Take a fresh look at your lifestyle.

झारखंड: दल बदलने वाले इन नेताओं ने सत्‍ता की कुर्सी हासिल की, तीन तो सीएम भी बने

0

Ranchi: सत्‍ता और कुर्सी के लिए राजनीतिक दलों के पार्टी क्‍या नहीं करते हैं. वोट के लिए उसूलों की बात करने वाले नेताओं को पार्टी बदलने में देर नहीं लगती. झारखंड के नेताओं का भी ऐसा दिलचस्‍प इतिहास रहा है. ऐसे चेहरे भी हैं जो झारखंड गठन से पहले झामुमो में गुरुजी की पाठशाला में थे, वे भाजपा में आकर मुख्यमंत्री भी बन गये. जो कभी भाजपा की रीढ़ की हड्‌डी माने जाते थे, वे ही भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही जाने-माने नेताओं के चेहरे और उनके उसूल कब और कैसे बदले.

सुबोध कांत सहाय

जेपी आंदोलन की उपज सुबोधकांत सहाय जनता पार्टी के टिकट पर 1989 में पहली बार सांसद बने. प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री भी बने. इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस को कोसते नहीं थकने वाले सुबोधकांत 1998 में कांग्रेस में शामिल हो गये. इससे पहले कुछ दिनों तक झामुमो में भी रहे. कांग्रेस के टिकट पर ही रांची संसदीय सीट से चुनाव जीते और मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में मंत्री बने.

यशवंत सिन्‍हा

भाजपा के देश के टॉप फाइव नेताओं में शामिल रहे पूर्व केंद्रीय वित्त और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा 1960 से 1984 तक आईएएस रहे. 1984 में जनता दल से जुड़े. 1990-91 में चंद्रशेखर मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री बने. 1996 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. केंद्र में राजग की सरकार में वित्त मंत्री और फिर विदेश मंत्री भी रहे. उनके बेटे जयंत सिन्हा अभी भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं, लेकिन यशवंत सिन्हा भाजपा को कोसते फिर रहे हैं.

डॉ अजय कुमार

डॉ अजय कुमार आईपीएस की नौकरी छोड़ पहले टाटा मोटर्स में सीनियर एक्जीक्यूटिव बने. 2011 में हुए जमशेदपुर लोकसभा उप चुनाव में झाविमो की टिकट पर सांसद बने. मगर 2014 में झाविमो के टिकट पर दोबारा लड़े तो भाजपा के विद्युतवरण महतो से हार गये. पाला बदल कांग्रेस का हाथ थाम लिया. वर्तमान में वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं. खास बात ये है कि उन्हें चुनाव हराने वाले विद्युत वरण महतो चुनाव होने से पहले तक झामुमो में थे.

अर्जुन मुंडा

झामुमो नेता के रूप में 1980 में राजनीति शुरू करने वाले अर्जुन मुंडा ने शिबू सोरेन से राजनीति का ककहरा सीखा. 1995 में खरसावां से झामुमो के विधायक चुने गए. मगर राज्य गठन से ऐन पहले वर्ष 2000 में वे भाजपा में शामिल हो गए. वे 18 मार्च 2003 से दो मार्च 2005, 12 मार्च 2005 से 17 सितंबर 2006 और 11 सितंबर 2010 से 08 जनवरी 2013 तक यानी कुल 2092 दिन झारखंड के मुख्यमंत्री रहे.

बाबूलाल मरांडी

शुरू से ही संघ से जुड़े रहे बाबू लाल मरांडी ने 1991 में भाजपा के टिकट पर दुमका से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गये. 1996 में शिबू सोरेन ने उन्हें फिर हराया. 1998 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बने और इसी साल शिबू सोरेन को संथाल में हराया. इनाम में केंद्रीय मंत्री बनाये गये. वे झारखंड के पहले सीएम भी बने. मगर 2006 में झाविमो का गठन कर अब वे भाजपा के लिए ही चुनौती खड़ी कर रहे हैं.

मधु कोड़ा

मधु कोड़ा ने आजसू में रहकर अलग राज्य का आंदोलन किया. 2000 में जगन्नाथपुर से भाजपा के टिकट पर जीते और बाबूलाल मरांडी सरकार में पंचायती राज मंत्री बने. 2005 में टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय चुनाव जीते. अर्जुन मुंडा सरकार को समर्थन दिया. 2006 में वापस ले लिया. 18 सितंबर, 2006 को पहले निर्दलीय सीएम बने. मगर 2008 में गद्दी छिन गई. 6 माह पूर्व कोड़ा पत्नी गीता कोड़ा संग कांग्रेस में शामिल हो गए.

बंधु तिर्की

मेरी लाश पर झारखंड बनेगा- कहने वाले बिहार के तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद के सुर में सुर मिलाने वाले झारखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की बाद में बाबूलाल मरांडी की पार्टी में चले गये, जो लालू प्रसाद के बयान का सबसे मुखर ढंग से विरोध कर रहे थे. वे मांडर से झारखंड जनाधिकार पार्टी के टिकट पर 2004 और 2009 में विधानसभा का चुनाव जीते. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस होते हुए दो साल पूर्व झाविमो में आ गए.

प्रदीप यादव

2003 में भाजपा के टिकट पर गोड्‌डा संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाले प्रदीप यादव अब भाजपा को ही पटखनी देने के लिए ताल ठोंक रहे हैं. वे बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली झारखंड की भाजपा सरकार में मंत्री रहे. पूर्व सांसद प्रदीप यादव राज्य गठन के बाद से भाजपा का दिन-रात गुणगान करते थे. जब बाबूलाल ने झाविमो का गठन किया, तो वे इसमें शामिल हो गये. अब वे भाजपा की नीतियों के खिलाफ ही प्रचार कर रहे हैं.

शैलेंद्र महतो

पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो की गिनती झामुमो के शीर्षस्थ नेताओं में होती थी. वे 1989 और 1991 में झामुमो के सांसद बने. शुरुआती राजनीति झामुमो की नीतियों पर चली. 1998 में पत्नी आभा महतो सहित भाजपा में चले गये. समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी मौजूद थे. आभा महतो भी भाजपा के टिकट पर 1998 और 1999 के चुनाव में जीत दर्ज की. 28 फरवरी 2019 को वे पत्नी आभा महतो के साथ कांग्रेस में चले गये.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More