आप तो ब्राह्मण बन गए, अब तो कुडमी को आदिवासी बना दीजिए!

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Ranchi: झारखंड में कुडमियों की आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग बहुत पुरानी है. कई मंचों के जरिए इसके लिए आंदोलन किया गया है और आवाज भी उठाई गई है. बड़े सम्‍मेलन और सभा हुए हैं. सरकार तक सीधे बातों को रखने के लिए आजसू ने गठबंधन सरकार में रहते हुए बागी तेवर दिखाया है.

ऐसा ही एक वाक्‍या 15 दिसंबर 2017 का है. जब शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान आजसू विधायक सदन के बाहर धरने पर बैठ गए. आजसू के विधायक रामंचद्र सहिस ने धरना पर बैठते हुए मांग की थी कि कुडमी को आदिवासी सूची में शामिल किया जाए.

विधानसभा अध्‍यक्ष ने इसे संज्ञान में लिया. उन्‍होंने फौरन दो वरिष्‍ठ विधायक आलमगीर आलम और राधाकृष्‍ण किशोर को उन्‍हें लाने के लिए भेजा. रामचंद्र सहिस सदन के अंदर पहुंचे और सरकार के सामने कुडमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने की बात रखी.

रामचंद्र सहिस अपनी बात सदन में रख ही रहे थे कि प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरन ने बीच में ही टोकते हुए कहा- हमलोग को ब्राह्मण बना दिजिए और आपलोग आदिवासी बन जाइए.

हेमंत सोरेन के इस बयान का पूरे झारखंड में हर जगह जमकर विरोध हुआ. जगह-जगह पुतला फूंके गए. झामुमो के मांडू विधायक जेपी पटेल जैसे कुरमी विधायकों पर पार्टी छोड़ने की मांग की जाने लगी.

आदिवासी कुडमी समाज के प्रदेश अध्‍यक्ष प्रसेनजीत काछिमा कहना है कि यह हमारी बहुत बड़ी विडम्‍बना है. हमारे समाज के लोग चुनाव लड़ते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद भूल जाते हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के मेनिफेस्‍टो में शुरू से ही घोषणापत्र में कुडमी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का मुद्दा रहा है. पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो के मेमोरेंडम में 42 सांसदों और विधायकों ने हस्‍ताक्षर भी किये थे. लेकिन जो भी सरकार बनती है वह इन बातों से मुकर जाते हैं.

पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने  हेमंत सोरेन के (रामचंद्र सहिस द्वारा कुड़मी को एसटी में शामिल किये जाने की मांग पर कटाक्ष करते हुए हेमंत ने आदिवासियों को ब्राह्मण बना देने की बात कही थी) बयान पर कहा कि हेमंत सोरेन अभी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व है.  उनके पिता शिबू सोरेन ने कुड़मी समाज पर कभी भी ऐसा कटाक्ष नहीं किया. हेमंत सोरेन को झारखंड आंदोलन का इतिहास पता होता, तो इस तरह का बयान विधानसभा में नहीं देते.

ऐसा नहीं है कि कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने की मांग सिर्फ आजसू ने ही की. समय के साथ झामुमो का कुडमी को आदिवासी सूची में शामिल करने का विरोध इतना नरम हुआ कि झामुमो के विधायक सदन के बाहर तख्‍ती के साथ कुडमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने की मांग करने लगे.

पिछले साल फरवरी 2019 के विधानसभा सत्र के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के मांडू विधायक जयप्रकाश पटेल ,डुमरी विधायक जगन्नाथ महतो, सिल्ली विधायिका सीमा महतो, गोमिया विधायिका बबीता देवी,निरसा विधायक अरूप चटर्जी आदि ने कुडमी जाति की दोबारा समीक्षा कर वास्तविक स्वरूप में पहचान स्थापित करने की मांग सरकार से की.

अब आते हैं मौजूदा हालात पर. झारखंड में हेमंत सोरेन की गठबंधन सरकार है. झामुमो से तीन कुरमी विधायक मथुरा महतो, जगरना‍थ महतो और सबिता महतो हैं. इनमें से एक कैबिनेट मंत्री भी हैं.

बीबीएम कॉलेज धनबाद के प्रो राकेश कुमार महतो का कहना है कि झारखंड के आदिवासी मूलवासियों का इतिहास गौरवशाली रहा है. उन्‍होंने कहा कि हम मेन स्‍ट्रीम के इतिहासकारों को चुनौति देते हैं कि उनके पास कोई तथ्‍य हैं तो पेश कर सकते हैं. हमारे पर कुडमियों के जनजाति होने सबूत हैं. इन्‍हें कोई नकार नहीं सकता है.

इधर हेमंत सोरेन मुख्‍यमंत्री बनने के बाद कुछ ज्‍यादा ही धार्मिक हो गये हैं. पिछले दो महीने में झारखंड के धार्मिक तीथ स्‍थलों के साथ-साथ बाहर काशी जैसे में माथ टेक रहे हैं और पूजा-आरती कर रहे हैं.

ऐसे में मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन के जेहन में उन पुरानी बातों को तरोताजा करना जरूरी है. जिसके लिए आजसू समेत झामुमो के विधायकों ने भी विधानसभा में आवाज बुलंद की थी. क्‍योंकि नई सरकार बनने के बाद मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन से कुडमी समाज कुछ बेहतर के उम्‍मीद में है.