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ओ मां ! सुन ले पुकार…

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मां होना दुनिया का सबसे प्यारा अहसास है और मां का होना सबसे बड़ी खुशी. अपनी सांसों के तार संतान से जोड़ लेती है मां. बच्चा भूखा हो तो मां के हलक से निवाला भी नहीं उतरता. बड़ी आसानी से वो छप्पन भोग भी ठुकरा दती है अपनी औलाद के लिए.

सच तो ये है कि ये दुनिया का सबसे करीबी रिश्ता है. बच्चा भी मां के होने को बड़ी शिद्दत से महसूस करता है. बच्चे की पहली गुरु मां ही होती है. मां के बिना बच्चे के जीवन में जो खालीपन आ जाता है, उसे दुनिया में कोई भी नहीं भर सकता.

मां के ना होने का दर्द उस बच्चे से पूछिए जिसने पैदा होते ही मां को खो दिया हो. जब वो किसी के द्वारा दयावश पाला जाता है और कदम – कदम पर उपेक्षित होता है, तो जरा कल्पना कीजिए उस पर क्या बीतती होगी.

उसका मन मुरझा जाता है, व्यक्तित्व कुंठित हो जाता है पर ये दुःख ताउम्र पीछा करता है, मां के ना होने की सजा उसे आजीवन भुगतनी पड़ती है. एक ऐसे ही बच्चे के दर्द की बानगी देखिए जो सौतेली मां से ममता और प्यार पाने की करुण पुकार कर रहा है. ऐसी पुकार जो पत्थर का सीना भी चीर दे –

फूलों से खिले चेहरे सबके,

मन मेरा मुरझाया क्यों है?

अपनाकर फिर दूर किया,

ऐसा ग़ज़ब ढाया क्यों हैं?

जब तूने मुझे अपना ना माना,

मेरे गम को ना पहचाना.

फिर सच सच कह दे ओ मां,

ये आंसू आंख में आया क्यों है?

मेरी हर धड़कन में तू,

सांसों की सरगम में तू.

मुझे सीने से लगाकर,

अब ऐसे भुलाया क्यों है?

सुना है मां का दिल मोम का,

यही जाप है रोम रोम का,

दिल में जलाकर दीया प्रेम का,

अब इस तरह बुझाया क्यों है?

जब तूने मुझे पाला पोसा,

अब क्यों मुझे यूं है कोसा,

देकर होठों पर हंसी,

अब इस तरह रुलाया क्यों है?

सुना है मां नहीं होती कुमाता,

मां को सिर्फ स्नेह है भाता,

पहले लगाया था सीने से,

अब ऐसे ठुकराया क्यों है?

तूने मुझे नहीं दिया जन्म,

पर क़िस्सा नहीं यहीं खत्म,

देकर मुझे झूठा दिलासा,

मैंने तुझे सब कुछ माना,

तेरे प्यार को ही था जाना,

आज मुझे अपना कहने से,

तेरा दिल घबराया क्यों है?

नहीं चाहिए ये धन दौलत,

तेरे प्यार की ऊंची कीमत,

नहीं मांगूंगा तुझसे कुछ,

ये फासला बढ़ाया क्यों है?

सुना है मां तो मां ही होती,

बच्चे के गम में आंचल भिगोती।

सच बता दे तू एक बार,

कि गीत नफरत का गाया क्यों है?

मां की ममता होती अनमोल,

नहीं सकते हम इसको तोल,

यूं दिखाकर उम्मीद की किरण,

अंधेरा ये फैलाया क्यों है?

देख के दुनिया के ये नज़ारे,

खोकर के अपने सहारे.

टूटे रिश्तों को लेकर,

मन मेरा भरमाया क्यों है?

कुछ ऐसे व्याकुल हुआ है मन,

जैसे उजड़ा हो चमन,

पूछता हूं अपने खुदा से,

तूने मुझे बनाया क्यों है?

डॉ. अलका जैन ‘ आराधना ‘ (हृदय – कलश से )

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