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झारखंड महागठबंधन: कंफ्यूजन ही कंफ्यूजन है, सॉल्‍यूशन का पता नहीं!

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Subhash Shekhar

Ranchi: झारखंड में नवंबर-दिसंबर महीने में विधानसभा चुनाव होना है. इसकी तैयारी सत्‍ताधारी पार्टी ने शुरू कर दी है. चाहे बीजेपी हो या आजसू चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. वहीं दूसरी ओर विपक्ष के महागठबंधन का कुछ पता नहीं है.

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी से दो-दो हाथ करने के लिए झारखंड में महागठबंधन तैयार किया गया था. कांग्रेस के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ा गया था. तभी यह भी तय किया गया था कि विधानसभा चुनाव झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्‍व में लड़ा जाएगा.

साल के आखिरी महिने के आखिरी सप्‍ताह में मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्‍म होने जा रहा है. इसके तकरीबन 60 दिन पहले चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव है. बीजेपी ने झारखंड के लिए अपने चुनाव प्रभारी भी नियुक्‍त कर दिए हैं.

वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस, झामुमो, जेवीएम, राजद, वामदलों की रणनीति क्‍या होगी. इस पर महागठबंधन का नेतृत्‍व करने वाले झामुमो के कार्यकारी अध्‍यक्ष हेमंत सोरेन भी असमंजस की स्थिति में हैं.

10 अगस्‍त को हेमंत सोरेन ने अपना 44वां जन्‍मदिन मनाया. अपने जन्‍मदिन के मौके पर वह बिखरे महागठबंधन को समेटते नजर आये. वह रिम्‍स पहुंचकर लालू प्रसाद यादव से मिले. यहां पर हेमंत ने एक घंटा से ज्‍यादा समय तक उनसे बातचीत की.

मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन ने कहा कि लालू जी ने अपनी जीवनी की किताबें आशीर्वाद के तौर पर दी हैं. हेमंत ने बताया कि लालू जी से महागठबंधन में रहकर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ने को कहा है.

महागठबंधन के प्रमुख घटक दल

झामुमो: झारखंड मुक्ति मोर्चा विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होगी. इसी के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ा जाएगा. बीजेपी को टक्‍कर देने के लिए सभी सहयोगी घटक दलों और नेताओं को एकजुट करके साथ चलने की बड़ी जिम्‍मेदारी है. लोकसभा चुनाव के ठीक पहले जेएमएम विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने पार्टी छोड़कर विरोध में प्रचार किया था. इसका महागठबंधन को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था.  

कांग्रेस: झारखंड में कांग्रेस पार्टी के हालात ठीक नहीं हैं. डॉ अजय कुमार सीडब्‍ल्‍यूसी की बैठक के ठीक पहले इस्‍तीफा दे दिया. चार पन्‍ने के अपने इस्‍तीफे में डॉ अजय ने झारखंड के कद्दावर कांग्रेसी नेताओं को बेनकाब कर दिया है. इसके पहले झारखंड में कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच बहुत कलह हुआ. सुबोधकांत साहय गुट और अजय कुमार ने सरेआम एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाये.

राजद: लालू प्रसाद की राष्‍ट्रीय जनता दल भी लोकसभा चुनाव के बाद दो फाड़ हो गया है. राजद झारखंड के पूर्व अध्‍यक्ष गौतम सागर राणा ने अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी राजद लोकतांत्रिक बनाई है. यह झारखंड में 26 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुका है. इस संबंध में गौतम सागर राणा हेमंत सोरेन से भी मुलाकात कर चुके हैं.

वहीं झारखंड में लालू की राजद की कमान अभय सिंह के जिम्‍मे है. ऐसे में अब हेमंत के लिए बड़ी चुनौती होगी कि वह राजद और राजद लोकतांत्रिक को साथ लेकर कैसे चलें.

जेवीएम: बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा लोकसभा चुनाव से पहले से ही संकट से गुजर रही है. जेवीएम के  के बड़े नेता या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या फिर पद. लोकसभा चुनाव से पहले प्रदीप यादव पर यौन उत्‍पीड़न के आरोप लगे. इसकी वजह से उन्‍हें महासचिव पद से इस्‍तीफा देना पड़ा. इसके बाद केके पोद्दार, योगेंद्र प्रताप सिंह जैसे कई नेता जेवीएम छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. बावजूद इसके जेवीएम के चीफ बाबूलाल मरांडी गठबंधन के साथ या इसके बिना भी झारखंड के सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करते हैं.

वामदल: 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखंड में महागठंधन से दूर रखा गया था. लेकिन झारखंड के विधान सभा चुनाव में हेमंत सोरेने वामदलों को महागठबंधन के साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं.

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