जब संविधान संशोधन हो सकती है तो सरकार मेरी नियुक्ति को लेकर बदलाव क्‍यों नहीं कर सकती

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Ranchi: पिछले कई दिनों से रांची के मोरहाबादी मैदान में आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों से वार्ता करने पहुंचे झारखंड सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर को खूब खरी-खोटी सुननी पड़ी. मंत्री मिथिलेश ठाकुर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सहायक पुलिस कर्मी से मिलने मोरहाबादी पहुंचे थे.

मंत्री ने कहा कि वर्दी पहन कर नेतागीरी और आन्दोलन करते हो. किसी ने यह नहीं कहा कि वर्दी पहनकर आन्दोलन करना गलत है. इस पर महिला कर्मियों ने कहा कि वर्दी किसी के बाप ने नहीं दिया है. अपने पैसे से खरीदा है. वर्दी पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए, तब वर्दी का ख्याल नहीं आया.

वहीं गढ़वा के एक युवक ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार यह कहा जा रहा है कि 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर हमने साइन किया है. इसको कैसे बदला जाए तो सर आप ही बताइए, जब संविधान में संशोधन हो सकता है तो क्या राज्य सरकार मेरी नियुक्ति को लेकर कुछ बदलाव नहीं कर सकती है. इसपर मंत्री सब कुछ ठीक होगा, कह कर निकल गए.

आपको बता दें कि कल शुक्रवार दोपहर तीन बजे मोरहाबादी मैदान में स्थायीकरण की मांग को लेकर 12 सितंबर से आंदोलन कर रहे राज्य के 12 जिले के लगभग 2350 पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस का प्रयोग किया गया था. इसमें कई घायल हो गये. घायलों को एंबुलेंस तक ले जाने के लिए सहायक पुलिसकर्मियों में अफरातफरी मची हुई थी. इसी दौरान एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा एवं ट्रैफिक एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग उग्र सहायक पुलिसकर्मियों को समझाने पहुंचे. इस कारण उन्हें सहायक पुलिसकर्मियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा.

लाठी चार्ज के बाद सहायक महिला पुलिसकर्मियों ने रो-रोकर अपना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा कि दस हजार रुपये में क्या होता है ? कई महिला शादीशुदा हैं. पति भी बेरोजगार हैं. वहीं, संविदा खत्म होने के बाद अब पैसा भी नहीं मिल रहा है. घरवालों से पैसा मंगा कर खाना खा रहे हैं. उनके साथ में बच्चे भी हैं. केवल अपना देखना होता, तो एक शाम भूखे भी रह जाते, लेकिन बच्चे को दूध व अन्य तरह की जरूरत का सामान तो देना है. आठ दिनों से यहां पड़े हैं. हमारी क्या स्थिति है, कोई देखनेवाला तक नहीं है.

सहायक पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे अति नक्सल प्रभावित इलाके से आते हैं. सरकार यदि उन्हें नौकरी पर दोबारा बहाल नहीं करती है, तो वे नक्सली संगठन में शामिल हो जायेंगे. तीन साल तक सेवा देने के बाद भी सहयोगियों की ही लाठी खानी पड़ रही है. इससे बड़ी बात क्या हो सकती है, जिसके साथ उन्होंने काम किया, वही उन पर आज लाठी बरसा रहे हैं.

स्थायीकरण की मांग को लेकर सात सितंबर से सहायक पुलिसकर्मी हड़ताल पर हैं. वे 12 सितंबर को राजभवन के समीप पर धरना देने के लिए रांची आये, लेकिन वहां धरना नहीं देने दिया गया. 2017 में राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की 10 हजार रुपये मानदेय पर नियुक्ति की गयी थी. हालांकि 2350 सहायक पुलिसकर्मियों ने ही नौकरी ज्वॉइन की थी. इन पुलिसकर्मियों का कहना है कि नियुक्ति के समय बताया गया था कि तीन साल बाद उनकी सेवा स्थायी हो जायेगी. लेकिन, तीन वर्ष पूरा होने के बाद भी स्थायीकरण नहीं हुआ है.

भाजपा के चार विधायकों ने रांची के मोरहाबादी मैदान जाकर सहायक पुलिसकर्मियों से मुलाकात की. उनका हाल जाना. इनमें भवनाथपुर से भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही, विधायक अमित मंडल, विधायक किशुन दास एवं इंद्रजीत महतो शामिल थे.

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