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झारखंड: शिबू सोरेन ने संसद में न कोई बहस में हिस्सा लिया और न कोई सवाल पूछा, जानें आपके मौजूदा सांसदों ने क्‍या किया

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Ranchi: 2014 में झारखंड के 14 सीटों में से 12 सीट भाजपा के पास और 2 सीट के जेएमएम के पास है. तारीखों के ऐलान के साथ ही पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गयी है. हम आपको झारखंड के उन चौदहों सांसदों के बारे में बता रहे हैं कि मौजूदा सांसदों ने चुनाव जीतने के बाद लोकसभा में जाकर क्या किया.

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Contents

विद्युत बरण महतो: कुड़मी और मुंडारी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

विद्युत बरण महतो झारखंड के जमशेदपुर लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हैं. पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. इपकी उपस्थिति सदन में 93 फीसदी रही है. उन्होंने संसद के 97 बहस में हिस्सा लिया है. इसके साथ ही उन्होंने 893 सवाल पूछे हैं. बहस के दौरान इन्होंने कुड़मी और मुंडारी भाषा को 8वीं अनूसूची में शामिल करने की मांग भी रखी है. इसके साथ ही धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन को शुरू करने की मांग भी रखी थी.

जयंत सिन्‍हा: नहीं उठाये झारखंड से जुड़े एक भी सवाल

हजारीबाग से सांसद जयंत सिन्हा केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री हैं. 55 साल के सिन्हा पहली बार सांसद बने हैं. लोकसभा में इनकी उपस्थिति 97 फीसदी रही है. इन्होंने सदन के 2 बहस में हिस्सा लिया है. इसके साथ ही कुल 9 सवाल पूछे हैं. बजट सेशन के दौरान उपस्थिति 96 फीसदी रही है. जिसमें झारखंड से जुड़े एक भी सवाल नहीं है.

कड़िया मुंडा: न सवाल पूछे और न मुद्दे उठाये

झारखंड के खूंटी भाजपा के कड़िया मुंडा आठवीं बार सांसद हैं. 82 साल के कड़िया मुंडा सोशल जस्टिस एंड इमपावरमेंट कमिटी के मेंबर भी हैं. संसद में इनकी उपस्थिति 96 फीसदी रही है. लेकिन मात्र 2 ही बहस में हिस्सा लिया है. वहीं इन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा है.

लक्ष्‍मण गिलुआ: हो भाषा और आंगनबाड़ी सेविकाओं के मुद्दे उठाये

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा पश्चिम सिंहभूम से सांसद हैं. संसद में इनकी उपस्थिति 92 फीसदी रही है. इन्होंने 31 डिबेट में हिस्सा लिया है. साथ ही लोकसभा में 513 सवाल भी पूछे हैं. जिसमें हो भाषा को आठवीं अनूसूची में शामिल करने की मांग महत्वपूर्ण है. इसके साथ ही आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए ईपीएफ और सीपीएफ ग्रेजुयटी स्कीम की मांग की थी.

निशिकांत दूबे: 337 डिबेट में हिस्‍सा,676 सवाल पूछे, 48 प्राइवेट बिल लाये

गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे दूसरी बार लोकसभा पहुंचे हैं. सदन में उनकी उपस्थिति 98 फीसदी रही है. साथ ही उन्होंने 337 डिबेट में हिस्सा लिया है. इसके अलावे लोकसभा में 676 सवाल पूछे हैं. वहीं, 48 प्राइवेट बिल भी लाए हैं. जिसमें झारखंड में पुराने और चल प्रोजेक्टों के लिए फंड का मुद्दा भी उठाया था. झारखंड के देवघर में संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने की मांग भी इन्होंने की थी.

पीएन सिंह: धनबाद और बोकारो में एयरपोर्ट बनाने की मांग

झारखंड के धनबाद से भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह भी दूसरी बार लोकसभा पहुंचे हैं. 69 साल के पीएन सिंह की उपस्थिति सदन में 92 फीसदी रही है. उन्होंने सदन के 45 डिबेट में हिस्सा लिया है. साथ ही 185 सवाल पूछे हैं. जिसमें प्रमुख रूप से धनबाद और बोकारो में एयरपोर्ट के स्थापना की मांग है. इसके साथ ही उन्होंने धनबाद गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के स्थापना की मांग भी संसद में उठाया था. धनबाद में खेल सुविधाओं की मांग भी उन्होंने संसद में उठाया था.

रामटहल चौधरी: पारा टीचरों की नियुक्ति का मामला उठाया

रांची से भाजपा सांसद रामटहल चौधरी पांचवीं बार लोकसभा में पहुंचे हैं. 77 साल के रामटहल चौधरी की सदन में उपस्थिति 96 फीसदी रही है. वे सदन के 81 डिबेट में हिस्सा लिए हैं. साथ ही 623 सवाल भी किए हैं. रांची में तीन ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग भी इन्होंने संसद में उठाया था. मनरेगाकर्मियों के लिए भी ईपीएफ आदि की मांग उन्होंने संसद में उठाया था. रांची में ट्रैफिक व्यवस्था, पारा टीचरों की नियुक्ति और रांची जिले को रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने की मांग भी संसद में चर्चा के दौरान सांसद ने उठाया था.

