जानिए STATUE OF UNITY को

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2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे, अहमदाबाद में निकाय चुनाव होने थे. उस वक्त उन्होंने वादा किया था.  सरदार पटेल की मूर्ति  का वादा. 8 साल बाद मोदी बतौर प्रधानमन्त्री 31 अक्टूबर को स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का उद्घाटन कर रहे हैं. सुनने में आ रहा हैं कि इस मूर्ति को चीन में बनवाया गया है. लेकिन सच क्या हैं आज आपको लोकल खबर बताने जा रहा हैं

ये मूर्ति इस पृथ्वी की अब तक की सबसे ऊंची मूर्ति है.  जिसकी ऊचाई 182 मीटर हैं. अमेरिका कि स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी 93 मीटर की है. यानी सरदार पटेल अमरीका की सबसे फ़ेमस मूर्ति की दोगुनी ऊंचाई होगी . इस प्रोजेक्ट में 2 हज़ार 9 सौ करोड़ रुपये खर्च हुई है. जिसे पूरा करने में 42 महीना समय लगा. ये प्रोजेक्ट मई 2015 में शुरू किया गया था. इस मूर्ति को डिज़ाइन  राम वी सुतार ने किया है. सुतार  पद्मभूषण  सम्मानित मूर्तिकार है. मूर्ति  को रूप देने के लिए चीन की  जियांग्जी टोकिन कंपनी की मदद ली गई. स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी गुजरात मके वडोदरा से 90 किलोमीटर की दूरी पर, सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट द्वीप पर हैं. जो नर्मदा नदी के बिच में हैं.

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मूर्तिकार राम वी सुतार ने सबसे पहले सरदार पटेल की 1949 में खींची गई एक तस्वीर के आधार पर काम शुरू किया. एक 18 फुट की डमी मूर्ति बनाई गई जिसे लोगों को दिखाया गया. सरदार पटेल के गांव में बात की गई. ऐसे 2 लोगों को भी वो मूर्ति दिखाई गई जिन्होंने असल में सरदार पटेल को देखा था. इन सभी लोगों से बातचीत और उनसे मिले रिऐक्शन्स के आधार पर सुतार ने 30 फुट की मूर्ति बनाई जिसे 182 मीटर का बनाना था.

इस मूर्ति का बेस 25 मीटर ऊंचा है. इसी हिस्से में प्रदर्शनी हॉल वगैरह हैं. मूर्ति के सर से लेकर अंगूठे तक की लम्बाई  182 माइनस 25 बराबर 157 मीटर है . मूर्ति तीन लेयर्स में बनी है. पहली सबसे अंदरूनी लेयर RCC ( Reinforced Cement Concrete ) से बनी है. यह 127 मीटर ऊंचे 2 टॉवर हैं जो स्ट्रक्चर को खड़ा रखते हैं. इसके ऊपर की लेयर स्टील की है और उसपर कांसा चढ़ा है जो हमें दिखाई देगा यह सबसे बहरी लेयर हैं . कांसा 8 मिलीमीटर मोटा है. दोनों टॉवरों में एक-एक लिफ्ट लगी हुई है जो 4 मीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से एक साथ 26 लोगों को ले जाएगी.

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इसका भव्य स्वरुप. इस पूरे स्ट्रक्चर में 70 हज़ार मीट्रिक टन सीमेंट लगा है. इतने सीमेंट से 3500 2BHK माकन बनाया जा सकता हैं. 2 लाख 12 हज़ार क्यूबिक मीटर कंक्रीट लगा है. 18 हज़ार मीट्रिक टन रीइंफ़ोर्समेंट स्टील और 6 हज़ार 500 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील लगा है. इस सब पर 22 हज़ार स्क्वायर मीटर कांसे की प्लेटें लगी हैं. इस सब का वज़न सरदार पटेल की मूर्ति के पैरों में आ रहा था. देश भर के हर बड़े कम्पनी ने हाथ खड़े कर दिए. तब विवश होकर चीन जाना पड़ा और जियांग्जी टोकिन कंपनी (JTQ) को ये काम सौंपा गया. ढलाई का काम शुरू हुआ और एक-एक कर के चीन से कांसे की प्लेटें आने लगीं. स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी ऐसी ही 7 हज़ार प्लेटों से बनी है जिन्हें आपस में वेल्डिंग कर के जोड़ा गया है. तब जाकर यह मूर्ति आज अपने भव्य स्वरुप में  आज आपके सामने खरी हैं.

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