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आंध्र के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने की आत्महत्या, तेदेपा ने वाईएसआरसीपी को जिम्मेदार ठहराया

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Hyderabad: आंध्र प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कोडेला शिवप्रसाद राव ने सोमवार को यहां स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली. तेदेपा ने आरोप लगाया है कि वाईएसआरसीपी सरकार द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण राव ने यह कदम उठाया. वह 72 वर्ष के थे. प्रारंभिक ऑटोप्सी रपट में इस बात की पुष्टि हुई है कि तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राव ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली.

राव ने सुबह लगभग 11 बजे बंजारा हिल्स स्थित अपने आवास में सीलिंग फैन से एक कपड़ा बांध कर फांसी लगा ली.

राव की बेटी ने ड्राइवर और चौकीदार की मदद से उन्हें बसवातारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर हास्पिटल पहुंचाया, जिसके वह संस्थापक अध्यक्ष थे.

चिकित्सकों ने कहा कि राव को जब सुबह लगभग 11.35 बजे लाया गया था, तब उनके शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी. चिकित्सक उन्हें बचा पाने में विफल रहे और दोपहर बाद 12.39 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

पुलिस ने संदिग्ध परिस्थिति में मौत का एक मामला दर्ज किया है और जांच शुरू की है. पुलिस उपायुक्त ए.आर. श्रीनिवास ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि वह मानसिक तनाव में थे.

पुलिस ने राव के शव को सरकार द्वारा संचालित उस्मानिया जनरल अस्पताल पहुंचाया, जहां फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने ऑटोप्सी किया.

शव को बाद में यहां स्थित तेदेपा मुख्यालय, एनटीआर ट्रस्ट भवन ले जाया गया, ताकि पार्टी नेता राव को अंतिम श्रद्धाजलि अर्पित कर सकें.

तेदेपा ने राव की मौत के लिए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. तेदेपा नेताओं ने इसे सरकार द्वारा की गई हत्या करार दिया है. उन्होंने कहा कि राव झूठे मामलों के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव में थे.

तेदेपा प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि राव ने यह आत्मघाती कदम इसलिए उठाया, क्योंकि वह मानसिक प्रताड़ना बर्दास्त कर पाने में अक्षम थे. नायडू ने गुंटूर में संवाददाताओं से कहा, “मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि कोडेला शिवप्रसाद राव, जो कि खुद एक चिकित्सक थे, इस तरीके से अपनी जिंदगी समाप्त कर देंगे.”

नायडू बाद में हैदराबाद पहुंचे. वह अन्य नेताओं के साथ शव को लेकर मंगलवार सुबह गुंटूर जिले के नरसारावपेट जाएंगे.

हालांकि वाईएसआरसीपी ने तेदेपा के आरोपों का खंडन किया है. सत्ताधारी पार्टी को संदेह है कि परिवार में मतभेदों के कारण राव ने आत्महत्या की है.

शहरी विकास मंत्री बोत्सा सत्यनारायण ने मांग की है कि तेलंगाना सरकार राव की मौत की एक गहन जांच कराए. उन्होंने आश्चर्य जताया कि जिस व्यक्ति के बारे में शुरू में माना गया कि हृदयाघात हुआ होगा, उसे एक कैंसर अस्पताल क्यों ले जाया गया.

इस बीच, पुलिस ने नरसारावपेट और आसपास के इलाकों में हिंसा भड़कने से रोकने के लिए एहतियातन निषेधाज्ञा लागू कर दी है.

पेशे से चिकित्सक राव ने तेदेपा संस्थापक एन.टी. रामा राव के निमंत्रण पर 1982 में राजनीति में कदम रखा था.

गुंटूर जिले के एक वरिष्ठ तेदेपा नेता राव ने अविभाजित आंध्र प्रदेश में एन.टी. रामा राव और एन. चंद्रबाबू नायडू सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया था.

वह 2014 से 2019 तक विधानसभा अध्यक्ष भी रहे. हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में वह हार गए थे.

छह बार विधायक रह चुके राव के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है.

राव और उनके बेटे शिवराम कृष्णा के खिलाफ पिछले महीने आंध्र प्रदेश पुलिस ने मामला दर्ज किया था. उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने विधानसभा के फर्नीचर अनधिकृत तरीके से अपने परिसरों में पहुंचा दिए थे. कुछ फर्नीचर गुंटूर में शिवराम कृष्णा के एक मोटरबाइक शोरूप से बरामद हुआ.

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