मंत्री ने बताया CNT-SPT कानून संशोधन क्‍यों चाहती थी रघुवर सरकार?

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Ranchi: CNT-SPT कानून में संशोधन को लेकर सरकार की क्‍या मंशा थी. इसका खुलासा भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने सोमवार को झारखंड विधान सभा सत्र के दौरान किया. मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया. उन्‍होंने कहा कि CNT और SPT में संशोधन के पीछे सरकार की गलत मंशा नहीं थी. आज 50 डिसमिल जमीन के मालिक गैर-आदिवासी करोड़पति हैं, तो एक एकड़ का मालिक होते हुए भी आदिवासी पलायन को मजबूर है. क्योंकि इन आदिवासियों-दलितों को मौका नहीं दिया गया.

अमर बाउरी ने कहा कि आजादी के पहले जो कानून बनाये गये वे इन आदिवासियों को जंजीर में बांधने के लिए बना. राज्य सरकार ने इन आदिवासी-दलितों के हित में, उनके विकास के लिए CNT-SPT की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ किए बगैर इसमें संशोधन का प्रयास किया था.

मंत्री ने कहा कि यह अलग बात है कि सरकार अपनी बात आम जनता तक नहीं पहुंचा सकी. फिर विरोध के कारण संशोधन के प्रयास को सरकार ने वापस ले लिया. लेकिन, सवाल यह है कि आज जो लोग आदिवासियों-दलितों के पिछड़ने की बात करते हैं, वे आज तक उनके उत्थान की दिशा में निदान क्यों नहीं बता सके. भू-राजस्व मंत्री विधानसभा में सोमवार को विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे.

58 लाख रुपए का राजस्व भी प्राप्त हुआ

विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के विरंची नारायण और मनीष जायसवाल द्वारा बंदोवस्त हो चुकी सरकारी जमीन का रसीद नहीं कटने की बात कहे जाने पर बाउरी ने स्पष्ट किया कि 48 हजार मामलों में जीएम लैंड से जुड़े रैयतों की रसीद कटी है. 58 लाख रुपए का राजस्व भी प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर कोई गड़बड़ी होगी तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेंगे. जिन गरीबों और जरूरतमंदों की जमीन की बंदोवस्ती हुई है, उनकी रसीद कटेगी. जिन लोगों को सरकारी जमीन की बंदोवस्ती हो चुकी है उनकी रसीद कटेगी, लेकिन संदिग्ध मामलों की चल रही जांच से फलाफल प्रभावित होगा. लेकिन भूमि माफियाओं द्वारा किए गए कब्जे या कराए गए बंदोवस्ती को सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी जमीन, पहाड़, रास्ता की जमीन को जिन लोगों ने कब्जा कर रखा है, उसे भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

टाना भगतों के विकास लिए योजनाएं बनाई

बाउरी ने आगे कहा कि झारखंड देश का अकेला राज्य है, जहां जमीन से जुड़े सबसे अधिक कानून है. सरकार जमीन से जुड़े लोगों के सेंटिमेंट को भी समझती है. उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून का विपक्ष द्वारा कि गए विरोध का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उसे ही लागू किया जो केंद्र की यूपीए सरकार ने बनाया था. जिस विस्थापन की आज बार-बार बात उठाई जा रही है, अगर एचइसी, बीएसएल या विभिन्न डैमों के निर्माण के समय ही इसका हल ढूंढ़ लिया जाता तो आज यह सुरसा की मुंह की तरह नहीं बढ़ता. राज्य सरकार ने तो विस्थापितों को उनको मिली जमीन का मालिकाना हक देने का काम किया. टाना भगतों के विकास लिए योजनाएं बनाई और उन्हें उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाया.

