दहकते अंगारों पर चलकर मांगी जाती हैं मन्‍नतें

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कांके:भगवान शंकर को अपनी भक्ति से खुश करने के लिए 9 दिनों की मंडा पूजा कांके के सुकुरहुटू में आज समाप्त हो जाएगा। कल पूजा के दौरान बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक दहकते अंगारे पर चले| इससे पहले वे अंगार स्थल पर महादेव की पूजा व परिक्रमा करते हैं। दो तरह के लोग इस पूजा में शामिल होते हैं, एक तो वे जिन्हें मन्नत मांगनी होती है और दूसरे वे जिनकी मन्नत पूरी हो गई होती है। यह पूजा अच्छी बारिश की कामना के लिए भी की जाती है, ताकि परिवार सुख शांति से रहे। पूजा से पहले मुख्य पुजारी मधुसूदन दास गोस्वामी जल छिड़ककर सबकी शुद्धि करते हैं।

मंडा पूजा का इतिहास भी काफी प्राचीन है. लोग बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत नागवंशी राजाओं के द्वारा की गई थी. पौराणिक कथाओं के अनुसार झारखंड में मनाई जाने वाली मंडा पूजा भगवान भोले शंकर की पहली पत्नी सती के बलिदान की याद के रूप में मनाई जाती है. ये भक्त दहकते अंगारों पर बच्चों को भी सिर के बल झुलाते हुए निकल जाते हैं.

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