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झारखंड: किसान आत्‍महत्‍या की बढ़ती घटनाएं

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20 दिनों में किसान आत्‍महत्‍या की तीन घटनाएं

Ranchi: झारखंड में किसानों के कल्याण के लिये केन्‍द्र और राज्‍य सरकार की कई योजनायें चल रही हैं. इसके बावजूद राज्‍य में आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से किसान आत्‍महत्‍या कर रहे हैं. राज्‍य में पिछले 20 दिनों के अंदर किसान आत्‍महत्‍याओं की तीन घटनाएं हुईं.

पत्‍नी और दो बेटियों के साथ शिवकुमार ने की आत्‍महत्‍या

गढ़वा जिले के धुरकी थाना क्षेत्र के रक्‍शी गांव के किसान शि‍वकुमार बैठा ने रविवार की रात अपनी पत्‍नी और दो बच्चियों के साथ आत्‍महत्‍या कर ली. शिवकुमार का शव सोमवार को एक पेंड से लटका हुआ पाया गया जबकि पत्‍नी और दो बेटियों का शव कुएं से बरामद किया गया.

बताया जाता है कि शि‍वकुमार ने बैंक और अन्‍य जगहों से करीब पांच लाख रुपये कर्ज ले रखा था. वह इस कर्ज को नहीं चुका पा रहा था. इससे वह पिछले कई महीनों से तनाव में चल रहा था.

गुमला के शिवा ने फांसी लगा ली

इसके पूर्व गुमला के किसान शिवा खड़िया  ने धान का बिचडा झुलस जाने के कारण 30 जुलाई को अपने घर में फांसी लगा कर आत्‍महत्‍या कर ली थी. परिजनों के मुताबिक बारिश नहीं होने के कारण बिचड़ा मर गया था. इससे वह काफी परेशान था. उसने कर्ज लेकर धान बिचड़ा का खरीदा था. इसके अलावा उसे अपनी बेटी की शादी की चिंता भी सता रही थी.

पतरातू के लखन ने दी कूंए में कूदकर जान

रांची जिले के चान्‍हो प्रखंड के पतरातू गांव के किसान लखन महतो ने कर्ज नहीं चुका पाने के कारण 26 जुलाई की रात उसी कुएं में कूद कर अपनी जान दे दी, जिसे कर्ज लेकर उसने बनवाया था. लखन के परिजनों के अनुसार उसने 2017 में स्‍वीकृत मनरेगा कुएं का निर्माण कार्य अपने रिश्‍तेदारों से कर्ज लेकर पूरा किया था.

चान्‍हो प्रखंड के बीडीओ संतोष कुमार ने भी स्‍वीकार किया है कि मनरेगा मद में राशि‍ के अभाव में प्रखंड में करीब 300 किसानों की बकाया राशि‍ का भुगतान नहीं हो पाया है.

लखन महतो की मौत के बाद राज्‍य की सियासत भी गरमायी थी. प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने लखन महतो की मौत पर सरकार को आडे हाथों लेते हुये कहा कि उसकी गलत नीतियों से किसान आत्‍महत्‍या करने पर विवश हो रहे हैं और वह लीपा पोती करने में जुटी हुई है.

दरअसल जिला प्रशासन के निर्देश पर पतरातू गांव गयी दा सदस्‍यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि लखन महतो की मौत कुएं में गिरने से हुई. वह नशा करता था. उधर, भाजपा ने हेमंत सोरेन पर किसान की मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाया था.

दो साल पहले दो किसानों ने की थी आत्‍महत्‍या

रांची जिला में किसी किसान की आत्‍महत्‍या की यह पहली घटना नहीं थी. इसके पहले भी पिठोरिया के दो किसान कर्ज और आर्थिक तंगी के दबाव में आत्‍महत्‍या कर चुके हैं. पिठोरिया थाना क्षेत्र के सुतियांबे गांव के किसान बलदेव महतो ने कर्ज के दबाव में आकर 15 जून 2017 को कुएं में छलांग लगा कर आत्‍महत्‍या कर ली थी. उसने खेती के लिये 40 हजार रूपये कर्ज लेकर कुआं खुदवाया था, लेकिन कुआं से पानी नहीं निकला. इस कारण वह खेत में लगी फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहा था. इससे वह तनाव में था.

पिठोरिया के ही एक अन्‍य किसान कलेश्‍वर महतो ने भी जून 2017 में कर्ज लौटाने के दबाव में आत्‍महत्‍या कर ली थी. उसका शव एक पेड से लटका मिला था. घटना के बाद यह बात सामने आयी थी कि उसने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया था. इस संबंध में उसके पास एक नोटिस आया था, जिसमें कर्ज और सूद मिला कर 50 हजार रूपये से अधि‍क जमा करने को कहा गसा था. कलेश्‍वर इसी को लेकर तनाव में था.

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