51 सालों में नहीं हुआ जमीन का बन्‍दोबस्‍ती, तीन-तीन बार हुआ फाइल गायब

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Ranchi: गुमला जिला के पालकोट प्रखंड के बघीमा पंचायत के हंसदोन मौजा की खाता न० 43 प्लॉट न० 213 रकबा 1.18 एकड व प्लॉट न० 280 रकबा 0.85 एकड़ कूल 2.03 एकड़ वन भूमि‍ को कृषी योग्य रहने के कारण इसे वन सीमा से मुक्त करते हुए वन प्रमण्डल पदाधिकारी, गुमला के द्वारा बघीमा के एक भूमीहिन व गरीब बीपीएलधारी रामकिशोर पाठक व इनके स्वर्गीय पिता लालमोहन पाठक को लिखित विभागीय पत्र के माध्यम से देकर इसे अंचलाधिकारी से बन्दोबस्त कराने को कहा था. लेकिन आवेदन के बाद बीते 51 सालों में तीन-तीन बार फाइल खुला. लेकिन, बन्दोबस्ती वाद का फाइल कार्यालय से गायब हो जा रहा है. जिसके कारण भूधारी रामकिशोर पाठक का 51 सालों के इतने लम्बे अंतराल में भी वन विभाग से प्राप्त भू खण्डो का बन्दोबस्ती अब तक नहीं हो पाया है.

अब रामकिशोर पाठक ने के द्वारा लोकायुक्त , झारखण्ड(रांची) के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज करायी है और जांच व कारवाई कर न्याय दिलाने की गुहार की है. लोकायुक्त को भेजे गए शिकायत पत्र में उन्होने कहा है कि बन्दोबस्ती के लिए मेरे आवेदन देने के पश्चात प्रस्ताव बनाकर अंचलाधिकारी, पालकोट द्वारा  उक्त भू खण्डो की बन्दोबस्ती के लिए जिले के भूमि‍ सूधार उप समाहर्ता के यहां भेजी गयी और वहां वहां पर बन्दोबस्ती वाद सं०- 11/1969-70 का पहला फाइल खोला गया और जांचकर रिपोर्ट अंचलाधिकारी पालकोट से मांगी गयी. लेकिन, कुछ समय के बाद अंचल कार्यालय से फाइल ही गायब हो गया.

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उन्‍होंने कहा कि मुझे आवेदक के द्वारा पुन: दोबारा आवेदन लगाया तो फिर प्रस्ताव बनाकर अंचलाधिकारी के द्वारा पुन: भूमि‍ सूधार उप समाहर्ता के यहां भेजी गयी, जिस पर पुन: वहां पर बन्दोबस्ती वाद सं०- 14/1969-70 का एक फाइल खुला और अंचलाधिकारी से फिर रिपोर्ट तलब किया गया. लेकिन, वह फाइल भी गायब हो गया.

दिनांक 21.01.1987 मेरे द्वारा इस बाबत एक आवेदन भूमि‍ सूधार उप समाहर्ता, गुमला के नाम लिखकर पुन: अर्जी किया गया कि बन्दोबस्ती का दोनों फाइल गायब हो जाने से मेरा बन्दोबस्ती का काम रूका  है. अत: आग्रह है कि एक नया फाइल खोलकर मेरा बन्दोबस्ती का कार्य को किया जाये. जिसपर भूमि‍ सूधार उप समाहर्ता के द्वारा  पुन: तिसरी बार बन्दोबस्ती वाद सं०- 18आर०08/ 1990-91 का एक फाइल पुन: खुला और उस पर भी अंचलाधिकारी,  पालकोट से रिपोर्ट तलब किया गया.

आरटीआई से भी नहीं मिली सूचना

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उन्‍होंने बताया कि  काफी लम्बे समय से पालकोट अंचल से रिपोर्ट नहीं भेजने पर मेरे द्वारा सन 2013 में एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन भूमि‍ सूधार उप समाहर्ता के कार्यालय में देकर अंतिम बन्दोबस्ती फाइल व सम्पूर्ण जांच रिपोर्ट फाइल की अभिप्रमाणित प्रति की मांग की गयी. लेकिन, सूचना का अधिकार से भी बन्दोबस्ती फाइल हासिल नहीं हुआ.  अपील वाद सं०- 1076/13 में ‘झारखंड राज्य सूचना आयोग’  के मुख्य सूचनायुक्त के निर्देश पर सूचना में फाइल की अभिप्रमाणित प्रति की जगह एक शपथ-पत्र भूमि‍ सुधार उप समाहर्ता के द्वारा देकर बोला गया कि काफी खोजबीन के बाद भी बन्दोबस्ती का उक्त फाइल कार्यालय में नहीं मिल रहा है. अत: ये सूचना नहीं होने का प्रमाण दिया जा रहा है. साथ में बन्दोबस्ती फाइल 18/90-91 के स्थान पर नया प्रस्ताव तैयार कर विधिवत कारवाई करने के लिए अंचलाधिकारी पालकोट के नाम विभाग पत्रांक 130/रा० , दिनांक 26.08.2015 के तहत भेजी गयी है. जो पत्र शपथ-पत्र के साथ संलग्न है.

मुख्यमंत्री जनसंवाद में भी नहीं सुलझा

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उन्‍होंने बताया कि सूचना का अधिकार का मामला आयोग से निस्तारण होने के बाद अंचलाधिकारी द्वारा मामले को लटकाने को लेकर मेरे द्वारा एक शिकायत  मुख्यमंत्री जनसंवाद में लगाया गया. जिसकी शिकायत सं०- 2018-6042 है जहां से रिपोर्ट तलब करने पर अंचलाधिकारी, पालकोट के द्वारा पत्रांक- 75 (ii) , दिनांक 16-09-2018 के तहत लिखित में कहा गया कि हल्का कर्मचारी व अंचल निरीक्षक के प्रतिवेदि‍त किया गया है कि बन्दोबस्ती के लिए आवेदित जमीन किस्म जंगल-झाड़ी व नदी के नाम पर सर्वे खति‍यान में दर्ज है तथा वन विभाग का होने के कारण उक्त जमीन पर बन्दोबस्ती अंचल कार्यालय की ओर से वर्तमान में नहीं हो रहा है. उक्त जमीन वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन पट्टा हेतु ग्राम सभा एवं वनाधिकार समिति द्वारा अनुसंशित के लिए दिया गया है.

लोकायुक्‍त के पास पहुंचा मामला

शिकायतकर्ता रामकिशोर पाठक ने लोकायुक्त से कहा है कि सन 1968 को वन विभाग से भू खण्ड मिलने के उपरांत आज लगभग 51 सालों में  उक्त भू खण्डों पर मेरे द्वारा खेती-बारी किया जा रहा है. ‘वनाधिकार कानून 2006 में लागू हुआ, इतने लम्बे अरसे से तीन-तीन बार बन्दोबस्ती फाइल को गायबकर अभी इस तरह का कहा जा रहा है जो भ्रष्टाचार व प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ मुझ गरीब आवेदक को जानबुझकर परेशान करना है. रामकिशोर पाठक के द्वारा लोकायुक्त से सारे मामले की उच्च स्तरिय जांचकर विधि सम्मत कारवाई करने तथा वन विभाग से प्राप्त जमीन/भू खण्डों को उनके नाम बन्दोबस्ती कराने का आग्रह किया गया है.

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