रेलवे टेंडर घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव को जमानत

New Delhi: रेलवे टेंडर घोटाला मामले में आरोपी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत मिली है. गुरुवार को इस मामले में दिल्ली की पटियालाहाउस कोर्ट ने लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लालू कोर्ट में पेश हुए. वहीं, तेजस्वी यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी गुरुवार को दिल्ली की अदालत में पेश हुईं.

तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी को पहले ‌मिल चुकी जमानत

इससे पहले पटियालाहाउस कोर्ट में राबड़ी और तेजस्वी की दो बार पेशी हो चुकी है, जिसमें तेजस्वी और राबड़ी देवी को जमानत दे दी गई थी. वहीं, आज कोर्ट ने लालू को भी अंतरिम जमानत दे दी है. लालू यादव को अंतरिम जमानत मिलने के साथ ही तेजस्वी और राबड़ी देवी समेत अन्य आरोपियों की अंतरिम जमानत 19 जनवरी तक बढ़ा दी गई है.

पिछली सुनवाई के समय कोर्ट के सामने पेश नहीं हो सके थे लालू

पिछली सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश नहीं हो सके थे जिसके बाद सुनवाई को टाल दिया गया था. कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए समुचित व्यवस्था करे.

रांची के होटवार जेल में बंद हैं लालू

लालू फिलहाल चारा घोटाला मामले को लेकर रांची के होटवार जेल में बंद हैं और तबीयत खराब होने की वजह से उनका इलाज रांची के रिम्स अस्पताल में चल रहा है. वहीं, रिम्स में बुधवार को लालू प्रसाद के स्वास्थ्य की जांच की गई, जिसमें उनका शुगर लेवल व ब्लड प्रेशर सामान्य पाया गया. आज भी कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग में पेशी के दौरान लालू का स्वास्थ्य सामान्य रहा.

ये हैं आरोप

वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे के पुरी और रांची स्थित बीएनआर होटल को रखरखाव आदि के लिए आईआरसीटीसी को स्थानांतरित किया था. सीबीआई के मुताबिक, नियम-कानून को ताक पर रखते हुए रेलवे का यह टेंडर विनय कोचर की कंपनी मेसर्स सुजाता होटल्स को दे दिए गए थे.

आरोप के मुताबिक, टेंडर दिए जाने के बदले 25 फरवरी, 2005 को कोचर बंधुओं ने पटना के बेली रोड स्थित तीन एकड़ जमीन सरला गुप्ता की कंपनी मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड को बेच दी, जबकि बाजार में उसकी कीमत ज्यादा थी.

जानकारी के मुताबिक, इस जमीन को कृषि जमीन बताकर सर्कल रेट से काफी कम पर बेच कर स्टांप ड्यूटी में गड़बड़ी की गई थी और बाद में 2010 से 2014 के बीच यह बेनामी संपत्ति लालू प्रसाद की पारिवारिक कंपनी लारा प्रोजेक्ट को सिर्फ 65 लाख रुपये में ही दे दी गयी, जबकि उस समय बाजार में इसकी कीमत करीब 94 करोड़ रुपये थी.

 

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