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15 जनवरी को मनेगी मकर संक्रांति

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माघ कृष्ण पंचमी बुधवार 15 जनवरी को इस बार मकर संक्रांति मनाई जाएगी. 14 जनवरी की मध्य रात्रि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास भी खत्म हो जाएगा और शुभ लग्न आरंभ हो जाएगा.

खरमास के बाद शुभ विवाह की पहली तारीख

जनवरी में विवाह की पहली तिथि 17 जनवरी होगी. मान्यता है कि सूर्य जब बृहस्पति के राशि में संचरण करते हैं तो खरमास होता है. किसी भी शुभ कार्य के आरंभ के लिए बृहस्पति और शुक्र ग्रह का बलवान रहना आवश्यक है. जब भी धनु और मीन राशि में सूर्य संचरण करते हैं तो उस महीने में कोई भी विवाह आदि शुभ कार्य नहीं किया जाता. लोक भाषा में इसे खरमास कहा जाता है.

ज्योतिष आचार्य के अनुसार 15 जनवरी को सौम्या अयन संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:52 दिन के 2:16 तक रहेगा. इस अवधि में स्नान दान व दही चुरा के साथ तिलकुट खाने का फल अत्यंत शुभ कार्य होगा. यह दिन तिला संक्रांति नाम से भी प्रचलित है. इस दिन का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और देवताओं का प्रातः काल आरंभ होता है. सत्यव्रत भीष्म ने भी बाणों की शैया पर रहकर मृत्यु के लिए मकर संक्रांति की प्रतीक्षा की थी.

उत्तरायण सूर्य में माता गायत्री की उपासना का सबसे बढ़िया समय

मान्यता है कि उत्तरायण सूर्य में मृत्यु होने के बाद मोक्ष की प्राप्ति सुगम होती है. इसी दिन से प्रयाग में कल्पवास का भी आरंभ होता है. साथ ही लोग मांग स्नान और प्रातः स्नान इसी दिल से आरंभ करते हैं. शास्त्रों में माता गायत्री की उपासना के लिए इससे बढ़कर और कोई समय नहीं बताया गया है. इस समय में माता गायत्री की उपासना आसानी से फलीभूत होती है.

तिल गुड़ और वस्त्र दान करने से अनिष्ट ग्रहों का दुष्प्रभाव कम

इस बार मकर संक्रांति के हाथ में केतली का फूल रहेगा. यह पुष्प दर्शाता है कि शिव की आराधना से लाभ होगा. राजनीतिक हलचल तेज होगी. मिष्ठान और मेन के दाम बढ़ेंगे. इस दिन तिल गुड़ और वस्त्र दान करने से अनिष्ट ग्रहों का दुष्प्रभाव कम होगा.

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