8 करोड़ रुपये का कांची पुल तीन साल में कैसे टूटा, सरकार ने दिए जांच के आदेश

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Ranchi: सरकार ने बुंडू तमाड़ बॉर्डर में कांची नदी पर हाराडीह-बुढ़ाडीह पुल ढहने की उच्‍च स्‍तरीय जांच का आदेश जारी कर दिया है. संसदीय कार्य और ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने जांच के लिए तीन अधिकारियों की जांच टीम तैयार की है. जिसकी अध्‍यक्षता पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख करेंगे. साथ ही जांच दल में भव निर्माण विभाग के मुख्‍य अभियंता और जेएसआरआरडीए के मुख्‍य अभियंता को सदस्‍य बनाया गया है.

सरकार ने जांच दल को निर्देश देते हुए कहा है कि इसकी जांच कर रिपोर्ट जल्‍द विभाग को दें. साथ ही दोषी अधिकारियों और संवेदक को चिन्हित करने के लिए भी कहा गया है.

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पुल ढहने से चार प्रखंडों का टूटा संपर्क

हाराडीह का यह पुल ग्रामीण क्षेत्र का मेरुदंड था. जो सरायकेला खरसावां जिला को जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल बंगाल के रास्ते को सीधा संपर्क बनाता था. रांची जिला का सबसे लंबा पुल था. ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य सड़क हेठ‌बुढ़ाडीह और हाराडीह‌ मंदिर को जोड़ने वाली कांची नदी पर बने सबसे लंबे पुल जो बुंडू, तमाड़, सोनाहातू, राहे प्रखंड को जोड़ती है, गुरुवार को दोपहर में ढह दर्जनों गांव का संपर्क टूट गया है. अब लोगों को नदी पार होने के लिए 12 किलोमीटर दूरी तय करनी होगी. इस पुल का निर्माण संवेदक रंजन पांडे के द्वारा कराया गया था. आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में भी भारी अनियमितता की गई थी.

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध बालू उठाओ की ब पुल के आसपास जेसीबी मशीन का प्रयोग लगातार होने के कारण यह ढह गया है.

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फीता भी नहीं कटा था पुल का

बता दें कि इस पुल का निर्माण तीन वर्ष पूर्व हुआ है. पुल का संपर्क रोड भी नहीं बना है और अभी इसका विधिवत उदघाटन भी नहीं हुआ है. इस सड़क पर प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों का आगमन होता था. ग्रामीण क्षेत्र का मुख्य सड़क बन रहा था. इस सड़क से तमाड़ होते हुए ईसागढ़ प्रखंड के मिलन चौक कुकरू प्रखंड सरायकेला खरसावां जिला को संपर्क करते हुए सीधे पश्चिम बंगाल राज्य को जोड़ती थी. ग्रामीणों को आने-जाने का सीधा रास्ता था. शादी विवाह के समय हर रात भर सैकड़ों वाहनों का आवागमन होते रहता था. धीरे-धीरे यह सड़क ग्रामीण क्षेत्र का अंतर राज्य सड़क बनने जा रहा था.

ठेकेदार ने जो भी पुल निर्माण किया ढह गया

इस पुल का निर्माण लगभग आठ करोड़ की लागत से संवेदक रंजन पांडे की ओर से लगभग 5 वर्ष में पूरा किया था. इसके पूर्व इसी संवेदक ने सोनाहातू और तमाड़ प्रखंड को जोड़ने के लिए कांची नदी पर बामलाडीह और गोमियाडीह के बीच 8 वर्ष पूर्व पुल निर्माण किया था वह पुल भी उद्घाटन के पूर्व ही ढह गया था. पुल निर्माण करने वाले संवेदक और बालू उठाव अवैध रूप से करने वाले लोग पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं. इस पुल के ढहने से संवेदक और ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं का पोल खुल गया है. ग्रामीण तरह-तरह के सवाल खड़ा कर रहे हैं. पुल निर्माण कार्य में अभियंताओं की देखरेख नहीं होती थी. संवेदक के लोक मनमानी ढंग से कार्य करते थे.

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