मांगे पूरी नहीं हुई तो 2019 चुनाव में सरकार को दिखा देंगे कुडमियों की ताकत

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Ranchi: झारखंड में कुडमी समाज के लोग आक्रोश में हैं. 27 जनवरी 2019 को रांची के मोराबादी मैदान में कुडमी आक्रोश महारैली हो रही है. इसमें कुडमियों की महाजुटान लाखों की संख्‍या में जुटेंगे. इसमें हम अपनी 23.5 फीसदी कुडमियों की आबादी की ताकत सरकार को दिखायेंगे. ताकत देखने के बावजूद भी लोकसभा की अधिसूचना के पहले हमारी मांगों को लेकर राज्‍य सरकार कैबिनेट से अनुशंसा करके केंद्र को नहीं भेजती है, तो चुनाव में एक भी सीट पर भारतीय जनता पार्टी को हम जीतने नहीं देंगे. यह बातें मीडिया से बात करते हुए कुडमी संघर्ष मोर्चा के अध्‍यक्ष शीतल ओहदार ने कही. उन्‍होंने कहा कि लोकसभा चुनावों के बाद झारखंड में होने वाली विधानसभा के चुनाव में भी हम भारतीय जनता पार्टी को सत्‍ता में नहीं आने देंगे.

शीतल ओहदार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हमें स्‍पष्‍ट आश्‍वासन दिया गया था. भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष लक्ष्‍मण गिलुआ ने अपने लेटर हेड पर लिखित कहा था कि मुझे सांसद बनाइए, मैं कुडमी को एसटी में शामिल करने के लिए संसद में बात रखूंगा. हमलोगों ने उन्‍हें चाईबासा सीट से एमपी बनाया. उन्‍होंने एक दिन भी हमारी बात को लोकसभा में नहीं रखा.

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उन्‍होंने कहा कि पिछली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मेनिफेस्‍टो में था कि अगर हम सत्‍ता में आयेंगे को कुडमी को एसटी सूची में शामिल करेंगे. वह सत्‍ता में आये, लेकिन उनके द्वारा एक पहल नहीं किया गया. हामरी मांगों को मानने के बजाये हमारे खिलाफ लेटर जारी किया गया. आज आक्रोश में है कुडमी समाज.

कुडमी समुदाय की मांगे

शीतल ओहदार ने बताया कि हम कुडमी को आदिवासी सूची में शामिल करने की लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. साथ ही हमने कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. हम सरना धर्मकोड की भी मांग करते हैं.

रैली की तैयारी

शीतल ओहदार ने कहा की आगामी 27 जनवरी 2019 को रांची के मोराबादी मैदान में होने वाली कुडमी आक्रोश महारैली की तैयारी पूरी हो चुकी है. पूरे प्रदेश से कुडमी समाज के लाखों लोग अपनी पारम्परिक वेश-भूषा, हल, जुआट, ढोल-नगाड़ा, मांदर, छऊ नाच, नटुआ नाच, पाता चान, तथा गाजे-बाजे के साथ रांची के मुख्य पथ से गुजरते हुए मोराबादी मैदान पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि 27 जनवरी को कुडमी आक्रोश महारैली ऐतिहासिक होगी तथा आने वाले दिनों में यह महारैली झारखंड की दशा और दिशा तय करेगी.

तेज होगा आंदोलन

केन्द्रीय उपाध्यक्ष राजेश महतो ने कहा कि 1931 तक कुडमी आदिम जनजाति की सूची में शामिल था और संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत 1950 में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाना था. लेकिन सरकार ने सोची समझी साजिश के तहत कुडमी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं किया. केन्द्रीय उपाध्यक्ष रूपलाल महतो ने कहा कि सरकार अविल्म्ब कुडमी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करें नहीं तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी तेज होगा.

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