पहले से लगे हजारों उद्योग धंधे बंद हो गए : प्रदीप यादव

विपक्ष के बहिष्कार के बीच राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की 766 करोड़ की मूल अनुदान मांग सोमवार को विधानसभा से पारित हो गई. इससे पूर्व राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अलावा ऊर्जा, खान, उद्योग, सूचना एवं जनसंपर्क, वाणिजियकर, उत्पाद एवं मद्य निषेध सहित नौ विभागों के अनुदान मांग पर प्रदीप यादव द्वारा पेश किये गये कटौती के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. प्रदीप यादव ने सवाल खड़ा किया कि ऊर्जा, खान, उद्योग जैसे विभागों को गिलोटिन में डाला जाना कहीं से उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि आजादी के पूर्व व बाद में यहां कै रैयतों के रक्षार्थ कई कानून बने. लेकिन उन कानूनों की आड़ में रैयतों को संरक्षण देने के बदले कानून को ही कमजोर करने का प्रयास किया. CNT और SPT में संशोधन उसी की कड़ी थी. लेकिन जनता और जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण सरकार को अपना संशोधन प्रस्ताव वापस लेना पड़ा.

शाह ब्रदर्स के मामले में सरकार के मंत्री ही विरोध कर रहे

प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि गोड्डा में भी अडाणी पावर को लाभ पहुंचाने के लिए डीसी द्वारा अनुशंसित 46 लाख रुपए प्रति एकड़ के मुआवजे को घटा कर तीन लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया. जीएम लैंड को लैंड बैंक में लाकर उसे उद्योगपतियों के बीच बांटा जा रहा है. गोचर भूमि का नेचर बदला जा रहा है. एक ओर उस जमीन को कौड़ी के भाव उद्योगपतियों को दिया जा रहा है दूसरी ओर उस पर बसे लोगों को उजाड़ा जा रहा है. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि CNT का उल्लंघन कर हुई जमीन की बंदोवस्ती की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट पर क्या हुआ? जबकि उनकी जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में 3541 लोगों ने 1894 एकड़, गुमला में 109 लोगों ने 110 एकड़ जमीन हड़पी. जेएसएमडीसी में दो कंसलटेंटों को प्रति माह 20 एवं 22 लाख का भुगतान किया जा रहा है. सरकार द्वारा शराब बेचे जाने के कारण दो वर्ष में 1200 करोड़ के राजस्व की हानि हुई. गांव में पोल लगा दिए जाने को ही उस गांव को ऊर्जान्वित की श्रेणी में दर्शाया जा रहा है. अक्षय पात्रा, ओरिएंट क्राफ्ट व अन्य कंपनियों को कौड़ी के भाव जमीन दे दी गई है. पिछले दो साल में 12 हजार छोटी-छोटी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और 20 हजार इंटरप्राइजेज बंद हो चुके हैं और सरकार पूर्व से लगे उद्योगों को बचाने के बदले निवेश के नाम पर एमओयू करती जा रही है. शाह ब्रदर्स के मामले में सरकार के मंत्री ही विरोध कर रहे हैं.

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सरकार ठेकेदार की भूमिका निभा रही

जीतू चरण राम ने कहा कि गरीबों के घर बिजली पहुंची. टाना भगतों के विकास के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है. दीपक बिरुआ ने ईचा डैम के निर्माण का विरोध किया. मानकी मुंडा व्यवस्था के तहत न्याय पंच का गठन नहीं होने पर चिंता जाहिर की. झारक्राफ्ट के कंबल घोटाले में अब तक कार्रवाई नहीं किए जाने का सवाल उठाया. कहा कि कौशल विकास के तहत रोजगार देने के मामले में सरकार ठेकेदार की भूमिका निभा रही है. रामकुमार पाहन और गंगोत्री कुजूर ने भी सरकार के कार्यों की सराहना की. वहीं, आलमगीर आलम और राजकुमार यादव ने कई सवाल खड़े किए. यादव ने कहा कि माइका को लेकर खनन नीति बनाने की जरूरत है. भू-दान की जमीन में भी बड़ी गड़बड़ी है. जमीन विवाद का हल किए बगैर राज्य से उग्रवाद का सफाया नहीं हो सकता. जगन्नाथ महतो ने जीएम लैंड का रसीद नहीं कटने पर चिंता प्रकट की. उन्होंने कहा कि इसके कारण रैयतों को मुआवजा का भुगतान नहीं हो पा रहा.

अधिकारियों के नहीं रहने पर स्पीकर ने जाहिर की चिंता

कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रमुख विभागों के वरीय अधिकारियों के मौजूद नहीं रहने पर स्पीकर दिनेश उरांव ने गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि सरकार को देखना चाहिए कि अधिकारी उपस्थित रहें. प्रमुख विभागों पर होनेवाली चर्चा को अधिकारी सुनें.

 

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