Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2019: सजायाफ्ता पूर्व मंत्री व पूर्व विधायकों की पत्नियां लड़ेंगी विधानसभा चुनाव

Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है. इस बार कई सजायफ्ता पूर्व विधायकों व पूर्व मंत्रियों की पत्नियां भी चुनाव मैदान में होंगी. वहीं कुछ नेता अपनी सीट अपने कब्जे में ही बनाए रखने के लिए अपनी पत्‍नी को चुनावी मैदान में उतार रहे हैं.

पूर्व मंत्री राजा पीटर की पत्नी आरती कुमारी: आरती कुमारी झारखंड के पूर्व मंत्री राजा पीटर की पत्‍नी हैं. फिलहाल राजा पीटर पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा के हत्‍या के आरोप में जेल में बंद हैं. राजा पीटर की पत्‍नी आरती तमाड़ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं.

पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी सीमा महतो: सीमा देवी पूर्व विधायक अमित महतो की पत्‍नी हैं. एक मामले में अमित महतो को दो साल से अधिक की सजा सुनाए जाने के बाद उन्‍हें चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगी हुई है. उनकी पत्‍नी सीमा देवी फिलहाल सिल्‍ली सीट की विधायक हैं और फिर से वह यहां से जेएमएम के टिकट से चुनाव लड़ेंगी.

पूर्व विधायक योगेंद्र महतो की पत्नी बबीता महतो: गोमिया के पूर्व विधायक योगेंद्र महतो पर भी अमित महतो की तरह एक मामले में सजा सुनाने के बाद चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगी हुई है. उनकी पत्‍नी भी विधायक हैं और वह जेएमएम के टिकट से गोमिया का चुनाव लड़ेंगी.  

पूर्व मंत्री एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का: झारखंड के पूर्व मेंत्री एनोस एक्‍का फिलहाल बेल पर जेल से बाहर हैं. पर सजा होने की वजह से उन पर चुनाव लड़ने की पांबदी बरकरार है. उनके कोलेबिरा सीट से उनकी पत्‍नी मेनन एक्‍का चुनाव लडेंगी. जेल से बाहर होने की वजह से वह चुनाव प्रचार में पत्‍नी का पूरा साथ देंगे.

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की पत्नी निर्मला देवी: पूर्व मंत्री व बड़कागांव के पूर्व विधायक योगेंद्र साव भी सजायाफ्ता हैं और उन पर चुनाव लड़ने की पाबंदी हैं. इसलिए 2019 चुनाव में उनकी पत्‍नी निर्मला देवी चुनाव लड़ेंगी.

चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्‍नी सुनीता चौधरी: सुनीता चौधरी झारखंड के पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्‍नी हैं. वह आजसू के टिकट से रामगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी.

झारखंड चुनाव में बढ़ेंगी महिला उम्‍मीदवारों की संख्‍या

ऐसे में विधानसभा चुनाव में आधा दर्जन से अधिक सीटों पर बड़े नेताओं की पत्नियां चुनाव मैदान में दिखेंगी. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि इस बार महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी.

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कुल 109 महिला उम्मीदवारों में महज नौ प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी.

हालांकि, वर्ष 2009 के चुनाव की अपेक्षा इस बार एक अधिक महिला विधानसभा पहुंच पाई थीं. पिछले विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों में लुइस मरांडी, गंगोत्री कुजूर, निर्मला देवी व नीरा यादव पहली बार विधानसभा पहुंचीं.

सीता सोरेन, विमला प्रधान, गीता कोड़ा, मेनका सरदार अपनी सीटें बचाने में सफल रही थीं, जबकि गीताश्री उरांव, सुधा चौधरी व अन्नपूर्णा यादव अपनी सीट बचा पाने में असफल रही थीं. कुंती देवी को छोड़कर सभी सात महिला विधायक चुनाव मैदान में थीं, लेकिन इनमें चार को जीत हासिल हुई, जबकि तीन अपनी सीट नहीं बचा सकीं.

एक को छोड़ सभी चुनाव लडऩे को तैयार

पिछले चुनाव में पोटका से भाजपा उम्मीदवार मेनका सरदार, जगन्नाथपुर से जय भारत समानता पार्टी की उम्मीदवार गीता कोड़ा, मनोहरपुर से झामुमो उम्मीदवार जोबा मांझी, मांडर से भाजपा उम्मीदवार गंगोत्री कुजूर, सिमडेगा की भाजपा उम्मीदवार विमला प्रधान, कोडरमा से भाजपा उम्मीदवार नीरा यादव, दुमका से भाजपा उम्मीदवार लुइस मरांडी, जामा से झामुमो उम्मीदवार सीता सोरेन तथा बड़कागांव में कांग्रेस उम्मीदवार निर्मला देवी ने जीत हासिल की थी.

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