विरासत : हाराडीह के शिव व दुर्गामंदिर में छिपा है सदियों पुराना इतिहास का रहस्‍य

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रांची-जमशेदपुर मार्ग पर बुंडू से करीब 15 किमी पूर्व में कांची नदी के तट पर स्थित है हाराडीह गांव

#Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची से 60 किलोमीटर दूर हाराडीह गांव को कुछ लोग इतिहास बनाने से रोक रहे हैं. दरअसरल कांची नदी के किनारे बसे इस गांव के पास प्रचीन शिव मंदिर और दुर्गा मंदिर है. जिसे देश के इतिहासकारों को आकर्षित किया है. ये यहां पर इतिहास के पन्‍नों से रहस्‍यों को हटाने के लिये खुदाई कर रहे हैं. लेकिन गांव के कुछ रूढिवादी लोगों को यह नागवांर गुजर रहा है.

उकसावे पर ग्रामीणों ने बंद करा दिया प्राचीन मंदिर की खुदाई

जानकारी के अनुसार हाराडीह गांव के इन दो मंदिरों के अलावा प्राचीन समय में यहां कई और मंदिर थे. पुरातत्व विज्ञानी ए घोष ने सन 1944 में यहां पर मंदिरों के कई भग्नावशेष देखे थे, जो लगभग 9वीं-10वीं सदी के बताये जाते हैं. आर्कियोलॉजिकल सर्वे अॉफ इंडिया (एएसआइ) का रांची सर्कल इन प्राचीन मंदिर की खुदाई तथा संबंधित स्थल की घेराबंदी कर रहा था, जिसे कुछ लोगों के उकसावे पर ग्रामीणों ने बंद करा दिया है.

एएसआइ के अधिकारियों के समझाने पर भी (वह वहां से मिट्टी का एक ढेला भी नहीं ले जायेंगे, यदि मंदिर में कोई चढ़ावा आता है, तो वह भी पुजारी या स्थानीय लोगों का ही है) ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं.

करीब 4.48 एकड़ रकबा वाली यह जमीन सीओ तथा सीआइ तमाड़ की रिपोर्ट (दिनांक 15.4.2008) के अनुसार सरकारी है. उन्होंने यह रिपोर्ट तब दी थी, जब एएसआइ, मंदिर की खुदाई तथा इसके संरक्षण के लिए संबंधित स्थल को अधिसूचित करने जा रहा था. वहीं, यह काम वित्तीय वर्ष 2012-13 में शुरू होकर गत छह माह से बंद है. उधर, खूंटी जिले के 20 किमी की परिधि में स्थित पांच असुर स्थलों (साइट) खूंटी टोला, कटहर टोली, कुंजाला व हंसा की जमीन भी स्थानीय रैयतों के होने के कारण यहां खुदाई कार्य शुरू नहीं हो सका है. वहीं सारिदकेल में यह काम शुरू होने के बाद गत 10 वर्षों से बंद है.

मुश्किल होता जा रहा है पुरातत्व का काम

राज्य की पुरातात्विक धरोहर की खोज व इनके संरक्षण का काम कठिन होता जा रहा है. राज्य सरकार के पास पुरातत्व से जुड़े लोगों की कमी है.

उप निदेशक स्तर के एक अधिकारी डॉ अमिताभ कुमार के भरोसे ही राज्य भर के पुरातात्विक स्थलों, स्मारकों व स्थलों को संरक्षित करने तथा इसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा है. एक ओर राज्य सरकार खुद कई काम नहीं कर पा रही, वहीं दूसरी ओर एएसआइ को भी काम नहीं करने दिया जा रहा है. इन्हें स्थानीय लोगों का विरोध तथा राज्य सरकार का असहयोग दोनों झेलना पड़ रहा है.

 

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