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झारखंडः हड़ताली पारा शिक्षकों की दो टूक, बैठक में सीएम रहें तब होगी बात

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Ranchi: सरकार से बातचीत को लेकर शिक्षा मंत्री की पेशकश पर हड़ताली पारा शिक्षकों के प्रतिनिधि बजरंग प्रसाद और संजय दूबे ने दो टूक कहा है कि बैठक की अध्यक्षता अगर मुख्यमंत्री करेंगे, तभी वे 26 दिसंबर को जाएंगे. शिक्षा मंत्री से किसी किस्म की वार्ता के लिए शिक्षक तैयार नहीं हैं. हालांकि मुख्यमंत्री बैठक की अध्यक्षता करें और वहां शिक्षा मंत्री मौजूद रहें, तो आपत्ति भी नहीं होगी.
शिक्षा मंत्री के बुलावे पर बजरंग प्रसाद और संजय दूबे का कहना है कि बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करें और इसके लिए अधिकारिक तौर पर पत्र भी जारी किए जाएं. शिक्षक प्रतिनिधियों का दावा है कि पूर्व में शिक्षा मंत्री यह कहती रही हैं कि इस मामले को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री देख रहे हैं, तो बैठक भी सीएम की अध्यक्षता में हो.

26 दिसंबर तक वार्ता की मोहलत

गौरतलब है कि सोमवार को झारखंड विधानसभा के शीत सत्र में विपक्ष ने पारा शिक्षकों की मांग औरआंदोलन के सवाल पर शोर मचाया था. बाद में राज्य की शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने हड़ताली पारा शिक्षकों से 26 दिसंबर को वार्ता करने की पेशकश की थी. शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा था कि विपक्ष इस मामले में राजनीति नहीं करे.

हड़ताल पर 67 हजार पारा शिक्षक

राज्य के 67 हजार पारा शिक्षक पिछले सोलह दिसंबर से आंदोलन की राह पर हैं. पंद्रह नवंबर को झारखंड राज्य के स्थापना दिवस कार्यक्रम का विरोध करते शिक्षकों को पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ी थी. इसी मामले में 280 शिक्षकों को जेल भी भेजा गया था. सेवा स्थायी समेत अन्य मांग को लेकर वे हड़ताल पर हैं. आंदोलन के दौरान अलग-अलग जगहों में कई वजह से पांच शिक्षकों की मौत भी हुई है.

दिहाड़ी मजदूर से भी कम मानदेय

शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि उन पर राजनीति करने के आरोप लगाये जाते रहे हैं, जो निराधार है. उनकी सेवा स्थायी हो. वे शिक्षक ही बने रहना चाहते हैं. और शिक्षक के तौर पर ही 18 सालों से मानदेय पर बच्चों को पढ़ाते रहे हैं. जो मानदेय हमें मिलते हैं वह दिहाड़ी मजदूरी से भी कम है.

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