित किया गया. इसके अलावा सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सभी संस्कृति कर्मियों एवं दलों को भी मंच से सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में ये भी थे मौजूद

डॉ संजय बसु मल्लिक, देवशरण भगत, डोमन सिंह मुंडा, सुकरा सिंह मुण्डा, सुनील सिंह, चितरंजन महतो, वीणा देवी, वीणा मुण्डा, रजिया खातुन, गौतम साहू, सुशील सिंह, संजय सिद्धार्थ, जयपाल सिंह, श्याम महतो, रंगबहादूर महतो, अमर बेदिया के अलावा सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के गणमान्य मानकी मुण्डा, जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, मुखिया समेत कई लोग शामिल थे.

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