लॉ स्‍टूडेंट सामूहिक दुष्‍कर्म केस में 11 दोषियों को आजीवन कारावास, 100 दिनों में मिला पीड़िता को न्‍याय

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Ranchi: लॉ स्‍टूडेंट से सामूहिक दुष्‍कर्म मामले में रांची की अदालत ने 11 दोषियों को आजीवन सजा का फैसला सुनाया है. इस तरह से पीडिता को 100 दिनों के अंदर इंसाफ मिला है. हाई कोर्ट के निर्देश पर केस की डे-टू-डे सुनवाई हुई. 24 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी गई. यही नहीं हाई कोर्ट खुद मामले की मॉनीटरिंग कर रहा था. इसी का परिणाम है कि महज 92 दिन में पीडि़ता को न्याय मिला है.

दोषियों को सजा का ऐलान करते हुए अदालत ने कहा कि घटना जघन्य अपराध है. सजा के बिंदु पर सुनवाई के क्रम में न्याययुक्त नवनीत कुमार की अदालत में कठोरतम फैसला सुनाया गया है. कोर्ट ने इस बहुचर्चित वीभत्‍स मामले में 11 अभियुक्‍तों को दोषी ठहराया है.

इस मामले में 12वां आरोपी नाबालिग है, जिस पर जुवेनाइल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है. कोर्ट ने पिछली सुनवाई में 11 अभियुक्‍तों को दोषी करार देते हुए 2 मार्च को सजा का एलान करने की तारीख मुकर्रर की थी। तब सभी अभियुक्‍त बिरसा मुंडा जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत में पेश किए गए थे.

पिछली सुनवाई में 26 फरवरी को न्यायायुक्त नवनीत कुमार की अदालत ने 12 में से 11 अभियुक्तों को सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट, चोरी सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया था. वहीं, एक को नाबालिग घोषित किया गया है. नाबालिग का मामला किशोर न्याय बोर्ड में चलेगा. सभी 11 अभियुक्त होटवार जेल में बंद हैं.

कांके के संग्रामपुर में 12 युवकों ने किया था

लॉ स्‍टूडेंट से सामूहिक दुष्‍कर्म की यह वारदात 26 नवंबर की है. 12 युवकों ने कांके के संग्रामपुर में लॉ छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था. दूसरे दिन छात्रा की शिकायत पर कांके थाना में 12 आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर 29 फरवरी को जेल भेज दिया था.

इस मामले में पीडि़ता के साथ अमानवीयता की हदें पार करते हुए तीन-चार अभियुक्‍तों ने एक नहीं दो-दो बार दुष्‍कर्म किया, जबकि 12 दरिंदे करीब दो घंटे तक उसे जानवरों की तरह नोचते-खसोटते रहे.

ये हैं आरोपित

कुलदीप उरांव, सुनील उरांव, संदीप तिर्की, अजय मुंडा, राजन उरांव, नवीन उरांव, बसंत कच्छप, रवि उरांव, रोहित उरांव, सुनील मुंडा, ऋषि उरांव एवं एक नाबालिग.

रिनपास में होगी शारीरिक व मानसिक जांच

नाबालिग घटना को अंजाम देने में सक्षम है या नहीं, इसकी जांच होगी. किशोर न्याय बोर्ड की अनुशंसा पर रिनपास में नाबालिग के मानसिक व शारीरिक क्षमता की जांच की जाएगी। जांच में अगर नाबालिग घटना को अंजाम देने में सक्षम पाया जाता है तो इस स्थिति में उसे वयस्कों की तरह ट्रायल फेस करना पड़ेगा.

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