20 साल बाद नए रथ की सवारी करेंगे भगवान जगन्नाथ

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कोरोना संक्रमण के कारण दो साल धुर्वा में श्रीजगन्नाथ भगवान की रथयात्रा नहीं निकल पाई थी.कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है ऐसे में रथयात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी. इस बार रथयात्रा 1 जुलाई को निकाली जाएगी। श्रीजगन्नाथ मंदिर न्यास समिति ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है.पुराना रथ जर्जर हो चुका है. ऐसे में नया रथ भी बनकर लगभग तैयार है। इस वर्ष भगवान जगन्नाथ नये रथ पर नगर भ्रमण पर निकलेंगे.

हर साल ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ धूमधाम से निकाली जाती है जिसमें शामिल होने के लिए हर जगह से लोग आते हैं.धुर्वा में पुरी के तर्ज पर ही जगन्नाथपुर मंदिर का निर्माण कराया गया था. 331 साल पहले 1691 में बड़कागढ़ के राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव ने मंदिर का निर्माण करवाया था.

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पुरी की तरह रांची में भी रथयात्रा धूमधाम से निकाली जाती है। भव्य मेला लगता है। हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं. पूरे साल इनकी पूजा मंदिर के गर्भगृह में होती है, लेकिन आषाढ़ माह में लगभग 1 किलोमीटर की अलौकिक रथ यात्रा के जरिए इन्हें मौसीबाड़ी मंदिर लाया जाता हैं.

रथ यात्रा का महत्व

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपनी मौसी के घर जाते हैं. रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से दिव्य रथ पर निकाली जाती है. इस साल जगन्नाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होगी और इसका समापन 9 जुलाई को होगा.

*क्यों निकाली जाती है रथ यात्रा?*

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पद्म पुराण के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की बहन ने एक बार नगर देखने की इच्छा जताई.तब जगन्नाथ और बलभद्र अपनी लाडली बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर नगर दिखाने निकल पड़े.इस दौरान वे मौसी के घर भी गए और यहां नौ दिन ठहरे. तभी से जगन्नाथ यात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है.नारद पुराण और ब्रह्म पुराण में भी इसका जिक्र है.

*नई रथ क्यों है खास*

इस वर्ष भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नए रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए अपने मौसी के घर, मौसीबाड़ी पहुंचेंगे.पुराने रथ की तुलना में नया रथ लगभग 25 फीट ऊंचा है. यह रथ पूरी तरह से सीसम की लकड़ी से बनाया गया है.इस नए रथ को बनाने के लिए खास तौर पर पूरी से कारीगरों को बुलाया गया है.पिछले लगभग एक- दो महीने से बनाया जा रहा है. इस रथ को बनाने में अबतक 40 से 50 लाख रुपए लगे हैं.सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि इस रथ यात्रा में रथ को मंदिर से मौसीबाड़ी तक खींचने में लगभग सवा लाख लोग खीच लेते हैं. रथ को खींचते समय लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है.

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