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मिड डे मिल: रांची के इस सरकारी स्‍कूल में पेड़ के नीचे खाते हैं बच्‍चे

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Ranchi: झारखंड सरकार के सरकारी स्‍कूलों में मिड डे मिल परोसने का तरीका सही नहीं है. स्‍कूलों में किसी भी तरीके से बच्‍चों को भोजन परोसकर सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है. भोजन परोसने के समय न तो साफ-सफाई का ध्‍यान दिया जाता है और न ही सभी व्‍यवस्‍था का.

स्कूलों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज हो. ड्रॉप आउट की संख्या कम किया जा सके. इसे लेकर देशभर में स्कूली बच्चों को मिड डे मिल देने की योजना 15 अगस्त 1995 में शुरू हुई थी.

शुरुआत में यह योजना कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए शुरू की गई थी. साल 2008 में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए यह योजना शुरू की गई.

झारखंड में भी योजना संचालित है. झारखंड की राजनधानी रांची के एक सरकारी स्‍कूल की यह तस्‍वीर मिड डे मिल की दुर्दशा की पोल खोलने के लिए काफी है. करमटोली चौक के राज्‍यकृत मध्‍य विद्यालय में मीड डे मिल परोसने के दौरान किसी तरह की सतर्कता नहीं बरती जा रही है.

स्‍कूल का किचन में अंधेरा और गंदगी है. वहीं बच्चों को बेतरतीब तरीके से खाना परोसा जाता है. बैठने के लिए एक दरी तक इन बच्चों को मुहैया नहीं कराई गई है. बच्चे पेड़ के नीचे बरामदा में जहां-तहां बैठकर खाने को मजबूर है.

हमने रियलिटी टेस्ट करने के उद्देश्य से रांची के बीचोंबीच स्थित करम टोली राजकीयकृत विद्यालय का मुआयना किया. उसी दौरान मध्यान्ह भोजन परोसे जा रहे थे. इस दृश्य को देखकर मन विचलित हो उठा.

छोटे-छोटे नन्हे-नन्हे बच्चे लाइन में खड़े होकर भोजन ले रहे थे और जहां-तहां बैठकर भोजन कर रहे हैं. न तो इनके लिए बैठने के प्रबंध है और न ही किसी तरह की व्यवस्था ही दी जा रही है.

पेयजल के नाम पर नगर निगम द्वारा एक काले रंग के सिंटेक्स टंकी लगा दी गई है. जिस पानी का उपयोग बच्चे पीने में भी करते हैं और बर्तन धोने में भी, जबकि इस योजना के तहत कक्षा 1 से 5 के बच्चों को प्रतिदिन 450 कैलोरी और कक्षा 6 से 8 के बच्चों को 700 कैलोरी युक्त पका हुआ भोजन देना है. इसमें 60 फीसदी राशि केंद्र और 40% राशि राज्य सरकार देती है.

1 Comment
  1. unknown says

    Hats off to you guys. You so called media people only know how to spread negativity about any school in India or elsewhere. Mainly You guys go to any school on the time of lunch and all for disturbing all the staffs over there and creating news for yourself with added MASALA what we call in media language. The teacher which you were interviewing was trying to say something, she was describing something about childrens but you will not show full interview, you’ll only show what you wanted us to watch. You should know these schoola are government school, it runs when government help them to run easily. As far as infrastructure is concerned the government must give such amount specially for infrasture development. And one more thing i wanted to say that on the time of lunch why you people go to schools, for diaturbing them. When we will coke to your house on the time of making lunch or having lunch i am damn sure your arrangements will also gets hampered.
    Its my humble request to such so called news reporters please don’t spread negetivity, there is so much to explain positivity about such government schools whose teachers are giving there whole life to improve the life of childrens.
    One more thing, when each and every schools were were given holiday because of summer and these government teachers were called to their schools for some work, where were you that time tell me, why don’t you people come to schools in such situation, i tell you why because you can’t publish any good things about these teachers or doing so you people can’t get that much TRP right or you cannot be famous lol.

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