विकास भारती के मधुमक्खी पालकों ने डाबर इंडिया के विशेषज्ञों से जाना नई तकनीक की जानकारी

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Ranchi: विकास भारती बिशुनपुर के रांची कार्यालय परिसर रांची में डाबर इंडिया और विकास भारती बिशुनपुर के संयुक्त तत्वावधान में मधुमक्खी पालकों का एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार में मधुमक्खीपालन एवं जीविकोर्पाजन पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी.

विकास भारती बिशुनपुर सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि डाबर के विभिन्न प्रकार के प्रोडक्शन के सहयोग से समाज को आगे बढ़ाया गया. डाबर एवं विकास भारती के संयुक्त तत्वावधान में दुनिया को मेडिशनल फूड के रूप से शहद देने का प्रयास किया जायेगा. इसके साथ ही झारखण्ड एवं बिहार के मधुपालकों को विशेष प्रोमोट किया जायेगा. इसके साथ-साथ समाज में बेरोजगारी को दूर करने के लिए मधुपालन भी एक अच्छा व्यवसाय है इससे हम सबको सरकार के दिशा निर्देश के साथ-साथ खुद को भी आगे बढ़ाना होगा.

खेती एवं पशुपालन से ज्यादा मुनाफा मधुपालन में

डाबर इंडिया लिमिटेड के केन्द्रीय नियोजन विभाग हेड सोमित मुखर्जी ने कहा कि झारखण्ड-बिहार के किसान मुख्य रूप से कृषि तथा पशुपालन पर विशेष ध्यान देते हैं. इसके साथ-साथ अगर किसान मधुपालन पर कम ही समय में, कम ही जगहों में इमानदारीपूर्वक ध्यान दें तो उन्हें खेती एवं पशुपालन से ज्यादा मुनाफा मधुपालन में होगी. मधु को पूर्व से ही अमृत की संज्ञा दी गयी है. विश्व में सभी देशों में धार्मिक रूप से इसको शुद्ध माना गया है. जो मानव शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी है तथा इसके साथ पंजाब, हरियाणा, झारखण्ड एवं बिहार में मधुपालन का विशेष उपयोगी जगह माना जाता है. अतः हम सभी किसान मधुपालन से दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं.

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डाबर इंडिया लिमिटेड के सलाहकार जैव संसाधन विभाग के डॉ॰ बदरी नारायण ने कहा कि झारखण्ड प्राकृतिक धरोहर है. झारखण्ड में विभिन्न प्रकार के मेडिशनल पेड पौधे तथा खेती बारी की भरपूर मात्रा है. इसलिए यहां मधुपालन करना बहुत ही उपयुक्त है.

उन्होंने कहा कि विकास भारती इसका अर्थ भारत का विकास हम सभी डाबर के लोग खुशनशीब हैं जो विकास भारती जैसी संस्थान के साथ काम करने का मौका मिला है और हम सभी मिलकर मधुपालकों आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का काम करेंगे.

मधुपालकों को काफी लाभ मिलने की संभावना

डाबर इंडिया लिमिटेड के हेड जैव विकास समूह के पंकज रातुरी ने कहा कि झारखण्ड में मधुपालन की विशेष समभावनाएं हैं. खासकर अगर महिलाएं पुरूषों के साथ मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ने विशेष भूमिका निभा सकती हैं. यहां देखा जाता है कि विदेशी मधुमक्खीयां के जगह पर लोकल एपीस मक्खी को झारखण्ड बिहार में प्रोमोट किया जाय तथा इनको बढ़ने के लिए उचित एरिया में ले जाकर इनका उचित माईग्रेशन किया जाय एवं उचित भोजन दिया जाय तो मधुपालकों को काफी लाभ मिलने की संभावना है.

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झारखण्ड खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्या श्रीमती रंजना चौधरी ने कहा कि सबसे पहले मैं डाबर के अधिकारियों को बधाई देती हूं, जिन्होंने विकास भारती संस्था के साथ मिल कर काम करना चाहा. झारखण्ड भौगोलिक स्थिति में काफी परिपूर्ण है. यहां जनजातीय समाज के लोग 91 प्रतिशत लोग गांव में निवास करते हैं. अगर इन्हें मधुपालन का उचित दिशा निर्देश दिया जाय तो इनकी आमदनी अच्छी हो जायेगी. लोग मधुपालन कर उसे बाजार में बेच देते हैं. अगर उसे खूद खाने में भी इस्तेमाल करें तो अमृत जैसी मधु शारीरिक एवं आर्थिक दोनों रूप से आगे बढ़ा जा सकता है. गांव में कुपोषण दूर करने में सहायक हो सकती है.

इस कार्यक्रम में डाबर इंडिया के सुरेन्द्र भगत, डॉ बदरी नारायण, डॉ पंकज रातुरी, अजय कुमार एवं विकास भारती बिशुनपुर सचिव पद्मश्री अशोक भगत, खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्या श्रीमती रंजना चौधरी के साथ-साथ राज्य समन्वयक श्री पंकज कुमार सिंह एवं संस्था के कार्यकर्त्ता एवं गुमला जिले से 100 कार्यकर्त्ताओं उपस्थित थे.

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कार्यक्रम में अन्त में धन्यवाद ज्ञापन राज्य समन्वयक पंकज कुमार सिंह ने कहा कि डाबर इंडिया के साथ हमलोगों ने जो मधुपालन कार्य शुरू किया है उसमें शत-प्रतिशत खरा उतने का प्रयास करेंगे साथ मधुपालकों को उचित प्रशिक्षण तथा सरकार के चलाये गये विभिन्न योजनाओं के तहत उनको लाभ दिलाने का प्रयास किया जायेगा. यह जानकारी विकास भारती मीडिया प्रभारी अरविन्द कुमार द्वारा दी गई.

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