Jharkhand में 2 रुपये तक बढ़ेंगे बिजली दर, विरोध शुरु

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Ranchi:  लचर विद्युत व्‍यवस्‍था के बीच झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने बिजली दर बढ़ाने का प्रस्‍ताव दिया है. जेबीवीएनएल के प्रस्‍ताव को मंजूरी मिली तो झारखंड में बिजली 2 रुपये पैसे प्रति यूनिट तक मंहगी हो जाएगी. जेबीवीएनएल ने बढ़े हुए नये टैरिफ का प्रस्‍ताव मंजूरी के लिए झारखंड विद्युत नियामक आयोग के पास भेज दिया है.

जानिए कितना बढ़ेगा बिजली दर

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पिछले साल 98 फीसदी बढ़े थे दाम

साल 2018-19 में झारखंड विद्युत नियामक आयोग द्वारा 98 फीसदी मंहगी बिजली दर को मंजूरी दी गयी थी. तब तीव्र विरोध के बाद झारखंड सरकार द्वारा उपभोक्‍ताओं को सब्‍सिडी दी गयी थी. सरकारी सब्सिडी के बाद भी ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट पांच पैसे से 15 पैसे तक और शहरी उपभोक्ताओं पर 65 पैसे प्रति यूनिट तक का ही अतिरिक्त बोझ पड़ा था.

जेबीवीएनएल नियामक आयोग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करता रहा है. पिछले साल इस वजह से झारखंड राज्य बिजली वितरण  निगम पर दो फीसदी पेनाल्टी लगायी गयी थी.

नहीं सुधरी बिजली

बढ़े हुए बिजली टैरिफ पर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से राज्य सलाहकार समिति की बैठक की गयी. इस बैठक में बिजली वितरण निगम लिमिटेड के द्वारा दी जा रही झारखंड की लचर बिजली व्‍यवस्‍था पर कई सवाल खड़े किये गये. झारखंड के मुख्‍यमंत्री रघुवर दास द्वारा हर बार मंचों से हर घर 24 घंटे बिजली के दावे किये जाते हैं. इसी को आधार बनाकर जब सलाहकार समिति की सदस्‍या और जिप अध्‍यक्षा हेमलता उरांव ने सवालों के बौछार शुरू किया तब जवाब जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार के पास भी नहीं था. उन्‍होंने बिजली दर निर्धारण का प्रस्‍ताव हिंदी में भी उपलब्‍ध कराने को कहा. उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दर किसी भी हालत में नहीं बढ़नी चाहिए. शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 25 फीसदी ही बिजली मिलती है.

गांवों में 25 फीसदी बिजली

हेमलता उरांव ने कहा कि सीएम ने कह दिया कि घर-घर बिजली पहुंचा दिये हैं. लेकिन एमडी साहब आप बतायें कि कहां घर-घर तक बिजली पहुंची है. कथनी और करनी में अंतर होता है. खुद मेरे ही गांव में 50 घरों तक बिजली नहीं पहुंची है. एसी रूम में चार्ट बनाने से नहीं होगा. ग्रामीण क्षेत्रों से फिक्स चार्ज भी हटायें. ग्रामीण तो सिर्फ तीन साल ही 11 वाट का बल्ब जलाते हैं. शाम पांच बजे से रात्रि के नौ बजे तक बिजली नहीं रहती है. फिर सुबह चार बजे से सुबह 10 बजे तक बिजली नहीं रहती है. सोने के समय बिजली देते हैं.

ट्रांसफॉरमर के लिए चंदा

समिति की सदस्या हेमलता ने कहा कि जैसा बिजली देंगे, वैसा ही बिल लीजिए. नियम बना है कि ट्रांसफॉरमर का फ्यूज दो से तीन घंटा में बदल देना है, लेकिन 24 घंटे में भी नहीं बदलता. ट्रांसफॉरमर ग्रामीण क्षेत्रों में 48 घंटे में बदल दिया जाना है. लेकिन सालभर में भी ट्रांसफॉरमर नहीं बदलता. ट्रांसफॉरमर के लिए गांव वालों को चंदा करना पड़ता है. तार जोड़ने के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं. गांव वाले पढ़े-लिखे नहीं हैं ऑनलाइन कैसे बिजली बिल का भुगतान करेंगे.

 

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