तब्लीगी मरकज के मौलाना ने पुलिस को पत्र लिखकर मांगे थे वाहन पास

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New Delhi: हजरत निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज मामले में अब एक नया खुलासा हुआ है. मरकज के मौलाना यूसफ़ साहब ने 25 मार्च को स्थानीय पुलिस स्टेशन को पत्र लिखकर सहयोग मांगा था, लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें सहयोग नहीं मिला.

निज़ामुद्दीन दिल्ली स्थित तबलीगी मरकज के मौलाना युसुफ ने 25 मार्च 2020 को प्रशासन को पत्र लिखकर बताया था कि मरकज से 1500 लोगों को भेजा जा चुका है लेकिन करीब कुछ लोग अभी भी लॉकडाउन की वजह से नहीं जा सके हैं, जिसके लिए वाहन पास जारी किए जाएं. इसी के साथ वाहनों की सूची भी लगाई गई थी लेकिन प्रशासन ने वाहन पास जारी नहीं किए.

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जमातियों का होता है धर्म प्रचार में अहम रोल

राजधानी में निजामुद्दीन थाने के ठीक पीछे बने मरकज में वर्ष भर देश-विदेश के जमाती आकर ठहरते हैं. यह मरकज मक्का-मदीना के बाद दूसरे नम्बर पर माना जाता है. यहां बीते सप्ताह देश-विदेश से करीब 4500 से ज्यादा जमाती आकर ठहरे थे. यह जमाती तीन सप्ताह की धर्म संबंधी क्लास लेने के बाद विभिन्न समूह में बंटकर अलग-अलग राज्यों में जाते हैं और वहां अपने समुदाय के बीच धर्म प्रचार करते हैं. उसके बाद वह वापस मरकज लौट कर दो-दिन के बाद अपने-अपने देश लौट जाते हैं.

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छह मंजिला इमारत में रूकते हैं जमाती

पुलिस सूत्रों के अनुसार, देश-विदेश से आये यह जमाती निजामुद्दीन मरकज की छह मंजिला इमारत में आकर रूकते हैं. यह छह मंजिला इमारत करीब 600 गज में बना हुआ है. इसके टॉप फ्लोर में इमारत का मालिक रहता है, जो इन जमातियों को धर्म की क्लास देता है. इसे लोग उस्ताद कहकर पुकारते हैं. उक्त छह मंजिला इमारत की पांच फ्लोर पर करीब 450 लोग धर्म की क्लास लेते हैं जो तीन से चार शिफ्टों में चलती है.

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जगह न होने पर ट्रक में रहते हैं यह लोग

पुलि‍स सूत्रों के अनुसार, जमातियों की संख्या ज्यादा होने पर यह लोग बड़े ट्रक के पीछे वाले हिस्से में चार फ्लोर बनाकर उसमें रहते हैं. उक्त ट्रक में सैकड़ों की संख्या में यह लोग एक साथ आराम करते हैं.

प्रचार करने के बाद बताते हैं अपना अनुभव

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मरकज में देश-विदेश से आये सभी लोगों की करीब तीन सप्ताह धर्म की क्लास चलती है. उसके बाद इन्हें विभिन्न समूह में बांटकर अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता है. वहां यह लोग अपनी जमात के लोगों को इकठ्ठा करके धर्म का प्रचार करते हैं. उसके बाद सभी लोग वापस मरकज लौटते हैं. यहां दो दिन रूकने के बाद अपना अनुभव बताते हैं कि इन लोगों ने किस तरह से लोगों को इकठ्ठा किया और कैसे उन लोगों को अपनी बातें बताई. उनकी बात सुनकर कितने लोग प्रभावित हुए. इस कार्य में आई कमियों के बारे में उन्हें क्लास का इंजार्च बताता है, ताकि अगली बार इन कमियों को दूर किया जा सके.

यह कहना है ज्वाइंट सीपी का

संयुक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिणी रेंज) देवेश श्रीवास्तव ने कहा कि तबलीग-ए-जमात में करीब 300 से 400 लोगों ने भाग लिया था. उन्होंने बताया, ‘हमने मरकज की इमारत को बाकी इलाके से अलग कर दिया है जहां तबलीग-ए-जमात हुई थी. हम स्वास्थ्य विभाग के लोगों को भी मदद कर रहे हैं.

कोरोना संदिग्धों की पहचान करना अब पुलिस के लिये चुनौती

मरकज में रूके जमाती यहां से निकलकर अपने-अपने राज्यों में गए हैं जहां से उनके संपर्क में आए लोगों के बीच भी कोरोना फैलने की आशंका है. प्रशासन व पुलिस के लिए उन सभी को चिन्हित करना एवं उन्हें आइसोलेशन में डालना अब बड़ी चुनौती है.

अस्पताल में 24 पाए गए कोरोना पॉजिटिव

मकरज से अब तक करीब एक हजार लोगों को बाहर निकाला जा चुका है. इनमें से 300 कोरोना संदिग्ध लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनकी जांच में अब तक 24 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है. यहां से निकाले गए 700 अन्य लोगों को फिलहाल क्वॉरेंटाइन किया गया है. इनमें अभी तक संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं. यहां पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं जिनको निकालने का काम पुलिस एवं प्रशासन द्वारा किया जा रहा है.

पूरे इलाके को सील करके हो रही है जांच

फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. यहां पर लोगों की निगरानी की जा रही है. एक तरफ मरकज को खाली कराया जा रहा है तो दूसरी तरफ ऐसे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है जो यहां रहने वाले लोगों के संपर्क में आए हैं. इसके साथ ही पुलिस मरकज के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी में भी है क्योंकि दिल्ली सरकार की तरफ से इस बाबत एफआईआर दर्ज करने के आदेश किए गए हैं.

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