Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2019: महागठबंधन के दलों को सता रहा डबल क्रॉस का डर

Ranchi: Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2019: झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है. इन सबके बीच विपक्ष का महागठबंधन (Mahagathbandhan) बीजेपी की सरकार बनने से रोकने लिए कवायद तेज कर दी है.

ये बात जरूर है कि भाजपा ने चुनाव से पहले ही मुख्‍यमंत्री का चेहरा (Face of CM) घोषित कर दिया है. वहीं महागठबंधन में मुख्‍यमंत्री के चेहरे को लेकर असमंजस की स्थिति है. इसके लिए झारखंड विकास मोर्चा (JVM) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के लिए अपनी-अपनी दावेदारी है.

महागठबंधन के सभी दल एक-दूसरे को शक की नजर से देख रहे हैं. ये बातें अनायास चुनावी सभा (Election Rally) के भाषणों में खुलकर सामने देखने को मिल रही हैं.

झारखंड में महागठबंधन में सीटों का बंटवारा इतना आसान नहीं दिखता है. झारखंड के 81 सीटों में से 45 सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव लड़ने की दावेदारी कर चुका है. वहीं कांग्रेस भी 35 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है.

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इधर पूर्व बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा भी ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्‍छा जाहिर कर चुका है. बाबूलाल ने तो सरकार बनने पर छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने तक की घोषणा कर दी है.

महागठबंधन की बड़ी बातें

विपक्षी महागठबंधन में किसी भी पार्टी को दूसरे पर भरोसा नहीं है. सभी अधिक से अधिक सीटों की जिद पर अड़े हैं. इन दलों के बीच इस बात की भी शंका की जा रही है कि जीतने के बाद भाजपा से कौन सी पार्टी समझौता कर सकती है.

कांग्रेस, राजद और वामपंथी दलों ने अब तक कभी भी भाजपा से समझौता नहीं किया है. जबकि झामुमो सरकार गठन के लिए बीजेपी से सांठ-गांठ कर चुका है. बाबूलाल की पार्टी झाविमो के विधायक तो लगातार दो बार अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए.

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विपक्षी महागठबंधन में कोई एक-दूसरे पर जरा भी विश्वास करने को तैयार नहीं है. इस लिहाज से भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा रोकने के नाम पर बनने वाला महागठबंधन आकार लेने से पहले ही धराशायी होता दिख रहा है.

सीटों को लेकर महागठबंधन में जिच बनी हुई है. झामुमो 40 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है. कांग्रेस भी अपने सीटिंग विधायक और पिछले चुनाव में जिन सीटों पर उनके प्रत्‍याशी दूसरे नंबर पर थे, वहां के लिए जमकर हाथ-पैर मार रही है. आंकड़े में देखें तो कांग्रेस 25 से 30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. राजद और वामपंथी पार्टियों की बात करें तो इन हालातों में इनके खाते में सिर्फ 10 सीटें आएंगी.

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झामुमो, कांग्रेस, झाविमो, राजद और वामपंथी पार्टियों को मिलाकर पांच हिस्‍से में 81 सीटें बंटनी है. ऐसे में बढ़ी-चढ़ी दावेदारी के चलते झाविमो के खाते में देने को कुछ नहीं बच रहा. झामुमो और कांग्रेस को अपने हिस्से की सीटें कम कर झाविमो को महागठबंधन में शामिल करने का रास्‍ता बचा है. हालांकि, कांग्रेस और झामुमो इसके लिए तैयार नहीं दिख रहा. संभव है कि पांच में एक या दो पार्टी महागठबंधन से बाहर चला जाए.

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