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आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- स्‍कूल में एडमिशन के लिए जरूरी नहीं

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New Delhi: Aadhaar Card Supreme Court Verdict News Updates: आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से आधार लिंक करना जरूरी नहीं है. आधार कार्ड को पैन कार्ड से जोड़ना जरूरी होगा. आधार एक्ट के सेक्शन 33(2) को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है. इससे डेटा शेयरिंग पर रोक लग जाएगी. इसके अलावा सेक्शन 57 पर भी रोक लगा दी गई है. सेक्शन 57 के तहत सरकार और प्राइवेट कंपनियों को आधार का डेटा मांगने का अधिकार दिया गया है. जस्टिस एके सीकरी ये फैसला पढ़ रहे हैं.

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फैसले में कहा गया कि प्राइवेट कंपनी बायोमैट्रिक डेटा साझा नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा CBSE और NEET आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं. स्कूल भी एडमिशन के लिए लिए आधार कार्ड को अनिवार्य तौर पर नहीं मांग सकते हैं. इसके लिए अवैध प्रवासियों को आधार नहीं दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके जरिए आधार से हाशिए पर जी रहे लोगों को सुविधा हो रही है.

सीकरी ने आधार पर फैसला पढ़ते हुए कहा कि राज्य और जनता के हित संतुलित होने चाहिए.  संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस पर कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं. सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखा है.

आधार 12 अंको की एक संख्या है जो देश के नागरिकों के लिए पहचान के तौर पर जारी की जाती है. आधार के जरिए कई योजनाओं का फायदा सीधे लाभार्थियों को उनके बैंक अकाउंट में दिया जाता है. आधार कार्ड पर फैसला मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा और जज एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड और अशोक भूषण की बैंच ने सुनाया है. आधार के इस फैसले से सरकार और लोगों पर बड़ा असर पड़ेगा.

आधार की सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन को लेकर हमेशा सवाल उठता है. सरकार का दलील है कि आधार के जरिए कई कामों में सुविधा हुई है. अभी UIDAI देश में आधार कार्ड जारी करता है. इसमें लोगों के बायोमेट्रिक, आइरिश और फोटो की जानकारी ली जाती है. ये डेटा UIDAI के सर्वर में रहता है. जिसे भेद पाना बहुत मुश्किल है.

आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसले का लाइव अपडेट

आपको बता दें कि इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. अटार्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने उसके बाद पीठ को बताया था कि 1973 के केसवानंद भारती के ऐतिहासिक मामले के बाद सुनवाई के दिनों के आधार पर यह दूसरा मामला बन गया.

यहां जरूरी नहीं आधार

CBSE, NEET में आधार जरूरी नहीं है. इसके आलावा स्कूल में एडमिशन के लिए भी आधार कार्ड जरूरी नहीं है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह भी तय हो कि घुसपैठियों का आधार न बने.

आधार प्राइवेसी में दखल पर जरूरत भी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मौलिक अधिकारों पर भी कुछ बैन लग सकता है. अगर किसी व्यक्ति का डेटा किसी को दें तो उसे बताएं. आधार प्राइवेसी में दखल तो है पर जरूरत को भी देखना है.

तीन जजों की एक राय

CJI दीपक मिश्रा, जस्टिस सीकरी, जस्टिस खानविलकर की एक राय. आधार यूनीक सबसे अलग बनाता है. मौलिक अधिकारों पर कुछ बैन लग सकता है.

जस्टिस एके सीकरी का फैसला

जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि आधार समाज के हाशिए वाले वर्ग को ताकत प्रदान करता है और उन्हें एक पहचान देता है, आधार अन्य आईडी प्रमाणों से भी अलग है क्योंकि इसे डुप्लिकेट नहीं किया जा सकता है.

 

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