दो महीने में जेवीएम के विधायक 3 से घट कर हो गए एक

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Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने राज्‍य के सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. चुनाव नतीजों में जेवीएम के तीन उम्‍मीदवार बाबूलाल मरांडी, बंधु तिर्की और प्रदीप यादव जीतकर विधायक बने. सिर्फ दो महीने के भीतर जेवीएम के विधायक तीन से घटकर एक हो गया है. जेवीएम ने प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को एक-एक करके पार्टी से निकाल दिया है. ऐसा क्‍यों हो रहा है. क्‍या जेवीएम का वाकई में भाजपा में विलय हो रहा है. पूरी खबर पढिए और खुद तय करिए आखिर जेवीएम का ये पॉलिटिकल चक्‍कर क्‍या है?

विधायक प्रदीप यादव को जेवीएम ने पार्टी से निष्‍कासित कर दिया है. प्रदीप 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव में पोड़ैयाहाट सीट से जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते. चुाव के दो महीने के भीतर जेवीएम के तीन विधायकों में दो को पार्टी ने कार्यवाही करते हुए निष्‍कासन की कार्रवाई है. दोनों विधायकों बंधु तिर्की और प्रदीप यादव पर एक जैसे आरोप लगाए गये और एक जैसी कार्रवाई की गई. दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर 48 घंटे का शो कॉज जारी किया गया था.

प्रदीप यादव को पार्टी से निष्‍कासित करने की कार्रवाई के पहले जेवीएम ने विधायक दल के नेता के पद से भी मुक्‍त कर दिया था. झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय प्रधान महासचिव अभय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी की नीति-सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए प्रदीप यादव की ओर से हाल के दिनों में कई संगठन विरोधी कदम उठाये जा रहे थे.

प्रदीप यादव को सीएए-एनआरसी का विरोध पड़ा भारी

अभय सिंह ने कहा कि पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में लिये गये निर्णय के खिलाफ जाकर उन्होंने सीएए और एनआरसी के विरोध में आयोजित सभा में हिस्सा लिया और नई दिल्ली जाकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की.

जेवीएम महासचिव ने कहा कि इस तरह की अनुशासनहीनता का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देष पर चार फरवरी को दोपहर एक बजे उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज कर 48घंटे के अंदर जवाब देने का निर्देष दिया गया था. लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त हो जाने के बावजूद प्रदीप यादव की ओर से कोई जवाब नहीं भेजा गया. जिसके बाद उन्हें बाबूलाल मरांडी के निर्देष पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का फैसला लिया गया.

इस तरह सिर्फ दो महीने के भीतर ही जेवीएम पार्टी में तीन विधायक से घटकर एक अकेले विधायक बाबूलाल मरांडी रह गये हैं. क्‍या इसे हम जेवीएम या बाबूलाल मरांडी के द्वारा अपने पैरों पर कुल्‍हाड़ी मारना कहेंगे. या यूं कहें कि बाबूलाल ने कुल्‍हाड़ी पर ही अपने पैर रख दिया.

कम से कम बाबूलाल मरांडी और उनकी पार्टी से ये उम्‍मीद नहीं की जा सकती है. हालांकि झारखंड चुनाव के पहले से बाबूलाल मरांडी के भाजपा से नजदीकी की खबरें आ रही थी और चुनाव के बाद तो जेवीएम के भाजपा में विलय की बाते तो खुल के सामने आने लगी.

जेवीएम की ओर से कभी भी आधिकारिक तौर पर पार्टी के भाजपा में विलय की बात नहीं कही गई. वजह ये भी सकता है कि तब जेवीएम के विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की भाजपा में जाने के लिए किसी भी हालत में सहमत नहीं थे. उन्‍होंने लगातार भाजपा और उसकी नीतियों का हर मंच पर खुलकर विरोध किया.

और इन्‍हीं सबको वजह बनाकर अब जेवीएम ने अपने विधायक प्रदीप यादव के खिलाफ कार्रवाई की है. जेवीएम को प्रदीप यादव के द्वारा एनआरसी और सीएए का विरोध रास नहीं आया. पार्टी के महासचिव अभय सिंह ने इसे ही आधार बनाकर प्रदीप यादव के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया और जवाब नहीं देने पर पार्टी से निकाला.

कहां है बाबूलाल मरांडी

चाहे विधायक बंधु तिर्की पर कार्यवाई की बात हो या विधायक प्रदीप यादव की. पार्टी के फैसले पर केंद्रीय अध्‍यक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देश पर कार्रवाई की बात मीडिया को बताई गई. लेकिन झारखंड चुनाव नतीजों के बाद ज्‍यादातर समय जेवीएम सुप्रीमो झारखंड से बाहर रहे हैं. चर्चा यह भी है कि वह अपना ज्‍यादातर समय भाजपा के केंद्रीय नेताओं के से मिलने में बीता रहे हैं. चुनाव के बाद वह कई बार दिल्‍ली और कोलकाता हो आए हैं.

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