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लिव इन रिलेशनशिप झारखंड के गरीब आदिवासियों की क्यों है मजबूरी?

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Ranchi: निमित फाउंडेशन के सचिव निकिता सिन्‍हा बताती हैं कि झारखंड के कई स्थानों पर लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़े हैं. उसे उनके समाज की स्वीकृति भी प्राप्त है. दरअसल, परंपरा के अनुसार पूरे गांव को खाना खिलाना पड़ता है, जिसके बाद  विवाहित माना जाता. ऐसा करने में सक्षम नहीं रहने वाले जोड़े साथ में तो होते हैं. लेकिन आर्थिक स्थिति दयनीय होने के कारण यह समाज की परंपरा निभाने में अक्षम होते हैं. ऐसे में बिना विवाह किए ही साथ में रहते हैं. कई जोड़े तो बुजुर्ग भी हो चुके हैं. उनके बड़े-बड़े बच्चे भी हैं. लेकिन सामाजिक रूप से वह बिना विवाह किए रह रहे हैं. ऐसे ही जोड़ों की तलाश कर उनकी शादी कराई जा रही है. रजिस्ट्रार के यहां से शादी को कानूनी रूप भी दिलाई जाती है.

महिलाएं हक से हो जाती हैं वंचित

लिव इन में रहने वाली महिलाओं को दुखनी कहा जाता है. फाउंडेशन के अनुसार इनके बच्चों को कानूनी तौर पर कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं होती. लेकिन शादी हो जाने के बाद यह सरकार की सभी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे.

प्रत्येक जोड़े के साथ 10 लोगों को लाने की व्यवस्था फाउंडेशन की ओर से की गई है. ऐसे में डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों के विवाह समारोह में जितने की उम्मीद है, फाउंडेशन के अनुसार इसमें खूंटी, गुमला और रांची जिला प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है. समारोह स्थल पर पेयजल व मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी कराई जा रही है.

मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का नहीं मिलता लाभ

झारखंड सरकार गरीब बेटी-बहनों की शादी के लिए मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का लाभ दिया जाता है. इसके बावजूद आदिवासियों का एक बड़ा तबका इस योजना का लाभ लेने से वंचित है. सरकार सुदूर गांवों में इस योजना की जानकारी देने में नाकाम रहा है. गरीबों को इस मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का लाभ लेने के लिए एनजीओ के जरिये जानकारी मिलती है और कई साल लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद निमित जैसी संस्‍थानों के पहल पर सहयोग मिल पाता है.

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पिछले साल 43 जोड़ों का विवाह फाउंडेशन की ओर से जैप ग्राउंड में कराया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास भी पहुंचे थे. प्रत्येक जोड़ों को 11,000 रुपए मुख्यमंत्री को ओर से दिए गए थे और कन्यादान योजना का लाभ भी इन्हें मिला था, जिसमें प्रत्येक जोड़ों को 35000 रुपए दिया गया था.

निमित फाउंडेशन झाखंड में 132 आदिवासी जोड़ों का शादी कराने जा रही है. निमित फाउंडेशन के ट्रेजरर रणधीर कुमार ने बताया कि 132 जोड़ों में सभी समुदाय और जाति के जोड़े हैं, जिनकी शादी करायी जा रही है. यह जोड़े खूंटी, लसिया, बसिया, गुमला, घाघरा और तोरपा आदि क्षेत्रों के हैं. उनका विवाह समारोह रांची के दिन दयाल नगर स्थित आईएस क्लब में 14 जनवरी को आयोजित की जाएगी.

लिव इन रिलेशनशिप झारखंड के गरीब आदिवासियों की मजबूरी

निमित फाउंडेशन की सचिव निकिता सिन्हा ने बताया कि बीते 2 सालों में अब तक 64 लिव इन में रहने वाले आदिवासी जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है. साथ ही गृहस्थी के सामान भी तोहफे के रूप में दिए गए.

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