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मॉनसून फिर रुठा, खेती की तैयारी में जुटे किसानों में मायूसी

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#Ranchi: भारतीय मौसम विभाग ने केरल के तटीय इलाके में समय पूर्व मॉनसून के प्रवेश के बाद मई के अंतिम सप्ताह में यह सूचना दी थी कि झारखंड में भी इस वर्ष निर्धारित समय से करीब एक सप्ताह पहले मॉनसून के पहुंच जाने की संभावना है. आमतौर पर झारखंड में 10 से 12 जून के बीच मॉनसून का प्रवेश हो जाता है, लेकिन इस बार मौसम विभाग के पूवार्नुमान के विपरीत समय से पहले मॉनसून तो नहीं पहुंचा, बल्कि निर्धारित समय से भी 10-12 दिन विलंब से मॉनसून के आने की संभावना है.

रांची मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने बताया है कि झारखंड में मॉनसून आने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं. मॉनसून अभी ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में ठहर गया है. अगले दो-तीन दिनों तक रांची, जमशेदुपर, गुमला, लोहरदगा, पलामू, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग आदि क्षेत्रों में बादल छाये रहेंगे और उमस भरी गर्मी बनी रहेगी. इस दौरान अधिकतम तापमान में भी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी दर्ज की जाएगी.

मौसम विभाग की ओर से जो नया पूवार्नुमान जारी किया गया है, उसके तहत रांची और आसपास के इलाके में 23-24 जून तक मॉनसून की बारिश की संभावना है. हालांकि अगले पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने और गरज के साथ वज्रपात की भी आशंका व्यक्त की गयी है.

मौसम विभाग की ओर से पूर्व में जो सूचना दी गयी थी कि उसके मुताबिक किसानों ने मई के अंतिम और जून के पहले सप्ताह में हुई प्री-मॉनसून बारिश के दौरान ही खेत को तैयार कर लिया, कुछ किसानों ने धनरोपणी का भी काम पूरा कर लिया और खेतों में बीज भी बो दिये, लेकिन अब बारिश नहीं होने से धान के बिचड़े सूखने लगे है. मॉनसून के कुछ दिनों के लिए रुठने के कारण किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है.

किसान की मेहनत बेकार जाने के साथ ही धनरोपणी और अन्य फसलों के लिए बीज रोपण के कारण उन्हें आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ा है. जून महीने में बारिश नहीं होने से लोगों को उमस भरी गर्मी के साथ ही पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ रहा है.

रांची का अधिकतम तापमान फिर करीब 38 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा है, वहीं मेदिनीनगर, जमशेदपुर समेत कई शहरों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा पहुंचा है. रांची के कई सूखाग्रस्त इलाकों में नगर निगम टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचा रहा है. इसके बावजूद लोगों की शिकायत है कि उन्हें निगम की ओर से पर्याप्त पानी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है. राज्य की कई प्रमुख नदियां, डैम, तालाब और अन्य जलाशयों का जलस्तर नीचे चला गया है या सूख गया है.

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