झारखंड: पिछली रघुवर सरकार की राह पर नई हेमंत सरकार

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Ranchi: झारखंड में नई हेमंत सोरेन की सरकार पुरानी भाजपा सरकार की राह चल पड़ी है. हेमंत सोरेन की सरकार का मंत्रिमंडल विस्‍तार सरकार गठन के एक महीने बाद हुआ है. यह भी फिलहाल अधूरा है. यह अधूरापन ठीक उसी तरह है जैसा भाजपा शासन में रघुवर सरकार के दौरान देखा जा रहा था.

हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर 2019 को झारखंड के नये मुख्‍यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण किया था. तब उनके साथ तीन विधायकों ने रामेश्‍वर उरांव, आलमगीर आलम और सत्‍यानंद भोक्‍ता ने मंत्रीपद की शपथ ली थी. और अब 7 विधायकों ने 30 दिन बाद मंत्री पद का शपथ लिया है. यानि हेमंत सरकार में फिलहाल 11 मंत्री बने हैं. जबकि कायदे से झारखंड में 12 मंत्री पदों के लिए जगह है. 7 नये मंत्री बनने के बाद भी एक मंत्री पद खाली है. यह ठीक उसी तरह हुआ है. जैसे रघुवर शासन में देखा गया. रघुवर सरकार में भी पूरे 5 साल तक एक मंत्री पद खाली रहा.

हेमंत सोरेन की गठबंधन वाली इस सरकार में जेवीएम से कांग्रेस में शामिल होने वाले दो विधायकों के वजह से हुआ है. बंधु तिर्की और प्रदीप यादव के कांग्रेस में शामिल होने की बढ़ी संभावना के बाद झामुमो और कांग्रेस के गठबंधन का फार्मूला फंसता दिख रहा है. वहीं कांग्रेस को अपने पुराने और कद्दावर विधायक राजेंद्र सिंह और इरफान अंसारी का विरोधी तेवर भी परेशान कर रहा है. वहीं अंबा प्रसाद जैसे दूसरे कांग्रेसी नेताओं ने भी मंत्री बनने की उम्‍मीद नहीं छोड़ी है.

ऐसे में 12वें मंत्री का मामला फंसता दिख रहा है. हालांकि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्‍व इसे सुलझाने में जुटा है. कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं. बावजूद इसके कोई सकारात्‍मक नजीजा देखने को नहीं मिल रहा है. ऐसे में विपक्षी भाजपा को तंज कसने का मौका भी मिल गया है. भाजपा द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 11 मंत्रियों वाली सरकार को असंवैधानिक बताने वाले गठबंधन के नेता आज खुद 11 मंत्रियों की सरकार चला रहे हैं.

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