रविंद्र पांडेय: जनरल क्‍लास के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया

गिरिडीह से रविंद्र पांडेय भाजपा के सांसद हैं. वे पांचवीं बार लोकसभा पहुंचे हैं. संसद में इनकी उपस्थिति 91 फीसदी रही है. साथ ही इन्होंने 165 बहस में हिस्सा लिया. सांसद ने लोकसभा में 503 सवाल पूछे. संसद में बहस के दौरान इन्होंने जनरल क्लास के लोगों के लिए आरक्षण की मांग की थी. चंद्रपुरा और बोकारो में न्यू थर्मल पावर प्लांट की मांग. धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन को चालू करने की मांग. आशकर्मियों के लिए मिनिमम वेज की मांग भी इन्होंने सदन में उठाया था.

रविंद्र राय: रेल सुविधाएं बढ़ाने की मांग की

झारखंड बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और कोडरमा से सांसद रविंद्र राय पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. 60 साल के राय की सदन में उपस्थिति 81फीसदी रही है. उन्होंने संसद के 66 बहस में हिस्सा लिया है. साथ ही लोकसभा में 388 सवाल पूछे हैं. इन्होंने नई दिल्ली-राजधानी एक्सप्रेस की हजारीबाग रेलवे स्टेशन पर ठहराव की मांग की थी. साथ ही झारखंड में रेल सुविधाएं बढ़ाने की मांग भी है. आंगनबाड़ी केंद्रों में टॉयलेट और पीने के पानी की सुविधा को लेकर इन्होंने सवाल पूछे थे.

शिबू सोरेन: सवाल पूछने और मुद्दा उठाने की जानकारी नहीं

दुमका से जेएमएम के सांसद शिबू सोरेन आठवीं बार लोकसभा पहुंचे हैं.75 साल के शिबू सोरेन की संसद में उपस्थिति महज 36 फीसदी रही है. उन्होंने अपने इस कार्यकाल के दौरान न ही कोई बहस में हिस्सा लिया और न ही कोई सवाल पूछा है.

सुदर्शन भगत: मंत्री हैं, सवाल पूछने को लेकर रिपोर्ट में जिक्र नहीं

लोहरदगा से बीजेपी सांसद सुदर्शन भगत दूसरी बार लोकसभा पहुंचे हैं. ये केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं. इनकी उपस्थिति, बहस में चर्चा और सवाल पूछने को लेकर रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं है.

सुनील सिंह: चतरा में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की

सुनील कुमार सिंह झारखंड के चतरा से भाजपा के सांसद हैं. पहली बार लोकसभा पहुंचे सुनील सिंह की सदन में उपस्थिति 90 फीसदी है. उन्होंने सदन के 117 बहस में हिस्सा लिया है. साथ ही अपने इस कार्यकाल में 608 सवाल भी पूछे हैं. बहस के दौरान इन्होंने बरवाडीह-चिरमिरी रेलवे लाइन के मुद्दे को उठाया था. चतरा में इन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग भी सदन में की थी.

विजय हांसदा: आदिवासियों से जुड़े मुद्दे उठाये

झारखंड के राजमहल सीट से जेएमएम के विजय हांसदा सांसद हैं. ये पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. इनकी सदन में उपस्थिति 69 फीसदी है. इन्होंने लोकसभा के 35 बहस में हिस्सा लिया. साथ ही 455 सवाल भी पूछे हैं. जिसमें सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग. आदिवासियों को उनके जमीन पर अधिकार की मांग, कोल इंडिया के हेडक्वार्टर को कोलकाता से झारखंड शिफ्ट करने की मांग, संथाल परगना एक्ट की समीक्षा की मांग समेत झारखंड से जुड़े कई मुद्दों को विजय हांसदा ने संसद में उठाया.

वीडी राम: पलामू में रोजगार के लिए मुद्दे उठाये

पलामू से भाजपा के बीडी राम सांसद हैं. ये पहली बार संसद पहुंचे हैं. इनकी उपस्थिति सदन में 92 फीसदी रही है. इसके साथ ही लोकसभा के 81 चर्चाओं में हिस्सा लिया. इन्होंने 411 सवाल भी पूछे हैं. 5 प्राइवेट बिल भी पेश किया. इन्होंने सदन के अंदर पलामू में रोजगार के लिए इंडस्ट्री की मांग, कोयल नदी से जुड़ा मुद्दा, केंद्रीय विद्यालय का सुचारू रूप से संचालन और रेलवे से जुड़े कई मुद्दों को इन्होंने उठाया.

ये रिपोर्ट पीआरएस इंडिया द्वारा तैयार की गई डाटा के आधार पर है. यह रिपोर्ट 1 जून 2014 से लेकर 13 फरवरी 2019 तक की है.

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