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दूध के दाम पांच से छह रुपए की कमी, कई डेयरी ने बंद किया दूध का संग्रह

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Begusarai: वैश्विक महामारी नोवल कोरोना वायरस ने पशुपालक किसानों की कमर तोड़ दी है. बिहार में दूध का डेनमार्क के रूप में प्रसिद्ध बेगूसराय जिले की सभी प्राइवेट डेयरी ने दूध के दाम में पांच से छह रुपए प्रति लीटर की कमी कर दी और अब दूध संग्रह भी बंद कर दिया है.

जिले की सबसे बड़ी प्राइवेट डेयरी गंगा डेयरी लिमिटेड समेत कई प्राइवेट डेयरी ने जहां अगले आदेश तक के लिए दूध संग्रह करने पर रोक लगा दी है वहीं, कॉम्फेड के देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (बरौनी डेयरी) ने भी 31 मार्च की सुबह तक दूध लेने से मना कर दिया है. हालत की समीक्षा के बाद फिर से दूध संग्रह बंद किया जा सकता है.

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इस संबंध में बरौनी डेयरी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण दूध की खपत में भारी कमी हो गई है.हमारे मुख्य क्रेता झारखंड एवं दिल्ली स्कीम, कॉम्फेड गुवाहाटी आदि ने दूध लेना बंद कर दिया जिसके कारण डेयरी में दूध की हैंडलिंग असंभव हो गई है.पशुपालकों से प्राप्त हो रहा दूध , झारखंड स्थित संघ के पाउडर प्लान्ट की डेयरी में भेजकर सुखाने का प्रयास किया जा रहा है.

दाम में कमी के बाद दूध संग्रह बंद होने से बेचैन हुए पशुपालक

लेकिन दूध की मात्रा देखते हुए यह नाकाफी है. कॉम्फेड के अधीन वाले अन्य संयंत्र भी दूध नहीं ले पा रहे हैं.बेगूसराय जिले की अन्य प्राइवेट डेयरी ने दूध संग्रह पूरी तरह से बंद कर दिया है.बरौनी डेयरी ने किसानों से दूध लेने की सुनिश्चितता के लिए दाम में पांच रुपए प्रति लीटर की कटौती कर दी है लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ.

बरौनी डेयरी आर्थिक क्षति के बाद भी दूध का संग्रह बंद नहीं करता, लेकिन दूध की मांग में अप्रत्याशित कमी एवं गुणवत्ता सुनिश्चित रखने के साथ-साथ हैंडलिंग की क्षमता एवं वर्तमान में अत्यधिक दूध जमा हो जाने के कारण सभी गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैंं.

बता दें कि बिहार में सबसे अधिक दूध का उत्पादन बेगूसराय में होता है.यहां दस से अधिक डेयरियां कार्यरत हैंं और प्रत्येक दिन वे सभी 15 लाख लीटर दूध का संग्रह करती हैंं.लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दूध की बिक्री में कमी आ गई तो सभी डेयरी ने दाम में कटौती कर दी.इसके बावजूद हालत नहीं सुधरने के कारण अब एक-एक कर सभी डेयरी दूध संग्रह बंद कर रही है.इसके कारण पशुपालक किसान बेचैन हैं.

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